कभी-कभी हम किसी ऐसी जगह पहुंच जाते हैं जो अलौकिक अनुभव देती है। भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां की खूबसूरती बहुत अच्छी है। जिन्हें बहुत ही सुनियोजित ढंग से बनाया गया है पर कुछ ऐसी जगह भी हैं जिन्हें वीराना छोड़ दिया गया या फिर पूरा नहीं बनाया गया फिर भी वो बहुत खूबसूरत हैं। उनमें से ही एक है भोपाल के पास मौजूद भोजपुर का मंदिर जिसे भोजेश्वर महादेव भी कहा जाता है। 

भोजपुर का मंदिर अधूरा है, इसे सदियों से पूरा नहीं किया गया। ये मंदिर कितना पुराना है इसके बारे में तो शायद किसी को नहीं पता, लेकिन कई इतिहासकार इसे राजा भोज के समय का ही मानते हैं और ये फैक्ट इस मंदिर को 11वीं सदी का बना देता है। यानि ये मंदिर 1000 साल पुराना है। 

वो मंदिर जो कभी पूरा नहीं किया जा सका...

इस मंदिर को कभी पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या फिर पैसे की कमी के चलते इस मंदिर को पूरा नहीं किया जा सका है। ये शिव मंदिर बहुत विशाल होने वाला था क्योंकि यहां पर मंदिर बनाने का सामान और कुछ नक्शे भी मिले थे जो ये साबित करते थे कि इस मंदिर को बहुत ज्यादा विशाल बनाया जाने वाला था। दरअसल, उस समय कुछ वैभवशाली राजा ही इतना बड़ा निर्माण करवा सकते थे। 

bhojpur temple bhopal

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इस मंदिर के आस-पास तीन डैम भी बनाए गए थे। साथ ही एक शिव-पार्वति मंदिर और एक जैन मंदिर का भी निर्माण किया गया था। ये मंदिर अपने आप में अलौकिक है। जब इस मंदिर के बारे में चर्चा हुई तब पाया गया कि यहां कि छत नहीं है। मंदिर की छत बाद में बनवाई गई है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर की छत बाद में गिरी होगी जिसकी वजह से इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया। 2006-2007 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने भी यही निशकर्ष निकाला था। लेकिन इतिहासकार एम. ए. ढाकी का कहना है कि ये मंदिर 'स्वागारोहण प्रसाद' मंदिर है। इस तरह के मंदिर में गुंबद नहीं होता जो आत्माओं के स्वर्ग गमन की ओर इशारा करते हैं। 

क्या कहती है लोककथा? 

मैं खुद भोपाल से हूं और होशंगाबाद में पैदा हुई हूं। मैं शायद 100 से ज्यादा बार इस शिवलिंग के दर्शन कर चुकी हूं और लोककथा जो मैंने बचपन से सुनी है उसके मुताबिक होशंगाबाद (भोपाल के पास मौजूद शहर) के सुल्तान होशंगशाह ने राजा भोज के इलाके में आक्रमण कर दिया था जब ये मंदिर बनाया जा रहा था। उस समय युद्ध के कारण इस मंदिर को पूरा नहीं किया जा सका, लेकिन इस मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह से किया जा रहा था कि ये सदियों तक चलता रहे और यही कारण है कि ये 1000 साल से ऐसे ही खड़ा है।  

वजह चाहें इतिहासकारों की मानें या फिर लोककथा की, लेकिन भोजपुर मंदिर है बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और साथ ही साथ इस मंदिर की ख्याती पूरे भारत में है।  

bhojpur and temple

40 फिट की मूरत और बिना दरवाज़े वाला मंदिर- 

भोजपुर में खाली शिवलिंग ही 7.5 फिट का है। अगर शिवलिंग का अर्घा और इसका स्टैंड भी मिला लिया जाए तो इस पूरी मूर्ति की हाइट 40 फिट हो जाती है। इसकी चौड़ाई 17.8 फिट है और इसलिए ये भारत के सबसे ऊंचे शिवलिंग में से एक है। ये बड़े-बड़े खंबों पर टिका हुआ मंदिर है।  

आस पास में पांडवों के पदचिन्ह, खेलने के लिए पार्क, शॉपिंग के लिए थोड़ी सी दुकानें जहां कई हैंडमेड चीज़ें मिलती हैं और इस पूरे मंदिर कॉम्प्लेक्स में बैठने की कई जगह भी हैं। कई परिवार यहां पर पिकनिक के लिए आते हैं। 

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कहां मौजूद है भोजपुर का मंदिर- 

भोजेश्वर महादेव जिन्हें भोजपुर महादेव भी कहा जाता है वो भोजपुर गांव में ही हैं। दरअसल, लोगों को लगता है कि ये मंदिर का नाम है, लेकिन भोजपुर असल में गांव का नाम है जो भोपाल से 28 किलोमीटर दूर है।  

ये मंदिर बहुत ही खास है और इसे देखने वाली इसकी खूबसूरती के दीवाने हो जाते हैं। यकीनन भोजपुर का मंदिर आपको एक बार जरूर देखना चाहिए। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।