Maa Kalratri Puja Vidhi And Mantra 2026: शत्रुओं पर विजय और काल का नाश करती हैं मां कालरात्रि, यहां जानें संपूर्ण पूजा विधि और मंत्र

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। ऐसे में जरूरी है कि आप भी संपूर्ण विधि और मंत्रों के साथ इस पूजन को संपन्न करें, ताकि आपके ऊपर माता कृपा हमेशा बनी रहे। 
Updated:- 2026-03-25, 05:05 IST
Puja vidhi and mantra

चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि इस बार 25 मार्च को पड़ रही है। इस दिन हर कोई मां कालरात्रि का पूजन करेगा। साथ ही इनके मंत्रों का उच्चारण करेगा, ताकि मां की कृपा उनके ऊपर बनी रहे। आप भी चाहें तो सही पूजा विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करके पूजन सही तरीके से कर सकती हैं। पंडित जन्मेश द्विवेदी ने पूजा विधि एक-एक स्टेप्स के अनुसार बताई है, जिसका ध्यान रखकर आप भी सही तरीके से मां कालरात्रि का पूजन कर सकती हैं।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

  • सप्तमी की पूजा अक्सर रात के समय में करना अधिक फलदायी माना जाता है, लेकिन आप माता का पूजन सुबह के समय भी कर सकती हैं।
  • इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना है।
  • इसके बाद गहरे रंग के कपड़ों को पहनना है।
  • फिर आपको मां कालरात्रि के सामने नीले रंग का वस्त्र रखना है।
  • मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और मां का ध्यान करें और हाथ में जल लेकर पूजा को धारण करें।
  • मां को लाल और नीले रंग के फूल अर्पित करना बहुत शुभ होता है। उन्हें कुमकुम और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद मां कालरात्रि की कथा को पढ़ें।
  • कथा को पढ़ने के बाद माता की आरती करें।
  • फिर मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि मां को गुड़ बेहद प्रिय है।
  • इसके बाद इस प्रसाद को अन्य लोगों को भी बांटे।
  • अंत में कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाएं। इससे नकारात्मकता दूर होगी।

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मां कालरात्रि के शक्तिशाली मंत्र

देवी की कृपा पाने के लिए आप भी खास मंत्रों का जाप कर सकती हैं।

  • ध्यान मंत्र करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्। कालरात्रिं करालीकां दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम्॥ इसा अर्थ है मां का चेहरा भयानक है जो अधर्मियों के मन में भय पैदा करता है। उनके बाल खुले मुक्तकेशी हैं जो पूर्ण स्वतंत्रता और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनके गले में बिजल जैसी चमकने वाली माला है, जो बताती है कि वे अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं।
  • प्रार्थना मंत्र एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥ इसका अर्थ है, मां एक वेणी धारण करती हैं और कानों में गुड़हल के फूल सजाती हैं। गधे की सवारी करती हैं। देवी का यह रूप हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि आंतरिक साहस और कर्म की आवश्यकता होती है।
  • बीज मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ इसका अर्थ है, जीवन के सभी शत्रुओं और काल की बाधाओं का नाश करता है।

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मां कालरात्रि की पूजा के लाभ

  • जिन जातकों की कुंडली में शनि का अशुभ प्रभाव है, उनके लिए मां कालरात्रि की पूजा रामबाण है।
  • कोर्ट-कचहरी या गुप्त शत्रुओं से परेशान लोगों को देवी का आशीर्वाद निर्भय बनाता है।
  • देवी का 'शुभंकरी' स्वरूप हमारे भीतर के क्रोध, ईर्ष्या और मोह जैसे 'रक्तबीजों' का अंत करता है।

इस तरह से आप भी मां कालरात्रि का पूजन और मंत्रों का उच्चारण कर सकती हैं। इससे आपके जीवन में सकारात्मकता का संचार होगा।

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