भारत में कहां स्थित है सबसे पुराना विश्वकर्मा मंदिर? दर्शन का बना रही हैं प्लान तो जान लें पूरी जानकारी

भारत को अगर मंदिरों का देश कहा जाए, तो यह बोलना गलत नहीं होगा। हर गली, हर शहर और हर राज्य में आपको भगवान के मंदिर देखने को मिल जाएंगे। ऐसे में विश्वकर्मा दिवस पर विश्वकर्मा मंदिर की चर्चा होना कोई बड़ी बात नहीं है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि देवताओं के लिए खूबसूरत महलों का निर्माण भी विश्वकर्मा भगवान ने ही किया था। सृष्टि की रचना से लेकर कई अद्भुत महलों तक का निर्माण विश्वकर्मा भगवान से जुड़ा है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको भारत में सबसे पुराने विश्वकर्मा मंदिर के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
कहां है सबसे पुराना विश्वकर्मा मंदिर?
गुवाहाटी में नीलाचल हिल्स की पहाड़ियों के पास यह मंदिर स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण साल 1965 में किया गया था। कहा जाता है कि मंदिर को कामाख्या मंदिर के पुजारी भाबकांत शर्मा ने महावीर प्रसाद धीरसरिया के साथ मिलकर बनवाया था। यह मंदिर एक छोटे-पहाड़ी की तलहटी पर स्थित है, इसलिए इसकी यहां की खूबसूरती हर किसी को आकर्षित करती है। वह जगह काफी शांत है, आसपास की प्राकृतिक सुंदरता मिलती है। यह भारत के फेमस मंदिरों में से एक है।

कैसे पहुंचे?
यह मंदिर कामाख्या हिल्स और नर्सरी इलाके के बीच स्थित है। आप ट्रेन, फ्लाइट और बस से यहां पहुंच सकती हैं। हालांकि ध्यान रखें कि दूसरे शहरों से आने वाले लोगों को रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर उतरने के बाद ऑटो या कैब बुक करनी होगी।
- फ्लाइट से कैसे जाएं- मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा लोकप्रिया गोपीनाथ बोड़ोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यहां मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 20 किमी का सफर तय करना होगा। इसलिए आगे के सफर के लिए आपको कैब बुक करना होगा।
- ट्रेन से- अगर आप दूसरे शहरों से ट्रेन से आ रही हैं, तो आपको नजदीकी रेलवे स्टेशन कामाख्या रेलवे स्टेशन के लिए टिकट बुक करनी होगी। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से भी मंदिर पहुंचना आसान है। यहां पहुंचने के बाद मंदिर के लिए आपको ऑटो या कैब बुक करना होगा।
- बस से या कैब से- गुवाहाटी के आस-पास के शहरों से शहर से ऑटो, टैक्सी या बस लेकर कामाख्या गेट इलाके में आ सकती हैं आप। इसके लिए आप स्थानीय लोगों से भी जानकारी ले सकती हैं। यहां टैक्सी मिलना मुश्किल नहीं है।
मंदिर से जुड़ी जरूरी जानकारी
ध्यान रखें कि मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। इसलिए ऑटो या कैब से सफर करने के बाद आगे के सफर के लिए आपको छोड़ा चलना पड़ सकता है। चढ़ाई पर चढ़ने के लिए आपको ज्यादा सामान नहीं लेकर जाना चाहिए और आरामदायक जूते पहनना जरूरी है।

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