• ENG
  • Login
  • Search
  • Close
    चाहिए कुछ ख़ास?
    Search

Holi 2020: 3 मार्च से शुरू हो रही है बृज की होली, जानें कब,कहां और कैसे मनेगा त्‍योहार

अगर आप इस बार बृज की होली को इंज्‍वॉय करना चाहते हैं तो पहले जान लें कि किस दिन कौन सी खेली जाएगी होली। 
author-profile
Published -01 Mar 2020, 14:00 ISTUpdated -02 Mar 2020, 11:35 IST
Next
Article
holi  schedule mathura

'सब जग होरी, या बृज होरी' बृज की होली के लिए कहावत बहुत प्रचलित है। इसका अर्थ है कि पूरे जग में मनाई जाने वाली होली में इतना रस नहीं है जितना केवल बृज की होली खेलने में आनंद है। यह बात कई मायनों में बृज की होली पर सटीक भी बैठती है। पुरे भारत में हाली का त्‍योहार 3,5 या 7 दिन तक मनाया जाता है मगर, बृज की होली शुरू होती हैं तो खत्‍म होने का नाम ही नहीं लेती। रंगों का खुमार और राधा-कृष्‍ण की धुन में रमे हुए भक्‍त होली के जोश में अपनी सुध-बुध ही गंवा बैठते हैं। होली के आने के पहले ही पूरे बृज में होली का हुड़दंग शुरू हो जाता है। वैसे तो साल भर भगवान कृष्‍ण और राधा रानी के भक्‍तों की भीड़ बृज में रहती हैं मगर, जब होली का त्‍योहार आने वाला होता है तो यह भीड़ दो गुनी हो जाती। सभी भक्‍त अपने ईश्‍वर के साथ रंगों का उत्‍सव मनाने बरसाना, गोकुल, नंदगांव, वृंदावन, मथुरा, दाउजी और आस-पास के गांव पहुंच जाते हैं। 

इस वर्ष होली का त्‍योहार 10 मार्च  को हैं मगर, भगवान कृष्‍ण और  राधा रानी की होली 3 मार्च से ही शुरू हो जाएगी। अगर आप इस बार बृज की होली का आनंद उठाना चाहते हैं तो बैग पैक कर लीजिए। इस बार बृज में 3 मार्च से 12 मार्च तक होली का उत्‍सव मनाया जाएगा। जी हां, बृज की होली पूरे 10 दिन खेली जाती है। वसंत पंचमी के दिन भगवान श्री कृष्‍ण को गुलाल लगा कर शगुन किया जाता है। इसके बाद होली का त्‍योहरा बरसाना में शुरू हो जाता है। रंगों का खुमार श्री कृष्‍ण पर धीरे-धीरे चढ़ता है और होली के करीब आते ही यह खुमार चरम पर होता है। शुरुआत होती हैं लड्डुओं की होली से। यह होली बरसाना में राधा रानी के महल में खेली जाती है। इस बार 3 मार्च का यह होली खेली जाएगी। 

इसे जरूर पढ़ें: Holi Recipe 2020: मटर की कचौड़ी की जगह घर पर बनाएं टेस्‍टी 'मटर की गुझिया'

लड्डू होली के बाद बृज की प्रसिद्ध लट्ठमार होली खेली जाती है। यह बृज के अलग-अलग गांव और नगरों में अलग-अलग नाम से खेली जाती है। इस होली की शुरुआत होती हैं जब नंदगांव के ग्‍वाले बरसाना की गोपियों को छेड़ने आते हैं। तब गोपियां ग्‍वालों पर लाट्ठियां बरसाती हैं। बरसाना में यह होली 4 मार्च को खेली जाएगी वहीं बरसाने के ग्‍वाले भी नंदगांव जाते हैं और वहां यह होली 5 मार्च को खेली जाएगी। 5 मार्च को ही लट्ठमार होली गांव रावल में भी खेली जाती है। सब से ज्‍यादा लट्ठमार होली बरसाना की प्रचलित है। यह होली शाम के वक्‍त खेली जाती है। इंडिया की इन ऑफबीट जगहों पर लें रंगभरी होली का मजा

इसे जरूर पढ़ें: Famous Temple: यहां अपने भक्त के लिए खुद गवाही देने चले आए थे बांके बिहारी

 
 
 
View this post on Instagram

Why is Lathmar holi celebrated? Legends say that Lord Krishna visited his beloved Radha's village on this day and playfully teased her and her friends. Taking offence at this, the women of Barsana chased him away. Keeping in sync with the story, the men from Nandgaon visit the town of Barsana every year, only to be greeted by sticks (aka lathis) of the women there. The ladies hurl sticks at the men, who try to shield themselves as much as they can. The unlucky ones are captured by the enthusiastic women who then, make the men wear female clothing and dance in public. Wanna witness this colorful festival? then join us for Vrindavan Backpacking Trip (Barsana Holi Special) before seats are full. Date: 03rd - 7th March 2020 . . PM us for more info. . #TravelTrikon #Travel #Trek #Trekking #Camp #Camping #Backpacking #Backpackers #Holi #HoliCelebration #India #IndianFestivals #Vrindavan #LathMarHoli #BeachHoli #BarsanaHoli #FestivalPhotography #Nature #Family #Tripwithkids #mathura #girlsgang #selffie #photooftheday #photography

A post shared by T Trikon (@t_trikon_) onFeb 25, 2020 at 7:58am PST

 

बृज की होली शुरू होते ही पूर शहर अरबी गुलाल की खुशबू और सड़कें रंगों से भर जाती हैं। बरसाना में ही नहीं मथुरा और वृंदावन में भी होली का उत्‍सव जोरशोर से मनाया जाता है और कई सांस्‍कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इस बार 6 मार्च को मथुरा और वृंदावन में होली का उत्‍सव मनाया जाएगा। 7 मार्च को गोकुल में छड़ीमार होली खेली जाएगी। यह होली लट्ठमार होली की तरह ही होती है। वहीं 9 मार्च को मथुरा के श्री द्वारिकाधीश मंदिर में होली का डोला निकाला जाएगा। यह बहुत ही भव्‍य कार्यक्रम होता है और इसके बाद बृज में बेशुमार रंग और होली का उत्‍सव मनाया जाता है। 10 मार्च को मथुरा के श्री द्वारिकाधीश मंदिर टेसू फूल, अबीर गुलाल होली खेली जाएगी। यह होली बहुत ही प्रसिद्ध है और इस होली को देखने देश के कोने-कोने से कृष्‍ण भक्‍त आते हैं। होली पर निभाई जाती हैं कुछ अजीब परंपराएं, कहीं मिलते हैं प्रेमी जोड़े तो कहीं चलती हैं लाठियां

 
 
 
View this post on Instagram

2/3 Men armed with buckets and godforsaken fertilizer pumps filled with coloured water lined the courtyard of the temple, spraying ONLY women and ONLY from behind, revelling in their anonymity and taking shelter of the mob. On the other hand, groups of men played consensually only among themselves, and despite women (both cis and trans) explicitly refusing, even physically stopping the men at some points, there was mass disregard for consent - a highly dehumanizing experience, the first time I truly felt outnumbered and helpless. The only reason my male friends got some colour on them is because they took a bullet for us multiple times, and were untouched when they went into the courtyard by themselves. I can tolerate crowds, I can even stretch myself to accept non-consensual colour smearing in a Holi setting open to the public, but when this is subjected exclusively to women, it no longer has a valid justification - even centuries of culture does not make it okay. #vrindavanholi #holi #vscocam #vsco #india #incredibleindia #lonelyplanetindia #lonelyplanet #everydayindia #everydayeverywhere #streetsofindia #soi #_soi #travel #explore #travelgram #instatravel #india_gram #indiapictures #culturetrip #vrindavan #natgeo #natgeotravel

A post shared by Kshipra (@whatkshiprasees) onMar 19, 2019 at 7:50am PDT

 

मथुरा, वृंदावन और बरसाने के अलावा बल्‍देव गांव में दाउजी के मंदिर में भी होली का अलग नजारा देखने को मिलता है। इसके साथ ही गांव मुखराई में चरकुला नृत्‍य और सांस्‍कृतिक कार्यक्रम  होते हैं। गांव जाब में जाब का हुरंगा भी देखने लायक होता है। मगर, यह सब होली के बाद होता है। इस बार यह 11 मार्च को है। गांव बठैन, गिडोह के हुरंगा के साथ होली का उत्‍सव समाप्‍त होता है। यनी 12 मार्च को बृज की होली इस बार खत्‍म हो जाएगी। उत्तर प्रदेश की लठमार होली का ये दिलचस्प अंदाज देखिए

कैसे पहुंचे 

बृज की होली का आनंद लेना है तो पहले आपको मथुरा आना होगा। मथुरा आप ट्रेन से आ सकते हैं। यदि आप दिल्‍ली, आगरा, मेरठ या आसपास रहते हैं तो मथुरा की कई बस सेवाएं हैं। अगर आप हवाई यात्रा करके आ रहे हैं तो आपके लिए दिल्‍ली का इंदरा गांधी अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा सबसे करीब रहेगा। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कैसे आप होली के बाद रख सकती हैं अपनी स्किन का ख्याल

Recommended Video

ध्‍यान रखें: 

वृंदावन, मथुरा और बरसाने में मंदिरों के पट 11:30 पर बंद कर दिए जाते हैं। तो आप इससे पहले ही वहां पहुंच जाएं। या फिर आप शाम 4 बजे पट खुलने के बाद दर्शन कर सकते हैं। 

अब देर किस बात की टिकेट्स बुक कराइए, बैग पैक करिए और हो जाइए बृज की होली में शामिल होने को तैयार। 

बेहतर अनुभव करने के लिए HerZindagi मोबाइल ऐप डाउनलोड करें

Her Zindagi
Disclaimer

आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।