Fri Sep 11, 2026 | Updated 10:34 PM IST

क्या आप भी खाना खाने का गलत तरीका अपना रही हैं? जानिए ये प्राचीन नियम

आयुर्वेद के अनुसार, सही तरीके से भोजन करना डाइजेशन और हेल्‍थ के लिए जरूरी होता है। इस आर्टिेकल में हम दूध, फल, दाल और मसालों के सेवन के प्राचीन नियमों को बता रहे हैं, जो बेहतर पाचन में मदद करते हैं।
Updated:- 2026-06-16, 13:54 IST
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आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हम में से ज्‍यादातर लोग खाने को सिर्फ पेट भरने का साधन मानते हैं, जबकि आयुर्वेद में खाना खाने का तरीका उतना ही महत्‍वपूर्ण है जितना की खुद भोजन। अगर आप सही तरीके से खाना नहीं खाती हैं तो कई बार डाइजेशन कमजोर होता है और शरीर को पूरा पोषण भी नहीं मिल पाता है।

क्या आप जानती हैं कि करीब 90 प्रतिशत लोग रोजाना खाना गलत तरीके से खाते हैं? शायद आप भी अनजाने में वही गलतियां कर रही हों। आयुर्वेद में भोजन को लेकर कुछ ऐसे आसान, लेकिन बेहद असरदार नियम बताए गए हैं, जो डाइजेशन को सही बनाने और शरीर को संतुतिल रखने में मदद कर सकते हैं। आइए कुछ प्राचीन आयुर्वेदिक नियम के बारे में मुंबई की सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट और Eatfit 24/7 की फाउंडर श्वेता शाह से जानते हैं, जिन्हें आज भी अपनाया जाए तो सेहत में बड़ा फर्क महसूस किया जा सकता है।

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खाने से जुड़े कुछ नियम

  • कुछ महिलाएं दूध को बिना उबाले ही इस्‍तेमाल करती हैं, लेकिन कच्‍चा दूध पचाने में भारी होता है और डाइजेस्टिव सिस्‍टम पर एक्‍स्‍ट्रा प्रेशर डाल सकता है। इसलिए, आयुर्वेद के अनुसार दूध हमेशा उबालकर ही पीना चाहिए।
  • फलों को हमेशा अकेले खाना चाहिए, यानी इसे खाने के साथ नहीं लेना चाहिए। इससे डाइजेशन सही रहता है और गैस या एसिडिटी की समस्‍या कम होती है।
  • जब भी हमें दाल बनानी होती है, तब हम तुरंत कुकर में डालकर सीटी लगा देते हैं, लेकिन दाल को पकाने से पहले भिगोना फायदेमंद माना जाता है। इससे डाइजेशन आसान होता है और गैस बनने की संभावना कम होती है।
  • आयुर्वेद में कहा गया है कि मसालों को साबुत रूप में हल्का भूनकर और स्टोर करना बेहतर होता है, क्योंकि इससे मसालों की प्राकृतिक शक्ति बनी रहती है।
  • सूप और भोजन को खाने के भी कुछ नियम हम लोगों को जरूर मानने चाहिए। भोजन हमेशा हल्का गर्म और ताजा होना चाहिए। बहुत ठंडा या बासी भोजन पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है।
  • ताजा बना हुआ भोजन आयुर्वेद में सर्वोत्तम माना गया है। लंबे समय तक रखा हुआ या बार-बार गर्म किया गया खाना अपनी पौष्टिकता और गुणवत्ता खो सकता है।

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  • आयुर्वेद के अनुसार भोजन करते समय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गुनगुना पानी पीना सही माना जाता है। भोजन से ठीक पहले या तुरंत बाद ज्‍यादा पानी पीने से डाइजेशन पर बुरा असर होता है।
  • कई लोग सिर्फ समय देखकर खाना खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि भोजन तभी करना चाहिए जब वास्तविक भूख महसूस हो। बिना भूख के खाना डाइजेशन पर एक्‍स्‍ट्रा बोझ पड़ता है।
  • मोबाइल देखते हुए, टीवी देखते हुए या तनाव में भोजन करने से भी डाइजेशन पर बुरा असर होता है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन करते समय मन शांत और ध्यान भोजन पर फोकस होना चाहिए।
  • बार-बार कुछ न कुछ खाते रहने की आदत डाइजेशन को कमजोर कर सकती है। आयुर्वेद भोजन के बीच उचित अंतर रखने की सलाह देता है ताकि पिछला भोजन अच्छी तरह पच सके।
  • आयुर्वेद के अनुसार, डिनर हमेशा लंच की तुलना में हल्का होना चाहिए। हैवी और ऑयली खाने से रात में पचने में ज्‍यादा समय ले सकता है।
  • जल्दी-जल्दी खाने के बजाय हर निवाले को अच्छी तरह चबाना चाहिए। इससे खाना आसानी से पचता है और शरीर पोषक तत्वों को अच्‍छी तरह से अवशोषित कर पाता है।

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आपकी थाली सिर्फ खाना नहीं है, बल्कि हेल्‍थ और लाइफस्‍टाइल का जरूरी हिस्सा है। सही तरीके से खाया गया भोजन तन, मन और एनर्जी तीनों को संतुलित रखने में मदद कर सकता है।

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