गोवा से मुंबई का खूबसूरत सफर: क्यों हर ट्रैवलर की बकेट लिस्ट में जरूर रहती है कोंकण रेल यात्रा?

Konkan Railway: अगर आप भी घूमने के शौकीन हैं तो एक बार कोंकण रेलवे के मनोरम रूट पर जरूर जाएं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि गोवा से मुंबई के बीच पड़ने वाले इस बेहद खास रूट के शानदार नजारे बताते हैं। यही वजह है हर ट्रैवलर की बकेट लिस्ट में कोंकण रेल यात्रा जरूर रहती है तो देर किस बात की। आइए ले चलते हैं आपको वेस्टर्न घाट के किनारों पर बने भारतीय रेलवे के इस रूट की ओर। जहां हर चीज अलग है, नेचर लवर्स और नई जगह एक्सप्लोर करने वालों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं।
Konkan Railway: कैसे पड़ा कोंकण नाम?
इस बेहद खूबसूरत रूट का नाम आखिर कोंकण कैसे पड़ा? कैसे अरब सागर और वेस्टर्न घाट के बीच आने वाले इस हिस्से को नए तरीके से डेवलप किया गया? कोंकण रेलवे एकमात्र ऐसा रेलवे रूट है, जो आजाद भारत में बिछाया गया। कई चुनौतियों के बावजूद भारतीय इंजीनियरों ने अपने कौशल से इसे संभव कर दिखाया। आज यह केवल ट्रांसपोर्ट का एक रूट नहीं, बल्कि एक अच्छा टूरिस्ट अट्रैक्शन बन चुका है।
इसी रूट पर भारत का पश्चिमी तट अरब सागर से लगता है, जबकि इसके समानांतर पहाड़ों की एक शृंखला गुजरात से केरल तक कनेक्ट होती है। अरब सागर और वेस्टर्न घाट के ऊंचे पहाड़ों के बीचोंबीच एक मैदानी भाग भी है, जो बहुत संकरा है, लेकिन काफी लंबा है।मालूम हो कि महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में यही संकरी मैदानी पट्टी ही 'कोंकण' कहलाती है।
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Konkan Railway: सफर में जरूर करें इन जगहों का दीदार
कोंकण रेलवे के सफर के दौरान आपके रूट पर मैदानी भाग के साथ ही समुद्र तट, पहाड़ों से निकलती नदियां और छोटी-छोटी पहाड़ियां भी दिखेंगी। इस इलाके में काफी बारिश होने की वजह से ही यहां सदाबहार वनों की भरमार है। इनकी वजह से यहां हरियाली और कमाल की लगती है। ट्रेन जब किसी मोड़ पर घूमती है, तो वह नजारा देखने लायक होता है।
वैसे तो आधिकारिक रूप से मुंबई से 120 किलोमीटर दूर रोहा स्टेशन से कोंकण रेलवे की शुरुआत होती है, लेकिन एक आम यात्री के लिए पनवेल से ही कोंकण रेलवे आरंभ हो जाती है। ट्रेन जब पनवेल से चलनी शुरू करती है, तो कभी खत्म न होने वाले खूबसूरत रेलवे मार्ग पर मुसाफिरों की नजरें खिड़की से बाहर ही ताकती रहती हैं। पनवेल से मंगलौर के बीच की दूरी करीब 1,100 किलोमीटर है। इसे तय करने में लगते हैं 15 से 18 घंटे का समय लगता है। इस दौरान कभी घने जंगल तो कभी वॉटरफॉल अलग ही अहसास दिलाते हैं। इसी बीच आता है उक्शी रेलवे स्टेशन जो आधा सुरंग के अंदर है और बाकी आधा वॉटरफॉल के नीचे।
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Konkan Railway: कहां से करें अपने सफर की शुरुआत करें?
अगर आप कोंकण रूट पर जाने का प्लान कर रहे हैं तो आपको कम से कम 2 दिन ऐसे लेकर चलना होगा, जिसमें आप पूरे दिन ट्रेन में बिता सकें। आप सुबह मुंबई से चलने वाली किसी ट्रेन में बैठें और शाम तक मडगांव पहुंच जाइए। इस रेलवे रूट पर आपको लंबी-लंबी सुरंगें देखने को मिलेंगी। यहां जनशताब्दी, तेजस और मांडवी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें बेस्ट मानी जातीं हैं।
सभी ट्रेन मुंबई से सुबह चलती हैं और शाम तक मडगांव पहुंचती हैं। इनमें जनशताब्दी और तेजस बड़ी-बड़ी खिड़कियों वाले विस्टाडोम कोच से लैस हैं, जिनसे कोंकण की खूबसूरती को निहारना रॉयल फील देता है। दूसरी तरफ मडगांव से मंगलौर का रूट केवल 6 घंटे का है। इस रूट का आनंद लेने के लिए आप कोई भी लोकल ट्रेन, दुरंतो या राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन ले सकते हैं।
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ट्रिप कब करें प्लान?
वैसे तो कोंकण रेलमार्ग पर कभी यात्रा की जा सकती है, लेकिन मानसून सीजन में यहां की बात ही अलग होती है। इस दौरान जबरदस्त हरियाली के बीच वॉटरफॉल भी उफान पर रहते हैं। इस रूट पर आपको महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के कई पर्यटन, धार्मिक, सांस्कृतिक स्थानों को जोड़ती है, जैसे चिपलूण, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, मडगांव, कारवाड़, गोकर्ण, मुरुडेश्वर, उडुपि आदि।
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- कोंकण रेलवे रूट कहां से कहां तक फैला हुआ है, इसका हेडक्वार्टर कहां है?
- कोंकण रेलवे महाराष्ट्र के रोहा से लेकर कर्नाटक के थोकुर तक फैला हुआ है। ये सबसे खूबसूरत रूट है। इसकी कुल लंबाई लगभग 755 से 760 किलोमीटर है। कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड का हेडर्क्वाटर सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।
- इस रूट पर सबसे लंबी सुरंग और सबसे ऊंचा पुल कौन सा है? जिसे देखने के लिए लोग लंबा इंतजार करते हैं।
- इस रूट पर सबसे लंबी सुरंग कार्बुडे सुरंग है, जो महाराष्ट्र के रत्नागिरी के पास उक्षी और भोके स्टेशन के बीच स्थित है और इसकी लंबाई 6.5 किलोमीटर है।
- कोंकण रेलवे पर हेल्पलाइन नंबर क्या है? इसकी ऑफिशियल वेबसाइट की जानकारी भी दें।
- कोंकण रेलवे का हेल्पलाइन नंबर 0832-2706480 है। 24x7 कोंकण रेलवे हेल्पडेस्क लोगों के लिए उपलब्ध रहती है।
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