पुडुचेरी भारत के पॉपुलर हॉलिडे डेस्टिनेशन में से एक है। इस खूबसूरत शहर में न केवल समुद्र तट के किनारे सभी आकर्षक समुद्र तट हैं, बल्कि यह एक समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास भी रखता है। इस शहर पर लंबे समय तक फ्रांसीसी शासन रहा, जिसके कारण फ्रांसीसी इंस्पायर्ड जीवंत संरचनाएं यहां पर आपको देखने को मिलेंगी। हालांकि समुद्र तटों व तत्कालीन सभ्यता के अलावा भी आपको यहां पर देखने को काफी कुछ मिलेगा। खासतौर से, आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। पुडुचेरी में मंदिरों का एक बेहतरीन बैकग्राउंड है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 

अगर आप पुडुचेरी जाएं और वहां के मंदिरों में यात्रा नहीं करती हैं तो इससे आपका पुडुचेरी में घूमना अधूरा ही रह जाएगा। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको पुडुचेरी के कुछ बेहतरीन मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां पर आपको कम से कम एक बार तो जरूर जाना चाहिए-

मनाकुला विनयगर मंदिर

भगवान गणेश को समर्पित, मनाकुला विनयनगर मंदिर पुडुचेरी एक प्रसिद्ध तीर्थ और पर्यटन स्थल है। यह पुडुचेरी में सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, जिसमें 7.5 किलोग्राम स्वर्ण रथ है जिसका निर्माण भक्तों से प्राप्त दान के आधार पर संभव हो सका। इस मंदिर की पत्थर की दीवारों पर शिल्प कौशल का बेहतरीन काम देखने को मिलता है, यह ठीक उसी तरह है जैसा कि तमिलनाडु के अधिकांश मंदिरों में देखा गया है। मनाकुला विनायगर मंदिर पांडिचेरी क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय धार्मिक स्थलों में से एक है।

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वेदपुरेस्वरार मंदिर

यह मंदिर पुडुचेरी में बहुत अधिक प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन वेदपुरेस्वरार मंदिर पांडिचेरी भगवान वेदुपीरेश्वर को समर्पित है। चेय्या नदी के तट पर निर्मित, इस मंदिर में एक नंदी बैल है जो शिव लिंगम के विपरीत दिशा में है। इस क्षेत्र में चंदन के पेड़ों की बहुतायत के कारण, इसे सांता नारायणम के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान शिव स्वयंभू हैं और इसी वजह से मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर में 2 गलियारे हैं, और 5 राजगोपुरम और दीवारों पर लगे शिलालेख इसे चोल काल के होने का संकेत देते हैं।

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श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर 

भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए निर्मित, श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर विष्णु के 108 दिव्य देशम में से एक है। इसे पुडुचेरी में सबसे पवित्र और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है और इसे चोल ने 1053 में बनवाया था। इस मंदिर में किए गए अनुष्ठानों में से एक नवजात शिशुओं को लाना है और उन्हें खुद भगवान के सामने चावल खिलाना है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चा अपने पूरे जीवन के लिए उनके संरक्षण में रहेगा। 

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श्री गोकिलमबल थिरुक्मेश्वर मंदिर 

यह मंदिर पांडिचेरी के निकट विलियानुर में स्थित है, जिसे सबसे बड़ा धार्मिक महत्व वाला माना जाता है। इसमें 15-मीटर लंबा रथ है जिसे पूर्णिमा की उपस्थिति के दौरान मई में हर साल एक जुलूस पर निकाला जाता है। यह त्योहार अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, और कई पर्यटक इस भव्य कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए पांडिचेरी जाते हैं। इस मंदिर में आपको जो प्रतिमा मिलेगी, वह थिरुक्मेश्वर गोकिलम्बल की है, जिन्हें उत्सव के समय सजे हुए रथ में लाया जाता है और प्रसादम के साथ भी चढ़ाया जाता है। कहानी के अनुसार, कुष्ठ रोग से पीड़ित एक चोल राजा ने भगवान शिव के आशीर्वाद से ठीक होने के लिए इस मंदिर में प्रार्थना की थी। ऐसा माना जाता है कि यदि त्योहार के दौरान भक्त रथ को खींचने में योगदान देते हैं, तो उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं। 

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शिवानंद स्वामी मंदिर 

यह एक मंदिर होने के साथ-साथ एक महात्मा का समाधि स्थल भी है। यह मंदिर एक गुरु सीतानंद का दफन स्थल है, जिसे जीवित दफन करने के लिए कहा गया था। उनके सम्मान के लिए, लोगों ने इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव को समर्पित किया है और यह एक ऐसा स्थान है जहाँ सभी शांति प्रेमी जमा होते हैं। इस मंदिर के केंद्र में सभी भक्तों के लिए कुछ आध्यात्मिक समय बिताने के लिए एक ध्यान कक्ष का निर्माण किया गया है। यह छात्रों के लिए एक लोकप्रिय आकर्षण है क्योंकि इस मंदिर में भगवान दक्षिणामूर्ति के देवता हैं, जो अच्छे ग्रेड और परीक्षाओं में बेहतर परफार्मेंस दिलाने के लिए जाने जाते हैं। 

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