आज के समय ऐसे चंद बच्चे ही मिलेंगे, जिन्हें पढ़ना अच्छा लगता हो। अधिकतर बच्चों को अगर किताब पढ़ने के लिए कहा जाए तो या तो वो बेमन से पढ़ते हैं या फिर ना पढ़ने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं। वैसे भी इंटरनेट के इस युग में जब बच्चे भी अपनी पढ़ाई गैजेट्स के जरिए करने लगे हैं तो किताबों के प्रति उनका रूझान कम होना लाजमी है। लेकिन जो ज्ञान, आनंद व संतुष्टि आपको किताबों से मिल सकती हैं, वह एक गैजेट कभी नहीं दे सकता। लंबे समय तक स्की्रन पर समय बिताने से आपकी आंखों को तो नुकसान पहुंचता ही है, साथ ही बैटरी खत्म हो जाने पर आपकी पढ़ाई बीच में ही रह जाती है। जबकि किताबें आपकी एक सच्ची दोस्त साबित हो सकती हैं क्योंकि यह आपको कभी धोखा नहीं देतीं।

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टेक्नोलॉजी के इस युग में माता-पिता के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती होती है कि वह बच्चों की किताबों से दोस्ती कैसे करवाएं। किताबें पढ़ने से न सिर्फ उनका भाषा का उच्चारण बेहतर होता है, बल्कि इससे उनमें सेल्फ स्टडी की आदत भी विकसित होती है। बच्चों की किताबों से दोस्ती करवाने के लिए उन्हें डांटना या गुस्सा करना जरूरी नहीं है। आप कुछ आसान उपायों को अपनाकर भी ऐसा कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

बचपन से शुरूआत

inside  reading habits in kids

अगर आप चाहती हैं कि बच्चों का किताबों के प्रति झुकाव हो, तो इसकी शुरूआत आप बचपन से ही करें। यहां तक कि आप एक साल के बच्चे की भी किताबों से दोस्ती करवा सकती हैं। इसके लिए आप उसे ऐसी किताबें लाकर दें, जिसमें कलरफुल व बड़ी-बड़ी पिक्चर्स हों। भले ही बच्चा उसे पढ़ न पाएं लेकिन तस्वीरों को देखकर वह रिएक्ट करता है। अमूमन मम्मी सोचती हैं कि जब बच्चा बड़ा होगा, तब उसे पढ़ना सिखाएंगी। लेकिन छोटे बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, आप उन्हें किसी भी सांचे में ढाल सकती हैं।

कोर्स की किताबें

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कभी भी बच्चों में रीडिंग हैबिट डेवलप करने के लिए कोर्स की किताबें उन्हें न दें। इससे उन्हें लगता है कि उन्हें पढ़ाई करनी पड़ रही है और फिर वह उससे दूरी बनाने की कोशिश करते हैं। शुरूआत में आप उनकी पसंद को देखते हुए कहानी या कविता की किताबें लाकर दे सकती हैं। इससे उन्हें पढ़ने में मजा आएगा। याद रखें कि रीडिंग हैबिट डेवलप करने का पहला स्टेप है कि बच्चा किताबों में इंटरस्ट लें।

ऐसी हो किताब

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जब भी आप बच्चे के लिए किताबें खरीदें तो बेहद सोच समझकर खरीदें। किताबें हमेशा ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कई पिक्चर्स का इस्तेमाल किया गया हो। साथ ही किताब के अक्षर भी बड़े हों। इससे बच्चे को किताब पढ़ने में भी आसानी होती है और तस्वीरों के जरिए वह कहानी को खुद ही समझ लेता है।

बनवाएं अलमारी

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यह भी बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करने का एक आसान तरीका है। आप बच्चों के कमरे में एक छोटी सी बुक शेल्फ बनवाएं और उसमें बच्चे की पसंद की कुछ अच्छी किताबें रखें। लेकिन ध्यान रखें कि उसमें आपकी किताबें न हों और शेल्फ का साइज इतना हो कि बच्चा आसानी से उसमें से किताबें निकाल सके। आप बच्चे की हाइट को ध्यान में रखकर अलमारी डिजाइन करवाएं। इस तरह जब भी बच्चा खाली होगा और उसके सामने उसकी मनपसंद किताबें होंगी तो वह यकीनन कुछ न कुछ जरूर पढ़ेगा।

बने रोल मॉडल

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बच्चे के लिए उसके माता-पिता पहले रोल मॉडल होते हैं। इसलिए बच्चों की किताबों से दोस्ती करवाने से पहले आपको खुद उनसे दोस्ती करनी होगी। दरअसल, बच्चा अपने घर में जो देखता है, वही करता है। अगर आप दिन में कुछ वक्त किताब पढ़ने में व्यतीत करते हैं तो इससे बच्चा भी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित होता है।

करें मेहनत

बच्चों का रीडिंग में इंटरस्ट डेवलप करने के लिए आपको भी उतनी ही मेहनत करनी होगी। अगर आप सोचती हैं कि आप बच्चे को किताब पढ़ने के लिए कहेंगी और वह पढ़ने लगेगा तो ऐसा नहीं होगा। इसके लिए आप उसके साथ बैठकर कुछ वक्त किताब पढ़ें। रात को सोते समय बच्चों को उसी की किताबों से कुछ अच्छी कहानियां सुनाएं। 

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जल्दबाजी नहीं

बच्चों में किसी भी अच्छी आदत का विकास करने के लिए जरूरी है कि आपमें धैर्य हो। बच्चा एक दिन में ही किताबों से दोस्ती नहीं करेगा। इसके लिए आपको बच्चे को थोड़ा समय देना होगा। अगर एक दिन वह पढ़ने में आनाकानी करता है तो आप उसके साथ बैठकर किताब पढ़िए। धीरे-धीरे उसकी रूचि किताबों की तरफ बढ़ने लगेगी।