भारत में ऐसी कई झीले हैं जिनका होना भारत के लिए किसी चमत्कार से काम नहीं है। जैसे- स्पीति वैली में मौजूद चंद्रताल झील 'चांद की झील' के नाम से प्रचलित है। एक अन्य झील को 'रूपकुंड झील' जो कंकालो की झील के नाम से प्रचलित है। आपको बता दें कि ये दोनों ही झीले हिमालय के आसपास मौजूद है। इन दोनों ही झीलों के सामान हिमालय में मौजूद मणिमहेश झील 'शिव के आभूषण' के नाम से भी प्रचलित है। इस झील और इसके आसपास की जगहों पर हर साल लाखों सैलानी घूमने के लिए भी जाते हैं। इस लेख में हम आपको मणिमहेश झील के बारे में करीब से बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं-

मणिमहेश झील

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समुद्र तल से लगभग 4 हज़ार से भी अधिक मीटर की ऊंचाई पर मौजूद मणिमहेश झील हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मौजूद है। शिव के आभूषण के नाम से प्रचलित यह झील मानसरोवर झील के सामान महत्व रखती है। इस झील तक पहुंचने के लिए सैलानियों और तीर्थ यात्रियों को लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करनी होती है। आपको ये भी बता दें कि बर्फ़बारी होने के कारण अधिकांश समय इस झील यात्रा बंद ही रहती है। 

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मणिमहेश झील की कहानी 

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इस प्रसिद्ध झील से एक नहीं बल्कि कई कहानियां है जुड़ी हुई हैं। कहानियों के अनुसार अगर बात करें तो ये माना जाता है कि भगवन शिव ने देवी पार्वती से शादी करने के बाद इस झील का निर्माण किया था। एक अन्य कहानी ये कि ब्रह्मा, विष्णु, और महेश का स्वर्ग स्थान यहीं हुआ करता था। एक अन्य पौराणिक कथा में शिव की तपस्या से जोड़कर ये झील देखी जाती है। (झील जो चांद की झील के नाम है प्रसिद्ध) आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मणिमहेश का शाब्दिक अर्थ होता है 'शिव के आभूषण'। इसलिए यह झील शिव के आभूषण के नाम से भी प्रचलित है। 

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सैलनियों के लिए 

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शायद आपको मालूम हो, अगर नहीं तो आपको बता दें कि साल में एक बार मणिमहेश यात्रा भी होती है, जहां लाखों तीर्थयात्री मणिमहेश घूमने के लिए जाते हैं। लोगों का यह भी मानन है कि इस झील के पवित्र जल में डुबकी लगाने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि जन्माष्टमी से राधाष्टमी के बीच लगभग 15 दिनों की यात्रा अगस्त या सितंबर के महीने में होती है। इस यात्रा की शुरुआत चंबा में मौजूद लक्ष्मी नारायण मंदिर से होकर मणिमहेश झील तक आकर खत्म होती है। 

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मणिमहेश झील पहुंचने के रास्ते 

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मणिमहेश झील पहुंचने के लिए दो तीन माध्यम है। पहला- यहां आप स्पीति से होते हुए पहुंच सकते हैं। दूसरी-हसदर-मणिमहेश मार्ग से होते हुए हडसर गांव और हडसर गांव से ये जगह लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर है। तीसरी- यदि आप पैदल या गाड़ी से जाने में असमर्थ है, तो आप हेलीकॉप्टर राइड के द्वारा भी यहां पहुंच सकते हैं। हालांकि, हेलीकॉप्टर से जाने के लिए आपको 8-10 हज़ार रुपये खर्च करनी पड़ सकती है। 

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