हमारे देश में अलग-अलग आस्‍थाओं को मानने वालों की भारी संख्‍या है। अपनी मुरादों को पूरा करने के लिए लोग, मंदिर, मस्जिद, गूरूद्वारा जाते हैं। कई जगहों पर लोगों की मुरादें पूरी भी होती है और यही वजह है कि यह जगह फेमस हो जाती है। लोगों की आस्‍था इनमें इतनी होती है कि वह बार-बार यहां सर झुकाने आते हैं। आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे ही फेमस दरगाहों के बारे में, जहां लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं और खाली हाथ नहीं लौटते। यह दरगाह आस्‍था और विश्‍वास का केंद्र है। यह सभी दरगाह अपनी वास्तुकला के लिए भी जाने जाते हैं। इन दरगाहों की सबसे खास बात यह है कि यहां सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोग ही नहीं आते, बल्कि हर धर्म के लोग आते हैं। तो चलिए जानते हैं उन सबसे प्रसिद्ध दरगाहों के बारे में जिसके दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं।

मुंबई में स्थित हाजी अली की दरगाह

हाजी अली की दरगाह मुंबई के वर्ली समुद्र तट पर एक छोटे द्वीप पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए समुद्र के बीच से होती हुई एक लंबी सड़क जाती है। इसे बाबा हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह भी कहा जाता है और यह पूरी दुनिया में फेमस है। कोई भी मुंबई घुमने आता है तो इस दरगाह में माथा टेके बिना नहीं जाता। इस दरगाह में सभी धर्मो के लोग अपनी मन्नत मांगने आते हैं। दरगाह के लिए सड़क से एक सेतु बनी हुई है जिसके दोनों ओर समुद्र है और यहां का नजारा देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। बरसात के दिनों में यह सड़क पानी में डूब जाती है, जिससे यहां के लिए आवाजाही रूक जाती है। इसके इतिहास और निमार्ण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इसकी स्थापना साल 1431 में हुई थी। यह दरगाह भारतीय इस्लामिक सभ्यता का नमूना है। सफेद रंग से रंगी इस दरगाह के पास 85 फीट ऊंची एक मीनार है, जो इस दरगाह की खूबसूरती को बयांं करती है। दरगाह के चारों ओर चांदी के डंडो से बना एक दायरा है। दरगाह का मुख्य कमरा संगमरमर का बना हुआ है, आपको बता दें कि यहां बने स्तंभों पर 99 जगहों पर अल्लाह नाम लिखा हुआ है।

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हरिद्वार में स्थित पिरान कलियर शरीफ की दरगाह

अलाउद्दीन अली अहमद साबिर सूफी संत को सम‍र्पित यह दरगाह हरिद्वार के पास कलियारी नामक गांव में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस दरगाह का निर्माण अफगान शासक इब्राहिम लोधी द्वारा तेरहवीं शताब्दी में किया गया था। यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं और यहां हर रोज सभी लोगों के लिए लंगर की व्‍यवस्‍था रहती है। जालीदार दीवारों से बनी यह मजार दिखने में बहुत खूबसूरत है। मान्‍यता के अनुसार लोग अपनी मन्नत का पर्चा यहां लगे एक गूलर के पेड़ पर बांधते हैं।

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अजमेर शरीफ में स्थित ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह

अजमेर शरीफ मुस्लिम धर्म वालों का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के बारे में यह कहा जाता है कि वह‍ अपने उपदेशों के लिए जाने जाते थे। यहां पूरे साल हर धर्म के लोग लाखों की संख्या में आते हैं। इस दरगाह को हुमायूं ने बनवाया था और यह बेहतरीन वास्तुकला का नमूना है। दरगाह अजमेर शरीफ का मुख्य द्वार निजाम गेट के नाम से जाना जाता है, जिसे मीर उस्मान अली खां ने बनवाया था। यहां का मजार संगमरमर और सोने से बना है, वहीं बाहर की रेलिंग चांदी से बनी हुई है। यह दरगाह इतना फेमस है कि यहां आम लोगों के अलावा बॉलीवुड सेलिब्रिटीज तक आते हैं।

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दिल्ली में स्थित हजरत निजामुद्दीन दरगाह

हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह दक्षिणी दिल्ली में स्थित है और ऐसा माना जाता है कि यह सूफी काल से है। चिश्ती घराने के चौथे संत थे हजरत निजामुद्दीन, उनके बारे में कहा जाता है कि उन्‍होंने अपने समय में सहनशीलता और वैराग्य को अपना लिया था। ऐसा माना जाता है कि साल 1303 में हजरत निजामुद्दीन के कहने पर मुगलों ने युद्ध रोक दिया था। दरगाह के अंदर संगमरमर से बना एक कमरा है, जिसमें गुंबद पर काले रंग की लकीरें बनी हुई हैं। यह दरगाह चारों ओर से मेहराबों से घिरा है, जो इस्लामिक वास्तुकला का शानदार नमूना है।

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फतेहपुर सीकरी में स्थित सलीम चिश्ती की दरगाह

फतेहपुर सीकरी में सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह है। इस दरगाह का निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने करवाया था। ऐसा माना जाता हैं कि जब अकबर बच्‍चे के लिए मन्नत मांग रहे थे, उसी दौरान उनकी मुलाकात शेख सलीम चिश्ती से हुई थी और उन्होंने अकबर को संतान प्राप्ति की दुआ दी थी, जिसके बाद अकबर को संतान की प्राप्ति हुई थी। संतान के जन्‍म की खुशी में अकबर ने फतेहपुरी सीकरी का निर्माण कराया और जब शेख सलीम चिश्ती का निधन हो गया तो उनकी याद में यह समाधि बनवाई। साल 1580 से 1581 के बीच में इसका निर्माण करवाया गया था। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी तो जुड़ी रहिए हमारे साथ। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए पढ़ती रहिए हरजिंदगी।

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