महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, दादी मां के जमाने के ये 2 तेल बढ़ा सकते हैं सेहत और सुंदरता

ट्रेंड बनने से बहुत पहले, वेलनेस भारतीय घरों में जीवन जीने का सहज और प्राकृतिक तरीका था। हमारे किचन और रोजमर्रा की आदतों से यह समझ आता है कि अच्छी सेहत सिर्फ अलग-अलग चीजों को चुनने से नहीं बनती, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही छोटी-छोटी और रोज की अच्छी आदतों का नतीजा होती है।
आज यह सोच फिर से बदल रही है। आज के समय में युवा (Gen Z और मिलेनियल) अपनी पसंद को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक और समझदार हैं। वे सिर्फ यह नहीं जानना चाहते कि क्या इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि यह भी समझना चाहते हैं कि उसका इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं। साथ ही यह भी जानना चाहते हैं कि चीजें कहां से आती हैं, कैसे बनती हैं और क्या वास्तव में उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने लायक हैं।
यह बदलाव कई लोगों को ट्रेडिशनल चीजों को नए नजरिए से देखने के लिए इंस्पायर कर रहा है। इनमें तिल और सरसों का तेल भी शामिल हैं। जी हां, दो ऐसे तेल, जो सदियों से भारतीय घरों का हिस्सा रहे हैं। इनके फायदों के बारे में हमें दिल्ली की डाइटिशियन सिमरन सैनी बता रही हैं।
देसी तेल के फायदे
पीढ़ियों से भारतीय घरों में कई तरह के तेलों का इस्तेमाल हो रहा है। अलग-अलग जगहों पर वहां की परंपराओं, खाना पकाने के तरीकों और रोजमर्रा की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग तेलों की अपनी जगह रही है। तिल, सरसों, नारियल और कई दूसरे तेल भारतीय जीवनशैली का अहम हिस्सा रहे हैं। इससे यह बात साफ हो जाती है कि वेलनेस का मतलब कभी भी किसी एक 'सुपर इंग्रीडिएंट' पर निर्भर रहना नहीं रहा, बल्कि हर चीज की खासियत और उपयोग को समझना रहा है।

तिल के तेल के फायदे
तिल के तेल में नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी अनसैचुरेटेड फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व होते हैं। इसलिए, इसका इस्तेमाल लंबे समय से सेहत और सुंदरता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
- यह रूखी त्वचा को मॉइश्चराइज करने में मदद करता है। यह त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है।
- बालों और स्कैल्प पर तिल के तेल की मसाज करने से बाल मुलायम होते हैं और चमक भी बनी रहती है।
- कुछ क्लिनिकल रिसर्च के अनुसार तिल के तेल के सेवन से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर में मामूली सुधार देखा गया है।
- यह सूजन को कम करने में भी मदद करता है।
ध्यान रखें: तिल का तेल फायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
सरसों के तेल के फायदे
सरसों का तेल भी अपने खास गुणों के कारण देश के अलग-अलग जगह के खान-पान और पारंपरिक जीवनशैली का अहम हिस्सा रहा है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन E और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। यह दिल की सेहत के लिए अच्छा है, डाइजेशन को सही रखता है, जोड़ों के दर्द से राहत देता है, त्वचा को गहराई से नमी देता है और बाल बढ़ाने में मदद करता है।
- इसका इस्तेमाल चेस्ट में हल्की जकड़न को दूर करने के लिए स्टीम लेने या मालिश के लिए किया जाता है।
- इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFAs) होते हैं जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं।
- इसकी प्राकृतिक गर्माहट खून के बहाव को बेहतर बनाती है और अकड़े हुए जोड़ों या मसल्स के दर्द से राहत देती है।
- यह पाचन रस और गैस्ट्रिक एसिड के स्राव को बढ़ाता है जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अच्छी तरह से होता है।
- यह नमी को बनाए रखता है और रूखी, पपड़ीदार त्वचा को मुलायम बनाता है।
- स्कैल्प की मालिश करने से खून का बहाव बढ़ता है, जिससे बालों की जड़ों को पोषण मिलता है और बाल झड़ना कम होता है।
- इसमें मौजूद विटामिन E एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, जो फाइन लाइंस को कम करता है और UV किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता है।
आज भी इन तेलों की अहमियत बनी हुई है, क्योंकि ये सिर्फ पुरानी परंपराओं का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ऐसी चीजें हैं जिन्हें लोग जानते हैं, समझते हैं और जिन पर भरोसा करते हैं। हालांकि, आज एक बड़ा बदलाव आया है। अब लोग सिर्फ आदत या परंपरा के कारण चीजें नहीं चुनते। वे सोच-समझकर फैसला लेते हैं। वे चाहते हैं कि उनके घर में आने वाले प्रोडक्ट अच्छे, भरोसेमंद और साफ-सुथरे हों।
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यह समझ भी बढ़ रही है कि वेलनेस को सिर्फ खाने या बाहरी इस्तेमाल की चीजों तक सीमित नहीं किया जा सकता। हम जो खाते हैं और जो अपनी त्वचा या बालों पर इस्तेमाल करते हैं, दोनों ही हमारी सेहत को सही रखते हैं।
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असल में, वेलनेस किसी एक दिन लिए गए संकल्प से नहीं, बल्कि रोज किए जाने वाले छोटे-छोटे और सोच-समझकर लिए गए फैसलों से बनती है। चाहे खाने की चीज हो या पर्सनल केयर के प्रोडक्ट्स, जोर क्वालिटी, सादगी और भरोसे पर होना चाहिए।
तिल और सरसों जैसे पारंपरिक तेल हमें याद दिलाते हैं कि सेहत को सही रखने के लिए हमेशा कुछ नया खोजने की जरूरत नहीं होती। कई बार जवाब उन चीजों में ही होता है जिन्हें हमारी पिछली पीढ़ियां लंबे समय से इस्तेमाल करती आई हैं और जिनकी जगह आज भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बनी हुई है।
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Image Credit: Magnific.com
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