इन कॉमन गायनेकोलॉजिकल समस्याओं के बारे में ना हों शर्मिंदा, जानें डॉक्टर की सलाह

आजकल ये तय करना मुश्किल हो गया है कि क्या चीज़ नॉर्मल है और क्या नहीं। कई बार हम हेल्थ की छोटी-छोटी चीज़ों को नॉर्मल समझ लेते हैं, लेकिन असल में ये नॉर्मल होती नहीं हैं। जहां तक महिलाओं का सवाल है तो अधिकतर ऐसा देखा गया है कि वो अपने शरीर में होने वाली समस्याओं के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं।
ऐसा कितनी बार हुआ है कि हमने घर पर ही महिलाओं को अपनी शारीरिक तकलीफों को छुपाते हुए देखा है क्योंकि वो इसके बारे में ज्यादा लोगों से बात नहीं करना चाहती थीं।
इस मामले में हमने नोएडा मदरहुड अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियन डॉक्टर तनवीर औज्ला से बात की। डॉक्टर तनवीर का कहना है कि अधिकतर महिलाएं अपनी गायनेकोलॉजिकल समस्याओं के बारे में ज्यादा बात नहीं करती हैं क्योंकि उन्हें किसी न किसी तरह से शर्मिंदगी महसूस होती है। हालांकि, महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि ये उनकी समस्या को बढ़ा सकता है।
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कुछ कॉमन समस्याओं की बात करें तो वो ये हो सकती हैं-

1. दर्दभरे पीरियड्स-
अधिकतर महिलाओं की समस्या होती है पीरियड्स में होने वाला दर्द। कई लोगों को तो 10 दिनों तक क्रैम्प्स होते रहते हैं जो सही नहीं है। दर्दभरे पीरियड्स की समस्या दो तरह की होती है।
पहली- पेल्विक डिजीज का न होना। ये अधिकतर फैमिली हिस्ट्री या किसी शारीरिक गतिविधि के कारण होती है और अधिकतर प्रेग्नेंसी के बाद ये खत्म हो जाती है।
दूसरी- ये किसी पेल्विक डिजीज से जुड़ी होती है जो आजीवन चल सकती है। ये 30 के बाद या फिर बच्चे होने के बाद ज्यादा बढ़ जाती है।

2. पीसीओएस-
आजकल अधिकतर महिलाओं की ये समस्या हो गई है। हर चौथी महिला पीसीओएस (PCOS) से परेशान है और ये खराब लाइफस्टाइल के कारण और भी ज्यादा परेशानी भरी हो गई है। ये मोटापे और ओवरीज दोनों पर असर डालती है और ये योग, एक्सरसाइज, डाइट आदि से काबू की जा सकती है। अधिकतर मामलों में इसके लिए डॉक्टर्स गर्भ निरोधक गोलियां भी देते हैं।
3. फाइब्रॉइड्स-
फाइब्रॉइड्स दरअसल यूट्रस में होते हैं और एक रिसर्च बताती है कि करीब 20% महिलाओं के यूट्रस में फाइब्रॉइड्स मौजूद होते हैं। इसमें इनफर्टिलिटी, दर्दभरी ब्लीडिंग, दर्दभरा सेक्शुअल इंटरकोर्स आदि होता है। इसके लिए यकीनन डॉक्टर की सलाह की जरूरत होती है जिससे आप अपने फाइब्रॉइड्स का सही ट्रीटमेंट करवा पाएं।

4. वेजिनाइटिस-
ये आमतौर पर बचपन में होने वाली समस्या है जिसमें एस्ट्रोजेन की कमी के कारण परेशानी होती है। इसमें दर्दभरा यूरिनेशन, खुजली, इरिटेशन आदि हो सकता है। ये युवा अवस्था में भी देखा जाता है। इसके लिए वेजाइनल क्रीम्स और दवाएं होती हैं। दर्दभरा सेक्शुअल इंटरकोर्ट और वेजाइनल और वल्वा इन्फेक्शन भी इसके कारण हो सकता है। ऐसे समय में सही परामर्श बहुत जरूरी होता है।

5. वेजाइनल बदबू-
कई महिलाएं वेजाइनल बदबू से परेशान रहती हैं। वेजाइना से थोड़ी बदबू आना कॉमन है, लेकिन अगर ये बहुत ज्यादा आ रही है और कुछ सड़ने जैसा प्रतीत हो रहा है तो गायनेकोलॉजिस्ट से बात करना बहुत जरूरी है। ये बैक्टीरियल समस्या हो सकती है और गायनेकोलॉजिस्ट से इस बारे में समय-समय पर चेकअप करवाना भी जरूरी है।
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इन समस्याओं पर अगर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाए तो आगे चलकर ये आपके लिए ज्यादा खतरनाक बन सकती हैं। इनसे बचने के लिए ये उपाय करें-
- हमेशा वेजाइनल हाइजीन का ख्याल रखें।
- फिजिकल फिटनेस बहुत जरूरी है इसे नजरअंदाज़ ना करें।
- अगर आपको डॉक्टर ने कोई दवा प्रिस्क्राइब की है तो उसका डोज पूरा करें।
- अगर आपको समस्या कई दिनों से बनी हुई है तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
आपके शरीर का ध्यान आपको खुद ही रखना होगा और शरीर अगर बीमार पड़ता है तो समस्याएं होती ही हैं। इसलिए डॉक्टर से बात करने में ना शर्माएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
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