Durga Ashtami या दुर्गा नवमी, किस दिन हवन और कन्या पूजन करने से मिलता है माता रानी का आशीर्वाद और होती है सौभाग्य की प्राप्ति ? पंडित जी से जान लें यह जरूरी बात

नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व बहुत अधिक होता है। कहते हैं कि नवरात्रि के व्रत रख रहे हो घर पर कलश स्थापना की हो और कन्या पूजन या हवन न किया जाए तो माता रानी के व्रत को अपूर्ण ही माना जाता है। ऐसे में अलग-अलग लोगों में इस बात को लेकर भ्रम है कि कन्या पूजन और हवन का सही दिन क्या होता है। कई लोग सप्तमी को तो कई लोग अष्टमी और नवमी को माता का हवन कर कन्या पूजन कर लेते हैं। ज्यादातर लोग अष्टमी या नवमी वाले दिन ही हवन और कन्या पूजन करने में विश्वास रखते हैं। इस बारे में हमने दिल्ली की प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजन डॉक्टर शेफाली गर्ग से बात की। वह कहती हैं, " बहुत लोगों के मन यह प्रश्न उठता है। ऐसे में जो लोग सप्तमी को कन्या पूजन और माता का हवन करते हैं, उनके लिए तो यही कहा जा सकता है कि उन्हें इसका कोई फल नहीं मिलता है।" शेफाली जी आगे भी बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी देती हैं, इसलिए लेख को अंत तक पढ़ें।
दुर्गा अष्टमी या नवमी - कन्या पूजन के लिए सबसे अच्छा दिन
देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण दोनों में ही इस बात का जिक्र मिलता है कि नौ दिन के नवरात्रि पर्व के 8वें दिन दुर्गा अष्टमी पर आप माता जी का हवन और कन्या पूजन करना चाहिए। शेफाली जी कहती हैं, "कन्या पूजन के बिना माता रानी की पूजा अधूरी है और यदि आप अष्टमी वाले दिन देवी जी का हवन और कन्याओं का पूजन करती हैं, तो आपको इसका बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है।" इस बार दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को है। आप शुभ मुहूर्त पर हवन करने के बाद 9 कन्याओं घर बुलाकर भोजन कराएं और उनके पैर धुला कर उन्हें उपहार दें। इतना करने से आपके नवरात्रि के व्रत पूर्ण होते हैं और आपको सौभाग्य की प्राप्ति होती हैं।
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दुर्गा अष्टमी में कन्या पूजन और हवन करने का शुभ मुहूर्त?
29 सितंबर 2025 को शाम 4:31 बजे से अष्टमी शुरू हो जाएगी और 30 सितंबर 2025 को शाम 6:15 तक रहेगी। हवन के लिए जहां सुबहे 10:00 बजे से 12:00 बजे तक का समय ठीक रहेगा, वहीं कन्या पूजन आप दोपहर 2:00 बजे तक करा सकती हैं।
क्या नवमी पर करना चाहिए कन्या पूजन?
इस विषय पर शेफाली जी कहती हैं, " पुराणों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अष्टमी तिथि को ही बताया गया है। इस दिन जो भी पूजा की जाती है, उसे सबसे ज्यादा फलदायक माना जाता है। वहीं नवमी पर कन्या पूजन को लोगों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से बस करना शुरू कर दिया है। हालांकि यह भी रिक्ता तिथि है। इस दिन किया गया कन्या पूजन कोई भी फल नहीं देता है। "
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अत: यह कहा जा सकता है, कि अष्टमी तिथि हवन और कन्या पूजन के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है और इस दिन आप जो भी पूजा करते हैं, उसका फल आपको अवश्य मिलता है। उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर और लाइक जरूर करें इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हर जिंदगी से।
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