वैवाहिक रिश्ता दूर से देखने में बेहद ही सुखद लगता है, लेकिन वास्तव में इस रिश्ते को निभाना उतना भी आसान नहीं है। जीवन के अलग-अलग मोड़ पर इसमें कई उतार-चढ़ाव आते हैं और एक स्त्री को अपने रिश्ते को सफल बनाने के लिए कई समझौते करने पड़ते हैं। परिवार की खुशी के लिए वह कई बार अपनी खुशी का त्याग करती है। कहते हैं कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना ही पड़ता है। यह फार्मूला रिश्तों पर पूरी तरह से सटीक बैठता है। रिश्तों में स्थिरता और खुशियां पाने के लिए एक महिला को बहुत कुछ खोना पड़ता है। वैसे तो आप भी अपने जीवन में कई तरह की एडजेस्टमेंट करती होंगी, लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें लेकर आपको कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर किसी रिश्ते को अपना अस्तित्व खोकर बचाया जाए तो उस रिश्ते के कोई मायने नहीं है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिसपर आपको कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए-

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सच्चाई

inside  relationship compromise limits

किसी भी रिश्ते का आधार उसकी सच्चाई ही होता है। हर कपल एक-दूसरे से कुछ बातें छिपाते हैं और काफी हद तक यह सही भी है। लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आपका पार्टनर हर छोटी बात पर आपसे झूठ बोले। एक बार झूठ बोलने पर आप उसे माफ कर सकती हैं, लेकिन बार-बार ऐसा करने पर पार्टनर के साथ समझौता न करें। किसी भी रिश्ते की ट्रांसपेरेंसी ही उसे मजबूत बनाती है और इसलिए रिश्ते में सच्चाई के साथ समझौता न करें। 

पर्सनल स्पेस

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आप भले ही एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हों लेकिन हर व्यक्ति का अपना एक पर्सनल स्पेस होता है और उसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता करना आपके खुद के लिए हानिकारक है। अमूमन भारतीय घरों में पुरूष का स्वभाव होता है कि वह अपने पार्टनर की हर छोटी-बड़ी बात को न सिर्फ जानना चाहते हैं, बल्कि उसमें अपनी राय भी रखते हैं। साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि महिला उनके कहे अनुसार ही कार्य करें। इस तरह आपको पता भी नहीं चलता और आप अपना आत्मविश्वास कहीं खो देती हैं।

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अपनी पहचान

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आप भले ही समाज में किसी की पत्नी के रूप में जानी जाती हों लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आपकी खुद की कोई पहचान नहीं है। सिर्फ किसी भी परछाई ही बनकर न रहें। अगर आप अपनी पहचान के साथ समझौता करती हैं तो आपका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान तो डगमगाता है ही, साथ ही परिवार में भी आपको वह सम्मान नहीं मिलता, जिसकी आप वास्तव में हकदार हैं। धीरे-धीरे एक स्त्री घर के अन्य सामान की भांति हो जाती है, इसलिए अपनी पहचान के समझौता करने का अर्थ है कि आप खुद को खो देती हैं। भले ही आप पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण बाहर जाकर काम नहीं कर सकतीं, लेकिन घर से ही अपने काम के साथ जुड़ी रहे। इंटरनेट के इस युग में तो अवसरों की कोई कमी नहीं है। समाज में सिर्फ मिसेज खन्ना, मिसेज शर्मा या मिसेज पुरी के नाम से न जानी जाएं, बल्कि लोग आपको रश्मि, जान्हवी, सृष्टि अपने नाम से जानें।

घरेलू हिंसा

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यह किसी भी रिश्ते का सबसे भयावह रूप है और इसका विरोध तो हर महिला को बेहद प्रखर रूप से करना चाहिए। हिंसा चाहे शारीरिक हो या मानसिक, अगर आपने एक बार इसके साथ समझौता कर लिया तो यह आपके जीवन का त्रास बन जाएगा और आपको हर दिन इस हिंसा से गुजरना पड़ेगा। इसलिए जब भी आपके साथ पहली बार ऐसा हो, तभी अपनी आवाज उठाएं और एक ठोस कदम उठाएं। वैसे भी कहते हैं कि गलत करने वाले से ज्यादा दोषी उसे सहन करने वाला होता है। अगर आप घरेलू हिंसा को अपनी मौन स्वीकृति दे देंगी तो जीते-जी आप एक नरक का जीवन जीने के लिए मजबूर हो जाएगी। इसलिए चाहे जो भी हो जाए, आप किसी भी तरह हिंसा के साथ समझौता न करें।