वैवर्त और गरुड़ पुराण में यह बताया गया है कि जब व्यक्ति मृत्यु के समीप होता है तो उसे उसका आभास होने लग जाता है और जब व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है और उसकी आत्मा शरीर त्याग रही होती है तब उस व्यक्ति को जो कुछ भी अनुभव हो रहा होता है, वह उसके चेहरे पर दिखने लग जाता है। ठीक ऐसे ही कई बार आप में से किसी न किसी न कभी तो देखा ही होगा कि किसी मृतक के चेहरे पर प्राण त्यागते समय मुस्कुराहट। यूं तो मरते समय चेहरे पर स्माइल होना शुभ माना जाता है लेकिन यह अशुभ संकेत भी हो सकता है। आइये जानते हैं ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से कि कब मरते हुए व्यक्ति के चेहरे पर स्माइल दिखाई देना शुभ होता है और कब यह एक नकारात्मक संकेत बन जाता है।
मरते हुए व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान होने से क्या होता है?
शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि जब कोई व्यक्ति मृत्यु की तरफ जाता है तो उसे कई ऐसी चीजें दिखती हैं जो जीतेजी वहां उपस्थित अन्य किसी भी व्यक्ति को नजर नहीं आ सकती हैं। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति को अगर अपने अच्छे कर्म याद आ रहे हों या फिर उसे मरते समय भगवान की स्मृति हो रही हो तो व्यक्ति के चेरे पर मुस्कान आ जाती है।
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इसके अलावा, अगर यमराज स्वयं किसी व्यक्ति को लेने आएं और मृतक को उनके सौम्य रूप के दर्शन हों तब भी व्यक्ति मरते समय मुस्कुराने लगता है। असल में इसके पीछे का कारण यह है कि गरुड़ पुराण में बताये गए नियमों के अनुसार, किसी सिद्ध पुरुष, साधु-संत या कोई ऐसा व्यक्ति जिसके पुण्य बहुत अधिक हों, उनकी आत्मा को मृत्यु के समय खुद यमराज द्वारा लाये जाने का विधान है।
ऐसे मैं अगर किसी सामान्य व्यक्ति की आत्मा को यमराज खुद लेने आएं तो यह उस मृतक आत्मा का सौभाग्य होता है और उसे अच्छी गति प्राप्त होती है। वहीं, मरते समय चेहरे पर मुस्कान का आना नकारात्मक भी हो सकता है।
जब किसी व्यक्ति को शरीर त्यागते समय अत्यंत कष्ट का सामना करना पड़ता है तब भी उस व्यकित के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। इसके पीछे भी कारण है।
असल में कष्ट में त्यागा हुआ शरीर उन पापों का प्रतीक होता है जो व्यक्ति ने किये होते हैं। ऐसे में आत्मा जब शरीर छोड़ देती है तब कुछ समय के लिए वह उस कह्स्त से उक्त हो जाती है और यही कारण है कि मृत शरीर के चेहरे पर मुस्कान दिखने लगती है। गरुड़ पुराण में वर्णित है कि कष्ट से उत्पन्न हुई मुस्कान अंतिम संस्कार होने तक गायब हो जाती है जबकि सुखद मुस्कान अंतिम संस्कार तक भी बनी रहती है।
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