Wed Sep 30, 2026 | Updated 08:58 PM IST

दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाना क्यों हो सकता है फायदेमंद? जानें वजह

समय के साथ लोगों की जीवनशैली भी बदल रही है, उसी के अनुकूल खानपान की आदतों में भी बदलाव लाना क्यों जरूरी है? जानने के लिए पढ़ें यह लेख। 
By Sakhi Digital | Edited By Pooja Sinha
Updated:- 2026-09-30, 19:56 IST
why eating small meals 5 or 6 times a day is beneficial for health
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पारंपरिक रूप से भारतीय समाज में तीन या चार वक्त के खाने की परंपरा रही है, जिसमें दोपहर और रात के भोजन के साथ सुबह-शाम का नाश्ता शामिल होता था, लेकिन कुछ लोग व्यस्तता के बहाने से नाश्ते के मामले में बहुत लापरवाही करते हैं या फिर कुछ लोग वजन घटाने के लिए इंटमिटेंट फस्टिंग का भी सहारा लेते हैं। ऐसी आदत सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होती है। अमेरिका के जॉन्सन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के विज्ञानियों द्वारा किए गए एक शोध के बाद यह तथ्य सामने आया है कि एक ही बार ज्‍यादा खाने या ब्रेकफस्ट लंच और डिनर के बीच लंबा गैप देना सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकता है। इससे एसिडिटी के अलावा पाचन तंत्र संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं।

कम और बार-बार खाएं

लंदन के इंपीरियल कॉलेज के विज्ञानियों द्वारा भी एक ऐसा ही शोध किया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि दिन में 9 बार खाने से ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है, लेकिन भोजन की मात्रा सीमित और संतुलित होनी चाहिए। इससे वजन भी नियंत्रित रहता है। इस अध्ययन में 2000 लोगों को शामिल किया गया। सभी को समान कैलोरी वाला भोजन दिया गया, लेकिन आधे लोग केवल 6 बार ही खा पाए और अन्य लोगों ने इससे ज्यादा बार खाया। जिन लोगों ने कम बार खाना खाया, उनका ब्लड प्रेशर दूसरे लोगों से ज्यादा दर्ज किया गया।

पहले ग्रुप के लोगों का वजन भी स्टडी में शामिल अन्य लोगों से थोड़ा ज्यादा पाया गया। यहां इस बात का ध्यान रखा गया कि लोगों ने खाना बेशक कई बार खाया, लेकिन इसकी मात्रा काफी कम थी। हर बार उन्हें 300 कैलोरी वाला आहार दिया गया और इसके अलावा बीच में कुछ भी खाने से मना किया गया। इस अध्ययन के बाद विज्ञानी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक ही बार ज्यादा खाने से बेहतर है कि कम मात्रा में कई बार खाना। यह सच है कि दिनभर में नौ बार खाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, ऐसे में विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि अच्छी सेहत के लिए सभी को कम से कम पांच-छह बार खाने की कोशिश करनी चाहिए।

why eating small meals 5 6 times a day is beneficial

दिन में पांच-छह बार खाने के क्या हैं फायदे?

फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा की डाइटीशियन डॉक्‍टर नमिता नाडर का कहना है कि अगर सीमित मात्रा में बार-बार खाया जाए तो इससे शरीर का मेटाबॉलिक रेट सही ढंग से काम करता है। दरअसल, मेटाबॉलिज्म उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसमें भोजन पचने के बाद उस रूप में बदलता है, जिसे शरीर के सेल्स और टिश्यूज इस्तेमाल करते हैं। हम मेटाबॉलिज़्म की प्रक्रिया के दौरान जो भी आहार ग्रहण करते हैं, वह एनर्जी, एंजाइम्स और फैट में बदलता है। एनर्जी विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल हो जाती है, एंजाइम्स हार्मोंस बनाते हैं और पाचन क्रिया में मदद करते हैं, जबकि फैट शरीर में जमा हो जाता है। अगर मेटाबॉलिज्‍म की प्रक्रिया सही ढंग से काम न करे, तो इससे शरीर में फैट बढ़ जाता है। इससे कोलेस्ट्रॉल और ब्लडप्रेशर, दोनों के बढ़ने की आशंका होती है।

हार्मोन्‍स के लिए फायदेमंद

नियमित अंतराल पर भोजन करने से खून में मौजूद फैटी एसिड्स स्थिर रहते हैं। इनमें ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता। इससे इम्यूनिटी बढ़ती है और हार्मोंन्स भी संतुलित रहते हैं, यह स्थिति डिप्रेशन से बचाव में भी मददगार होती है। वहीं, लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर को खाने की कमी महसूस होती है और इंसान चिड़चिड़ापन महसूस करता है।

सही समय पर खाएं

शरीर को दुरुस्त रखने के लिए अगर आप कई बार खाते हैं, तो आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि इस मामले में नियमित रूप से एक ही जैसी दिनचर्या का पालन किया जाए। अगर आप नियमित रूप से नहीं खाएंगे तो शरीर यह जान नहीं पाएगा कि अगली बार उसे खाना कब मिलेगा? ऐसे में अपने डिफेंस मैकेनिज्‍म के तहत शरीर अतिरिक्त खाने को फैट के रूप में स्टोर करना शुरू कर देता है। इसके अलावा, मेटाबॉलिज्‍म के दौरान रिलीज होने वाले एंजाइम्स भी बेकार हो जाते हैं। वे अपने तय वक्त पर रिलीज होते रहेंगे, लेकिन खाना नहीं मिलने से शरीर इनका सही इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसलिए, खानपान संबंधी दिनचर्या में वक्त की पाबंदी अपनाएं।

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इन गलतियों से बचें

खानपान संबंधी लापरवाही के कारण डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि इस समस्या से ग्रस्त लोग जागरूकता न होने के कारण खानपान के मामले में अक्‍सर गलतियां करते हैं, जो उनकी सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होती हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं-

  • जो लोग केवल ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर करते हैं, उनके हर मील के बीच बहुत लंबा गैप होता है, इसलिए वे एक ही बार में बहुत ज्यादा खा लेते हैं, जिससे शरीर में अधिक मात्रा में ग्लूकोज बनता है, जिसे दवाओं से नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
  • बेवक्त खाने का मेटाबॉलिज्‍म पर बुरा असर पड़ता है, जिससे शुगर लेवल भी बढ़ जाता है।
  • डायबिटीज के मरीजों के लिए मिलने वाले मीठे फूड्स में बेशक चीनी की जगह शुगर-फ्री का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन फैट और कोलेस्ट्रॉल इनमें भी होता है। ध्यान देने की बात यह है कि डायबिटीज के मरीज को घी-तेल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
  • डायबिटीज के मरीज को खाने में परहेज के साथ-साथ खाना बनाने के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। मसलन चावल बनाने के लिए प्रेशर कुकर के बजाय, पतीले का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि स्टार्च निकाला जा सके। नाश्ते के साथ सॉस और जैम-जेली का सेवन न करें, वेफर्स और सॉफ्ट ड्रिंक के बजाय नींबू पानी पानी सेहत के लिए फायदेमंद होगा।

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फल-सब्जियों को करें शामिल

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में किए गए एक शोध के अनुसार, पूरे दिन में फल और सब्जियों की 7 सर्विंग खाने वाले लोग दिमागी और शारीरिक रूप से ज्यादा फिट रहते हैं। ऐसे लोग खुश भी ज्यादा रहते हैं। स्टडी में एक सर्विंग की मात्रा 80 ग्राम की मानी गई। अब सवाल यह उठता है कि हमेशा माप-तौल के खाने में व्यावहारिक दिक्कतें होती हैं, तो कोई इसके कैसे अंदाजा लगाए कि इसके आहार की जरूरतें पूरी हो गई हैं या नहीं? एक सर्विंग का मतलब एक सेब या एक नाशपाती या एक अमरूद या 15-20 अंगूर या पपीते की 2-3 स्लाइसेज से है।

इसी तरह सब्जियों का अनुमान कटोरी से लगा सकते हैं। मसलन एक सर्विंग का मतलब एक छोटी कटोरी। यानी फल और सब्जियां मिलाकर अगर आप दिन भर में 7 सर्विंग खाते हैं, तो इससे आपकी सेहत में तेजी से सुधार होगा। फल और सब्जियों में विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। इनमें फाइबर काफी ज्यादा होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को घटाता है। फल-सब्जियों में फैट काफी कम होता है। अगर फलों पर नमक डाले बिना खाएं तो शरीर में फालतू सोडियम नहीं जाएगा। इससे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों की मात्रा नियंत्रित रहेगी।

coloured fruits and vegetables

सब्जियों को लंच या डिनर के साथ और फलों को बतौर स्नैक्स मील्स के बीच में खाना बेहतर है। इससे ज्यादा मात्रा में फल-सब्जियां खा पाएंगे और तले-भुने स्नैक्स से भी दूर रहेंगे। आप अपने पूरे आहर को इस तरह बांट सकते हैं-मेन मील इसमें सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन शामिल होगा। इसके अलावा 3-4 बार स्नैक्स जैसे स्प्राउट, भुने चने और सूप आदि। दिनभर में 8-10 ग्लास पानी। साथ में नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और दूध आदि भी फायदेमंद होगा।

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हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना और जीवनशैली अलग होती है, जिसके मुताबिक उसके आहार की मात्रा तय की जाती है। आमतौर पर जो डाइट किसी एक के लिए फायदेमंद होगी, जरूरी नहीं कि वही डाइट दूसरे के लिए भी उतनी ही लाभदायक हो। इसलिए बेहतर यही होगा कि किसी डाइटीशियन से सलाह लेने के बाद ही अपने लिए डाइट चार्ट तैयार करें।

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FAQ
दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाना क्यों फायदेमंद हो सकता है?
छोटे-छोटे मील्स लेने से कुछ लोगों को भूख और ऊर्जा को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
क्या दिन में 5-6 बार खाने से वजन कम होता है?
सिर्फ बार-बार खाने से वजन कम नहीं होता। वजन कम करने के लिए कुल कैलोरी, खान-पान और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।
दिन में 5-6 बार खाने पर क्या खाएं?
हर मील में पौष्टिक चीजें शामिल करें, जैसे दाल, पनीर, अंडे, सब्जियां, फल, साबुत अनाज और नट्स।
Disclaimer

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