दिसंबर महीना दिल्ली के लिए एक दुखद याद लेकर आता है। वो याद है निर्भया की याद। 16 दिसंबर को जिस तरह की हैवानियत निर्भया के साथ की गई थी वो देखकर हर किसी की रूह कांप गई थी। निर्भया के साथ जो हुआ उसके बाद हर लड़की के मन में ये डर रहने लगा कि कहीं कुछ अनहोनी उसके साथ न हो जाए। मैं 2016 में दिल्ली आई थी और 2016 तक भी निर्भया कांड की यादें मेरे दिमाग में ताज़ा थीं। अकेले रहना और अकेले घूमना यहां पर काफी अजीब लगता था। मुझे पुलिस और न्यायप्रणाली पर भरोसा है, लेकिन फिर भी अपनी सुरक्षा का जिम्मा मैं खुद भी रखती हूं। दिल्ली आने के बाद कुछ खास चीज़ें मैं अपनी सुरक्षा के लिए रखती हूं।  

1. स्टन गन और टॉर्च का इस्तेमाल- 

इसके बारे में शायद आपने सुना हो, शायद न सुना हो। लेकिन स्टन गन और टॉर्च आसानी से उपलब्ध होता है। ये एक ऐसा टॉर्च जैसा दिखने वाला डिवाइस होता है जो न सिर्फ टॉर्च का काम करता है बल्कि वो डिवाइस स्टन गन भी होता है जिससे करेंट निकलता है। ये बहुत सस्ते दामों में भी उपलब्ध होता है, लेकिन मेरी आपसे यही गुजारिश है कि इसके लिए पैसे की चिंता न करें और 5 स्टार रेटिंग और अच्छी कंपनी वाली स्टन गन लें। येसुरक्षा डिवाइस आपके बहुत काम आ सकता है। अगर आप अकेली सफर कर रही हैं तो ये डिवाइस कुछ हद तक आपको सुरक्षा की भावना देगा।  

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ये डिवाइस बैटरी से चार्ज होता है और इससे 270 वोल्ट से लेकर 1000-2000 वोल्ट तक करेंट निकलता है (निर्भर इस बात पर करता है कि आप कौन सी स्टन गन ले रही हैं।) सामने से ये टॉर्च की तरह दिखेगा, लेकिन इसका काम करेंट फेंकना होगा। हालांकि, मैंने कभी इसे किसी पर इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन इससे लोगों को डराया जरूर है क्योंकि इससे करेंट निकलता हुआ दिखता है।महिलाओं की सुरक्षा के लिए ये काफी अच्छा डिवाइस साबित हो सकता है।  

इसे मैं अपने बैग में जरूर रखती हूं और ऐसा लगे कि कहीं कोई खतरा है तो मैं इसे पहले ही अपने हाथ में निकाल कर रख लेती हूं। इसलिए क्योंकि अगर मैं इसे अपने हाथ में नहीं रखूंगी तो मुसीबत के समय बैग से निकालने में ही देर हो सकती है। इसलिए सुरक्षा के लिए पहले से ही तैयार रहें।  

2. चाभी हाथ में रखकर चलना-  

ये मैं तब किया करती थी जब मेरे पास स्टन गन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसे सेल्फ डिफेंस का एक तरीका समझ लीजिए। अगर आपको लगे कि आपके आस-पास कोई खतरा है और आप पर हमला हो सकता है तो आप सीधे चाभी को इस तरह से अपने हाथ में रख लीजिए जैसा कि तस्वीर में दिखाया गया है। और अगर कोई जबरन आपके पास आने की कोशिश करे तो उसे पूरी ताकत से मुक्का मार दें।  

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अक्सर ऐसा होता है कि अगर किसी को खतरा महसूस हो रहा है तो दिमाग काम नहीं करता और वो एकदम से रिएक्ट नहीं कर पाते पर ये जरूर सोचिए कि आपको अपने हिसाब से हरकत करनी है। चाहें पीजी में रहने वाली लड़की हो या फिर पूरे परिवार के साथ रहने वाली लड़की/महिला। उसे ऐसे समय में हिम्मत दिखानी बहुत जरूरी हो जाती है।  

3. पेपर (pepper) स्प्रे का इस्तेमाल-  

ये शायद आपने सबसे ज्यादा सुना हो। pepper स्प्रे का इस्तेमाल करने को अधिकतर कहा जाता है। ये आप किसी हमलावर की आंखों में, मुंह पर, नाक के पास डाल सकती हैं। इसे अपने साथ रखिए। अगर आपके पास स्टन गन आदि नहीं है तो आपके लिए सबसे आसान तरीका यही है। इसके साथ भी यही बात है कि आप पैसे के चक्कर में हल्का स्प्रे न ले लें। उसकी जगह अच्छी रेटिंग देखकर ही स्प्रे लें। इसे अपने बैग में पड़े रहने दें और अगर आपको खतरा महसूस होता है या कहीं से आप अकेले जाती हैं तो इस स्प्रे को पहले ही अपने हाथ में निकाल कर रख लें।  

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4. सावधानी सबसे जरूरी है-  

मेरे लिए ये सबसे जरूरी बात है कि मैं जितना हो सके अपने घर से किसी अनजान रास्ते पर ऐसे वख्त न निकलूं जब खतरा हो सकता है। ये मेरी टिप है। हालांकि, ये कई बार हमारे हाथ में नहीं होता है। बाहर रहकर काम करने की स्थिति में कई बार ऐसा भी होता है कि मैं ऑफिस में ही लेट हो जाती हूं। मैं ऑफिस से ही कई बार समय पर नहीं निकल पाती हूं और एक जर्नलिस्ट होने के कारण ऐसी जगहों पर भी जाना होता है कई बार जहां जाना खतरनाक साबित हो सकता है, लेकिन मैं अधिकतर ऐसे समय में ऑफिस की कैब के लिए मांग करती हूं। देखिए अगर आप रात में ज्यादा देरी से ऑफिस से जा रही हैं तो ये आपका अधिकार है कि आपके ऑफिस से आपको घर जाने के लिए कैब मुहैया करवाई जाए। अगर आपके ऑफिस से ये नहीं मिल रहा है तो पहले आप HR से इसकी शिकायत कर सकती हैं और अगर आपके ऑफिस वाले मानने को ही तैयार नहीं हैं तो इसकी आधिकारिक शिकायत भी की जा सकती है। कम से कम दिल्ली में तो यही नियम है। 

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5. हिम्मत रखनी जरूरी है-

ये मैं अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से कह रही हूं। हिम्मत रखनी बहुत जरूरी है। कोई भी स्थिति आए ऐसे में आपको पहले से तैयार रहना जरूरी है। उस समय डरने से कुछ नहीं होगा। अगर आपके पास कोई हथियार है तो उसे पहले से ही अपने हाथ में रखें। ध्यान रहे कि मुसीबत के समय बैग टटोलने का कोई मतलब नहीं रहेगा। सुविधा और सुरक्षा की जिम्मेदारी अगर अपने हाथ रहेगी तो ये सबसे अच्छी बात होगी। ये मैं जानती हूं कि अकेले कहीं आने-जाने में डर लग सकता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम उस समय घबरा जाएं जब सबसे ज्यादा हिम्मत की जरूरत है। भारत में रहने वाली हर लड़की ने कभी न कभी इस तरह की हरकत का सामना किया ही होगा जब उसे छेड़ गया हो या उसके साथ कोई बड़ी हरकत की हो, लेकिन हिम्मत हारने से बहुत ज्यादा समस्या हो सकती है। इसलिए हिम्मत रखना बहुत जरूरी है।