दिल्ली भारत के सबसे प्रचीन शहरों में से एक है। लोग दूर-दूर से इस शहर में घूमने आते हैं। दिल्ली में हिंदू और मुस्लिम दोनों की मिश्रित संस्कृति देखने को मिलेंगी। इतिहास के पन्नों में दिल्ली का अहम स्थान है। मक़बरों के अलावा यहां कई सालों पुराने मंदिर भी हैं, जहां लोग आज भी पूजा-अर्चना करते हैं। सालों पुराने मंदिर की बात करें तो दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित श्री गौरी शंकर मंदिर काफ़ी मशहूर है। साल 1909 से इस मंदिर की देखभाल करने वाली प्रबंध समिति के अनुसार यह करीबन 800 साल पुराना है।

आपको बता दें कि इस मंदिर का निर्णाण मराठा सैनिक आपा गंगाधर ने साल 1761 में करवाया था। उनके नाम का ज़िक्र मंदिर की छत पर मौजूद पिरामिड में देखने को मिलता है। हालांकि कई साल बाद मंदिर का पुनर्निर्माण सेठ जयपुरा ने साल 1959 में किया था और उनका भी नाम मंदिर की खिड़कियों में अंकित है। लोग यहां भगवान शिव और पार्वती के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं। मंदिर भारत के शैव धर्म के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। 

श्री गौरी शंकर मंदिर का इतिहास

temple in delhi

श्री गौरी शंकर मंदिर का लिंग चांदी से बने सांपों से घिरा हुआ है। इसे ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण कराने वाले मराठा सैनिक आपा गंगाधर शिव के बहुत बड़े भक्त थे। इस मंदिर को लेकर ऐसी कहानी है कि जब आपा गंगाधर एक युद्ध में बुरी तरह घायल हो गए थे तो उन्होंने यहां भगवान शिव के सामने प्रार्थना की थी और कहा था कि वह इस चोट से ठीक हो जाने के बाद यहां मंदिर का निर्माण करवाएं। ऐसे में जब वह स्वस्थ हो गए तो उन्होंने मंदिर का निर्माण दिल्ली के चांदनी चौक में करवाया था। मंदिर के आंतरिक भाग में भगवान शिव, देवी पार्वती और उनके पुत्र गणेश और कार्तिकेय की मूर्तियां हैं।

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फूलों से सजाया जाता है ये मंदिर

shiv temple in delhi

श्री गौरी शंकर मंदिर में वैसे तो लोगों का आना जाना लगातार बना रहता है, लेकिन दिवाली और  महाशिवरात्री के अवसर पर इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है, अलग-अलग तरह की लाइटें लगाई जाती हैं। मुख्य द्वार से लेकर मंदिर के अंदर तक फूलों से सजावट की जाती है। वहीं दिवाली और शिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में तगड़ी भीड़ देखने को मिलती है। हालांकि आम दिनों में भी काफ़ी भीड़ होती है, लोग शिव और गौरी की पूजा-अर्चना के लिए सुबह 5 बजे से ही लाइन लगाना शुरू कर देते हैं। सोमवार के दिन यहां भक्त सुबह 5 बजे से ही शिवलिंग की पूजा करने के लिए लाइन लगा लेते हैं।

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मंदिर पहुंचना है बेहद आसान

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गौरी शंकर मंदिर पहुंचने के लिए आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। जब भी आप चांदनी चौक आएं तो रिक्शा या पैदल मैप की मदद से मंदिर पहुंच सकती हैं। चांदनी चौक वैसे तो खाने-पीने की चीज़ों और मार्केटिंग के लिए मशहूर है, जहां आपको काफ़ी भीड़ देखने को मिलेगी। बता दें कि चांदनी चौक को साल 1648 में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा द्वारा स्थापित किया गया था। वर्तमान में यह एशिया का सबसे बड़ा थोक बाज़ार का केंद्र है। यहां आसपास कई ऐसी जगहें हैं जहां आप घूम सकती हैं। लाल क़िला, जिसे 17वीं सदी में मुग़ल शासक शाहजहाँ ने बनवाया था।

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