Online Booking का बड़ा रिस्क? Porter से सामान गायब होने पर कैसे मिलेगा रिफंड और मदद, एक्सपर्ट से जानें

How to Report Stolen Package: वर्तमान डिजिटल दुनिया काफी तेज चल रही है। बात 9 मिनट डिलीवरी की करें या इंस्टेंट पार्सल डिलीवरी की कई कंपनियां सबसे तेज सर्विस का दावा कर रही हैं। लेकिन जब इन बॉन्ड प्रोसेस होता है वहां तो कस्टमर को सरलता है, लेकिन आउट बॉन्ड प्रोसेस में उपयोगकर्ताओं को अब समस्या होने लगी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अपनी समस्या जाहिर की है। कैब और बाइक राइड सर्विस देने वाली कंपनी रैपिडो ने पार्सल/ कुरियर डिलीवरी की सुविधा भी देती है। ऐसे में डिलीवरी एजेंट पर भरोसा करना ग्राहकों हेतु काफी मुश्किल हो रहा है, और डिलीवरी एजेंट की गलती से संस्थान पर भी विश्वसनीयता कम हो रही है। ऐसे में चलिए साइबर लॉयर और Lex Cyber Attorneys के संस्थापर अंकित देव अर्पण से जानते हैं कि इस समस्या से फंसने पर क्या करना चाहिए।
सामान कोरियर करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
ऐसे में हमें अत्यधिक प्रयास करना है कि अधिक मूल्य की वस्तुओं को भेजने की जल्दीबाजी नहीं करें। डिजिटल दौर पर पूर्णतया निर्भरता भी सही नहीं है। हम इसके लिए ट्रेडिशनल तरीके यथा स्पीड पोस्ट, कुरियर इत्यादि का उपयोग करें। कम समय में अधिक मूल्य की वस्तु भेजनी हो तो स्वयं ही यह दूरी तय करें, क्योंकि रैपिडो जैसी सर्विस का उपयोग डिलीवरी हेतु लगभग 50 किलोमीटर से कम की दूरी हेतु ही किया जाता है। ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर डॉक्यूमेंट्स या कम मूल्य की चीजें ही भेजें।
सामान गायब होने पर क्या करें?
जब आपको इस बारे में पता चल जाए कि आपका सामान चोरी हो गया है, डिलीवरी पार्टनर का फोन बंद है या वह लोकेशन से गायब है। बता दें कि देरी करने से ड्राइवर को भागने का मौका मिलता है और ऐप की जिम्मेदारी भी धुंधली पड़ने लगती है। कंपनी के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करें और उन्हें सामान, उसकी कीमत और घटना के बारे में क्लियर बताएं।
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रिफंड और मुआवजे की प्रक्रिया
Porter और Rapido जैसी कंपनियां अक्सर अपनी Terms & Conditions में लिखती हैं कि वे केवल एक प्लेटफॉर्म हैं। बुकिंग के समय यदि आपने Goods Insurance का विकल्प चुना था, तो रिफंड मिलना काफी आसान हो जाता है। यदि इंश्योरेंस नहीं भी है, तो आप सेवा में कमी के आधार पर कंपनी से हर्जाने की मांग कर सकते हैं। कंपनी को पार्टनर के वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी लेनी होती है।
कंपनी के बात न सुनने पर अपनाएं कानूनी रास्ता
अगर कंपनी आप की बात पर गौर नहीं कर रही है, तो नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर या चोरी की FIR दर्ज कराएं। इसमें डिलीवरी पार्टनर का नाम, गाड़ी का नंबर और मोबाइल नंबर जरूर दें।
अगर कंपनी आपकी बात नहीं सुनती या उचित रिफंड नहीं देती, तो आप ई-दाखिल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन कंज्यूमर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कंज्यूमर कोर्ट ऐसे मामलों में ग्राहकों के पक्ष में कड़े फैसले सुनाता है।
पार्सल चोरी या लापरवाही को लेकर होने को लेकर वायरल हुई पोस्ट
फेसबुक के ग्रुप शेयरिंग इज केयरिंग में रोहित कुमार लिखते हैं कि उन्होंने 8,000 का जैकेट दिल्ली के पहाड़गंज से रोहिणी के लिए मंगाया था, लेकिन डिलीवरी एजेंट ने प्रोडक्ट रिसीव करने के बाद फोन उठाना बंद कर दिया, एवं कनेक्शन समाप्त कर दिया।
यूजर ने ये भी दावा किया है कि गाड़ी के नंबर से कोई डिटेल्स प्राप्त नहीं हो रही।
वहीं एक दूसरी यूजर नेहा सिंह राठौड़ लिखती हैं कि उन्होंने एक पार्सल बुक किया था, जिसमें डिलीवरी एजेंट ने उनसे राइड का फेयर एडवांस में लिया और पार्सल लेकर चला गया। थोड़ी दूर जाने के बाद उसने ड्राइव कैंसल कर दी। कई बार प्रयास करने के उपरांत भी उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला। हालांकि 2 दिन बाद एक पोस्ट में उनके द्वारा अपडेट किया गया कि कंपनी ने प्रयास कर के उनका पार्सल सुरक्षित पहुंचा दिया।
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