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आखिर क्यों हिंदुस्तान के आधे नहाने वाले साबुन कहलाते हैं टॉयलेट सोप?

क्या आप जानते हैं कि भारत में अधिकतर साबुन टॉयलेट सोप क्यों कहलाते हैं? इनसे जुड़ी ये बहुत जरूरी जानकारी कई लोगों को पता ही नहीं होती। 
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Published -08 Sep 2022, 14:48 ISTUpdated -08 Sep 2022, 14:53 IST
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How to buy bathing soap

इन दिनों हैंड वॉश और बॉडी वॉश का जमाना है, लेकिन एक जमाना था जब सिर्फ एक ही साबुन पूरा घर इस्तेमाल करता था और उसी से सारे काम किए जाते थे। यकीनन वो पुरानी यादें अब नॉस्टैल्जिया का ही हिस्सा रह गई हैं। बचपन में हम उसी साबुन से नहाना पसंद करते थे जिसका एड सबसे ज्यादा आता था। इसमें डिटॉल, लाइफबॉय आदि साबुन शामिल होते थे जो कीटाणु मार दें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन साबुनों को बेदिंग सोप नहीं बल्कि टॉयलेट सोप कहा जाता है। 

आपके घर में कितने साबुन हैं? हाथ धोने के लिए अलग, नहाने के लिए अलग और ट्रैवलिंग किट में अलग एक छोटा सा साबुन शायद सभी के घर में होता है। पर ये शायद आप खुशबू और बनावट देखकर डिसाइड करते हैं कि किस साबुन से नहाया जाए और किस साबुन से सिर्फ हाथ धोए जाएं? 

दरअसल, भारत में 90% साबुन टॉयलेट सोप ही हैं और उसके बारे में कई लोगों को जानकारी ही नहीं है। तो चलिए आज आपको बताते हैं कि क्यों नहाने वाले साबुन भी यहां टॉयलेट सोप ही हैं।

इसे जरूर पढ़ें- बाजार से साबुन क्यों लाना, घर पर बनाएं इसे कुछ इस तरह 

लाइफबॉय और डिटॉल जैसे साबुन क्यों हैं टॉयलेट सोप? 

देखिए इस सवाल को पढ़कर शायद आपके मन में ये बात आई होगी कि 'ये तो नॉर्मल सी बात है क्योंकि ये साबुन तो कीटाणु मारते हैं और सबसे ज्यादा कीटाणु टॉयलेट में होते हैं शायद इसलिए इसे टॉयलेट सोप कहा जाता है' पर ऐसा नहीं है।  

soap uses

साबुन के अंदर किस तरह के इंग्रीडिएंट्स इस्तेमाल हुए हैं इससे हमें ज्यादा मतलब होता नहीं है पर यही बहुत जरूरी है। यही बताता है कि साबुन हमारी स्किन पर कैसा असर करेगा और कैसा नहीं।  

दरअसल, हम साबुन खुशबू या उसका एड देखकर खरीदते हैं, लेकिन हमें उसके इंग्रीडिएंट्स पर भी ध्यान देना चाहिए। दरअसल साबुन में एक TFM वैल्यू होती है जिसे टोटल फैटी मैटर कहा जाता है।  

  • ग्रेड 1 साबुन में 76% से ज्यादा TFM होता है
  • ग्रेड 2 साबुन में 70% से ज्यादा TFM होता है
  • ग्रेड 3 साबुन में 60% से ज्यादा TFM होता है 

ग्रेड 1 के अलावा सभी साबुन टॉयलेट सोप की कैटेगरी में आता है। भले ही वो किसी भी कंपनी का साबुन हो, लेकिन वो अगर ग्रेड 1 नहीं है तो उसे टॉयलेट सोप ही माना जाएगा।  

इसे जरूर पढ़ें- साबुन के इस्तेमाल से बाथरूम की इन परेशानियों को करें दूर 

क्यों बेदिंग सोप में होता है ज्यादा TFM? 

बेदिंग सोप या नहाने वाले साबुन में ज्यादा टीएफएम इसलिए होता है क्योंकि उन्हें स्किन पर सीधे काम करना होता है और हमारी हथेलियों की स्किन की तुलना में हमारे शरीर की स्किन थोड़ी सॉफ्ट होती है और जितना ज्यादा हाई फैटी मटेरियल होगा उतनी ही ज्यादा अच्छी उसकी क्लींजिंग कैपेसिटी होगी। ऐसे ही बेदिंग सोप जैसे डव, पियर्स आदि में मॉइश्चराइजिंग के लिए भी इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल किया जाता है जो आपकी स्किन को ज्यादा सॉफ्ट बनाते हैं।  

toilet soap and its use

यही कारण है कि कुछ साबुन आपकी स्किन को रफ कर देते हैं और कुछ को लगाकर आपकी स्किन सॉफ्ट होने लगती है। (स्किन को कैसे बनाएं सॉफ्ट)

कैसे पहचाना जाए कि कौन सा साबुन टॉयलेट सोप है या नहीं? 

इसे पहचानने का सबसे अच्छा तरीका है इसके इंग्रीडिएंट्स को देखना। अगर आप सही इंग्रीडिएंट्स को देखेंगे तो पाएंगे कि वहां पर TFM वैल्यू भी लिखी है और साथ ही साथ टॉयलेट सोप के रैपर में ये लिखा है कि वो टॉयलेट सोप है। जी हां, बस आपको उसका रैपर देखना होगा।  

भारत में मिलने वाले अधिकतर साबुन टॉयलेट सोप ही होते हैं और कई लोग इसके बारे में ध्यान ही नहीं देते हैं। अब तो आपको समझ में आ ही गया होगा कि नहाने के लिए किस तरह का साबुन इस्तेमाल करना है? ये जानकारी आपको कैसी लगी इसके बारे में हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। 

 

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