पढ़े लिखे लोग भी नहीं जानते इमरती और जलेबी में अंतर

सर्दियों के मौसम से लेकर होली तक हर कोई इमरती और जलेबी खाना खूब पसंद करते हैं। दही और रबड़ी के साथ गरमा-गरम जलेबी मिल जाए तो मजा ही आ जाता है। अक्सर लोग इसे तीज-त्योहार जैसे खास अवसर पर इन मिठाइयों को खाना पसंद करते हैं। उत्तर और मध्य भारत की शान इमरती और जलेबी इन दोनों ही मिठाई में कई अंतर हैं। बहुत से लोगों को आज भी इन दोनों के बीच का अंतर नहीं पता है, साथ ही लोगों को यह लगता है कि इन दोनों में सिर्फ डिजाइन का फर्क है। बता दें कि बनाने के तरीके से लेकर स्वाद तक, इमरती और जलेबी के बीच और भी कई अंतर है, जो इन दोनों ही मिठाई को एक दूसरे से अलग बनाती है। यदि आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, जिन्हें इमरती और जलेबी एक लगती है, तो चलिए जानते हैं इन दोनों के बीच का अंतर।
जलेबी और इमरती के बीच ये है अंतर
सामग्री में है अंतर

बता दें कि जलेबी और इमरती के मेन इंग्रेडिएंट्स में अंतर है। जलेबी मैदे के आटे से बनाई जाती है, वहीं इमरती उड़द दाल और मूंग दाल से बनाई जाती है। मैदे से बनी जलेबी कुरकुरी और मीठी होती है, वहीं मूंग दाल और उड़द दाल से बनी जलेबी में नरम और उड़द के स्वाद से भरपूर होती है।
जलेबी और इमरती की डिजाइन
बता दें की जलेबी जहां गोल-गोल बनाई जाती है, वहीं इमरती फूल की तरह अलग डिजाइन में बनाई जाती है। शायद इमरती और जलेबी (इमरती रेसिपी ) दोनों एक जैसे न दिखे और इन दोनों में आसानी से भेद पता किया जा सके इसलिए हलवाई ने जलेबी और इमरती की डिजाइन को अलग बनाई होगी।
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बैटर बनाने का तरीका है अलग

इमरती और जलेबी के बैटर बनाने का तरीका भी एक दूसरे से बहुत अलग है। बता दें कि इमरती के लिए उड़द दालको पीसकर कुछ देर के लिए फूलने के लिए छोड़ दिया जाता है, फिर इमरती बनाकर चाशनी में पिरोया जाता है। वहीं जलेबी में मैदा, दही और बेकिंग सोडा डालकर रात भर या कुछ घंटे खमीर आने के लिए छोड़ दिया जाता है। जलेबी के मिश्रण में जितना अच्छा खमीर होगा उतना क्रिस्पी जलेबी बनेगी। वहीं इमरती के बैटर को खमीर की जरूरत नहीं पड़ती है।
कहां हुई थी इमरती और जलेबी की उत्पत्ति?
जलेबी एक भारतीय मिठाई नहीं है इसकी उत्पत्ति मध्य पूर्व देश विशेषकर ईरान को माना गया है। वहीं जलेबी की शुरुवात भारत को मानी गई है। इतिहासकारों के अनुसार इमरती पहली बार मुगल रसोई में बनी थी।
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