PM मोदी ने UAE में किया पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन, जानें इससे जुड़ी 5 खास बातें

आज तक आप संयुक्त अरब अमीरात को बुर्ज खलीफा के नाम से जानते होंगे। लेकिन अब इसे हिंदू मंदिर के लिए भी जाना जाएगा। बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में पहले BAPS हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया गया।
पीएम मोदी ने किया मंदिर का उद्घाटन

जब से पीएम मोदी ने UAE में हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया है, तब से हर जगह बस इसी मंदिर की चर्चा हो रही है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि, जब मैं 2015 में यहां आया था, तो लाखों भारतीयों ने राष्ट्रपति के सामने अबू धाबी में एक हिंदू मंदिर बनाने की इच्छा व्यक्त की थी। (सस्ते में प्लान करें कन्याकुमारी ट्रिप)
वह तुरंत सहमत हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने बहुत कम समय में मंदिर निर्माण के लिए इतनी बड़ी जमीन उपलब्ध कराई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मुझे नहीं पता कि मैं मंदिर का पुजारी बनने के योग्य हूं या नहीं, लेकिन मुझे भारत माता का पुजारी होने पर गर्व है।
बता दें कि यह विशाल मंदिर एक मुस्लिम देश में बनाया गया है, जहां भारतीय दूतावास (Indian Embassy) के अनुसार 26 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की आबादी के अनुसार 30% प्रतिशत है। आज के इस आर्टिकल में हम इस मंदिर से जुड़ी 5 खास बातें बताएंगे।
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जानें मंदिर की खासियत

- क्या हैं UAE के पहले हिंदू मंदिर का नाम- बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन पीएम मोदी द्वारा किया गया। इस भव्य मंदिर के लिए जमीन यूएई ने दान में दी है। 27 एकड़ जमीन पर बने इस इस मंदिर को बनाने में कुल 700 करोड़ रुपए की लागत लगी है। (IRCTC से Tour Package कैसे बुक करें)
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- इस मंदिर का निर्माण कार्य 2019 से चल रहा था। यह मंदिर दुबई-अबू धाबी शेख ज़ायद हाईवे पर बनाया गया है। हाइवे से सटा अल वाकबा अबू धाबी से तकरीबन 30 मिनट की दूरी पर है।
- इस मंदिर को बनाने में 18 लाख पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। यह संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है। मंदिर के लिए बड़ी संख्या में गुलाबी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। यह उत्तरी राजस्थान से अबू धाबी लाइ गए थे। इस मंदिर में राजस्थान की नक्काशी कला को भी स्थान मिला है।
- राजस्थान के मकराना के गांवों के कारीगरों ने मंदिर को बनाने में अहम योगदान दिया है। मंदिर में हिंदू धर्म के साथ-साथ कुरान की कहानियां भी उकेरी गई हैं।
- मंदिर की ऊंचाई 108 फीट है। मंदिर के दोनों ओर गंगा और यमुना का पवित्र जल बह रहा है, जिसे बड़े-बड़े कंटेनर में भारत से लाया गया है। इसके अलावा मंदिर में गुलाबी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ है जिसे भारत से लाया गया है। पत्थर पर नक्काशी भारत के ही मूर्तिकारों ने की है।
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