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    Delhi Accident: हमेशा खतरनाक क्यों मानी जाती हैं दिल्ली की सड़कें?

    दिल्ली की सड़कें कितनी सुरक्षित हैं इसके बारे में जानकारी आपको होगी ही, लेकिन क्या आप इस बात की कड़वी सच्चाई जानती हैं?
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    Updated at - 2023-01-05,17:48 IST
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    How delhi is considered as unsafe

    दिल्ली शहर को आप कितना सुरक्षित मानती हैं? ये सवाल उन लोगों के लिए भी है जो दिल्ली में रहते हैं और उन लोगों के लिए भी जो यहां नहीं रहते और बस न्यूज आदि में इसकी बात सुनते रहते हैं। चलिए शुरुआत में ही अपनी सोच का दायरा बढ़ा लेते हैं और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ लेते हैं। यहां की सड़कें कितनी सुरक्षित मानी जाती हैं? चलिए सड़कों पर अपराध को भी परे कर दीजिए। हम सिर्फ बात करते हैं रोड एक्सीडेंट की.. अब बताएं क्या अब आपको दिल्ली की सड़कें सुरक्षित लगती हैं?

    31 दिसंबर की रात दिल्ली में एक ऐसा एक्सीडेंट हुआ जिसने लोगों को यहां की सड़कों की सुरक्षा के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया। सवाल वही है कि क्या दिल्ली सुरक्षित है?

    मैं दिल्ली-एनसीआर में पिछले 6 साल से रह रही हूं। यहां स्कूटी भी ड्राइव करती हूं और अपने ऑफिस रोजाना आती-जाती हूं। मैं खुद यहां सुरक्षित महसूस नहीं करती हूं। यहां मुझे सड़क पर पैदल चलने और स्कूटी चलाने दोनों में डर लगता है। दिल्ली की सड़कों को किलर रोड्स कहा जाता है और उसका कारण ये है कि यहां एक्सीडेंट बहुत ज्यादा होते हैं। अगर एक्सप्रेस वे और हाईवे को छोड़ दिया जाए तो भी दिल्ली की सड़कें सुरक्षित नहीं हैं। 

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    दिल्ली की सड़कों में रोजाना होती हैं 4 मौतें

    ये दिल्ली है मेरे यार। यहां सड़कों पर अपना दिल और दिमाग दोनों लेकर चलना पड़ता है। 2001 में आई Delhi Road Crash Fatalities Report ने इसकी सच्चाई बताई। दिल्ली में साल भर में 1199 एक्सीडेंट हुए थे जिसमें 1238 लोगों की मौत हुई थी। इसके हिसाब से एवरेज निकालें तो हर रोज़ चार लोग इसके कारण मारे जाते हैं। ये रिपोर्ट दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की है और इसमें अगर पूरे दिल्ली एनसीआर का डेटा जोड़ दिया जाए तो ये आंकड़ा 10 तक पहुंच जाता है। 

    delhi accident cases

    अब ये सोचने वाली बात है कि इतने एक्सीडेंट्स के बाद भी यहां की सड़कों को सुरक्षित का टैग क्यों दिया जाता है। 

    दिल्ली में रोड रेज के मामले

    दिल्ली भारत के उन शहरों में से एक है जहां पर रोड रेज के मामले बहुत ज्यादा होते हैं। जब भी कोई घटना होती है तो अग्रेसिव ड्राइविंग, स्पीड, अल्कोहल, स्ट्रेस आदि को ब्लेम किया जाता है।  

    मयूर विहार के पास कुछ समय पहले दो महिला पत्रकारों को इसलिए पीटा गया था क्योंकि उन्होंने रैश ड्राइविंग करने वाले ट्रक ड्राइवर के खिलाफ आवाज उठाई थी। 2015 में दिल्ली के दरिया गंज इलाके में शाहनवाज नामक ये मोटरसाइकल वाले तो पांच लोगों ने जान से मार दिया था। शाहनवाज अपने दो बेटों के साथ बाइक पर वापस आ रहे थे और उन्हें कार ने टक्कर मार दी थी। विरोध करने पर उनकी जान ले ली गई। 

    दिल्ली में ऐसे रोड रेज के मामले भी बहुत होते हैं। "जानते हो किससे बहस कर रहे हो' वाली मेंटेलिटी को लेकर लोग यहां सड़कों पर चलते हैं।  

    एक्सीडेंट होने पर अगर विरोध किया जाए तो हाथा-पाई और उठा पटक तक बात पहुंच जाती है। 

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    दिल्ली में बस और कार का हॉरर 

    ब्लू लाइन बसें याद हैं आपको? वही जिन्हें किलर ऑन व्हील्स कहा जाता था। लो फ्लोर वाली बसों के आने से पहले इन ब्लू लाइन बसों ने जितनी जानें ली हैं उसका लेखा-जोखा ठीक ठाक नहीं दिया जा सकता है। आपको शायद इसके बारे में जानकारी ना हो, लेकिन 2022 में आई एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले तीन सालों में सिर्फ दिल्ली बसों से 76 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा ऐसे एक्सीडेंट्स पर 100 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। 

    delhi bus road accident 

    ऐसे ही लग्जरी कारों से घायल होने वालों की संख्या का आंकड़ा भी बहुत ज्यादा होगा। आए दिन दिल्ली की सड़कों पर किसी ना किसी के रोड एक्सीडेंट की बात सुनने मिलती है। दिल्ली के बारे में ये कहा जाता है कि गाड़ी के नीचे आने से अच्छा है कि गाड़ी के ऊपर चढ़ जाएं।  

    सुरक्षित नहीं है दिल्ली क्योंकि... 

    • यहां सिर्फ सांप-सीढ़ी जैसा ट्रैफिक ही एक्सीडेंट और मौत का कारण नहीं बनता बल्कि रोड रेज भी इसका बहुत बड़ा कारण बन जाता है। 
    • दिल्ली में जितने ट्रैफिक रूल्स हैं उतने ही इन नियमों को तोड़ने वाले भी हैं। 
    • यहां पर जिस तरह की ड्राइविंग की जाती है वो देखने से पता चलता है कि स्पीड यहां की सड़कों का एक बहुत बड़ा इशू है। 
    • ट्रैफिक लाइट्स को जंप करने वाले लोगों की भी यहां कमी नहीं है और जहां एक ओर इतना ट्रैफिक होता है वहीं दूसरी ओर एम्बुलेंस को बिल्कुल जगह नहीं मिलती। 
    • रात के समय हैवी वेहिकल्स का खतरा दिल्ली की सड़कों पर सबसे ज्यादा होता है। ट्रक आदि से एक्सीडेंट की घटनाएं होती रहती हैं। 

     

    आपके हिसाब से दिल्ली की सड़कों का हाल कैसा है? हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। 

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