कल जब मेरी पुरानी सहेली पूनम मुझे मिली तो वह अपने बेटे ऋषित को लेकर काफी परेशान थी। जब मैंने उससे इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि ऋषित दिन पर दिन काफी जिद्दी होता जा रहा है। अगर वह उससे कुछ काम करने के लिए कहती है तो वह हर छोटी-छोटी बात पर डिमांड करने लगता है। इतना ही नहीं, अगर वह उसे समझाने की कोशिश भी करती है तो वह जोर-जोर से रोने लगता है और खाना-पीना छोड़ देता है। कई बार ऋषित तो कभी अमय व परिवारवालों के प्रेशर में आकर उसे ऋषित की बात माननी ही पड़ती है। अब उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह ऋषित की आदतों को कैसे बदले।

यह समस्या सिर्फ पूनम की ही नहीं है। अधिकतर मम्मी को इस सिचुएशन का सामना करना पड़ता है। दरअसल, आज के समय में बच्चे अपने मुंह से निकली हर बात को पूरा करवाना चाहते हैं और मम्मी के लिए उनसे नेगोशिएट करना इतना भी आसान नहीं होता। अगर आप उनके मन की बात को पूरा नहीं करती तो वह खुद को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं चूकते और कई बार परिवार के अन्य सदस्य बच्चे की इच्छा को पूरा कर देते हैं या फिर परिवार वालों के दबाव में आकर आपको बच्चे की बात माननी पड़ती है। इससे उस समय भले ही बच्चा खुश हो जाए, लेकिन वास्तव में उसके व्यवहार पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

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होते हैं कई नुकसान

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जब बच्चे के साथ सही तरह से नेगोशिएट नहीं किया जाता और आप उसकी हर डिमांड को पूरा कर देते हैं तो इससे बच्चे पर कई तरह से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सबसे पहले तो उस चीज व पैसों की वैल्यू करना नहीं सीख पाता क्योंकि उसे मन की मन पता होता है कि अगर वह चीज टूट भी गई तो आप उसे दूसरी दिला देंगी। वहीं दूसरी ओर, बच्चा जिद्दी हो जाता है। वह अपनी बात मनवाने के लिए कई रास्ते अपनाने लगता है। कभी खाना नहीं खाता तो कभी घर के अन्य सदस्यों से अपनी बात मनवा लेता है। अपनी जिद पूरी न होने की स्थिति में कुछ बच्चे हिंसक भी हो जाते हैं और चीजों को तोड़ने-फोड़ने लगते हैं। ऐसे बच्चों में शो ऑफ करने की आदत भी आम होती है। जिससे कई बार उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है।

करें बात

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अगर आप चाहती हैं कि आप बच्चे का सकारात्मक विकास करें तो उसकी किसी भी बात को पूरा करने से पहले उससे नेगोशिएट करें। लेकिन इससे भी पहले घर के अन्य सदस्यों से बात करें और उन्हें समझाएं कि इस तरह बच्चे की हर जिद को पूरा करने से बच्चे का वास्तव में कितना नुकसान हो रहा है। जब वह इस बात को समझ जाएंगे तो आपके लिए बच्चे से नेगोशिएशन करना आसान हो जाएगा क्योंकि घर का अन्य कोई सदस्य उसकी इच्छा को पूरा नहीं करेगा।

समझें उनकी बात

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बच्चे के साथ नेगोशिएशन करते समय पहले आपको उनके मन की बात को भी समझना होगा। मसलन, अगर बच्चा दिन में आपसे दस फरमाइशें करता हैं तो उसकी हर बात को मना या हां न करें। पहले आप यह देखें कि उसके द्वारा की गई डिमांड कितनी सही है। हो सकता है कि उनमें से कुछ डिमांड ऐसी हो, जिनकी उन्हें जरूरत है। अगर आपको लगता है कि कुछ डिमांड सही हैं तो उन्हें पूरा करने में हिचकिचाएं नहीं। वहीं आप जिन चीजों के लिए उन्हें मना कर रही हैं, उसके लिए भी उन्हें एक ठोस कारण दें। जब आप सीधे ही उन्हें ना कह देंगी तो उन्हें लगेगा कि आपको उनकी परवाह नहीं है और फिर उनका स्वभाव उग्र हो जाएगा।

न हों ब्लैकमेल

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अगर आपको सच में बच्चे को बेहतर इंसान बनाना है तो आपको नेगोशिएशन के समय थोड़ा धैर्य दिखाना होगा। कई बार बच्चे अपने पैरेंट्स को इमोशनली ब्लैकमेल करने की कोशिश करते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि इस तरह वह अपनी बात बेहद आसानी से मनवा लेंगे। लेकिन आप इसका खुद पर असर न होने दें। मसलन, अगर बच्चा खाना नहीं खाता या होमवर्क नहीं करता तो उसे बताएं कि इससे उसका ही नुकसान है। वह एक-दो बार ऐसा करेगा, लेकिन जब उसे दिखेगा कि आप पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है तो वह खुद-ब-खुद ही मान जाएगा।

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समझें अंतर

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लालच और इनाम के बीच एक महीन रेखा होती है, आपको पहले उसके बीच का अंतर समझना होगा, तभी आप बच्चे के साथ नेगोशिएट कर पाएंगी। मसलन, अगर आपने बच्चे से कुछ काम को करने के लिए कहा और उसके एवज में बच्चा आपसे डिमांड करता है तो आप उसे कभी भी पूरा न करें। इससे बच्चे के भीतर गलत प्रवृत्ति पैदा होगी। वहीं, अगर बच्चे के अच्छा काम करने के एवज में आप उसे खुद से कोई उपहार दे सकती हैं, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि यह उनके द्वारा की गई मेहनत का प्रतिफल है। इससे बच्चे और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।