अपने समय की मशहूर अदाकारा रहीं नूतन की आज बर्थ एनिवर्सरी है। 54 साल की उम्र में नूतन ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन बॉलीवुड में वह जब तक सक्रिय रहीं, अपने सशक्त अभिनय से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। नूतन की नेचुरल एक्टिंग, दिल छू लेने वाली डायलॉग डिलीवरी और भाव भंगिमाओं के जादू दर्शकों का मन मोह लेता था। नूतन ने महज 14 साल की उम्र में मां के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘हमारी बेटी’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। 

सदाबहार फिल्मों से जीता दिल

 
 
 
View this post on Instagram

Remembering Nutan, popular actress, on her birth anniversary #nutan #actress #actressnutan #nutansamarth

A post shared by Rounak Chakraborty (@rounakchakra) onJun 3, 2019 at 8:29pm PDT

नूतन साल 1952 में मिस इंडिया चुनी गई थीं। नूतन को साल 1955 में आई फ़िल्म ‘सीमा’ में बड़ा ब्रेक मिला था। इस फ़िल्म के लिए नूतन ने पहला फ़िल्मफेयर अवार्ड भी जीता था। नूतन ने 'पेईंग गेस्ट', 'अनाड़ी', 'सुजाता' जैसी कई हिट फिल्में दीं। साल 1963 में आई फ़िल्म ‘बंदिनी’ नूतन की यादगार फिल्म मानी जाती है। इसके अलावा 'छलिया', 'देवी', 'सरस्वतीचंद्र', 'मैं तुलसी तेरे आंगन की', 'सौदागर' जैसी 70 से ज्यादा फ़िल्में करने वाली नूतन ने बड़ी कामयाबी हासिल करने के बावजूद सादगी से जीवन जिया। नूतन ने अपने करियर के शिखर पर पहुंचने के बाद साल 1959 में नेवी के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल से शादी कर ली थी। उनके बेटे मोहनीश बहल भी अपनी बेमिसाल अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। नूतन के बर्थ एनीवर्सरी के मौके पर आइए जानते हैं उनकी यादगार फिल्मों के बारे में-

सीमा के लिए मिला बेस्ट एक्ट्रेस का पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला

mother mohnish bahl hit songs inside

नूतन को अपने करियर की पहली बड़ी कामयाबी 1955 में आई फिल्म सीमा से मिली थी। इस फिल्म में नूतन ने अपने समय के दिग्गज कलाकार बलराज साहनी के साथ काम किया था। रोचक कहानी और बेहतरीन निर्माता-निदेशक अमिया चक्रवर्ती के साथ ने नूतन को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। इस फिल्म में नूतन ने एक ऐसी अनाथ लड़की गौरी का किरदार निभाया था जिसे काफी कुछ झेलना पड़ता है  है। चोरी के झूठे इल्जाम में इस लड़की को फंसाया जाता है और वह बगावत कर देती है। इसके बाद इस लड़की की जिंदगी में किस तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं और कैसे वह उनका सामना करती है, यह फिल्म में बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है। गौरी का किरदार निभाने हुए नूतन ने इसे पूरी तरह से जीवंत कर दिया था। इसीलिए यह किरदार लंबे वक्त तक लोगों के जेहन में बना रहा। खासतौर पर गाना 'सुनो एक छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी' काफी रियलिस्टिक तरीके से फिल्माया गया, जिसमें गौरी बचपन के दिनों को याद करती है, जब उसके मां-बाप जिंदा थे। इसके अलावा भी 'बात-बात में रूठो ना', 'तू प्यार का सागर है' और 'ये दुनिया गम का मेला है' जैसे गानों ने भी लोगों को इमोशनल कर दिया। 

इसे जरूर पढ़ें: गर्मियों में प्रनूतन कैसे ले रही हैं सर्दियों का मजा, देखिये तस्‍वीरें

अनाड़ी

नूतन और राजकपूर की फिल्म अनाड़ी भी दर्शकों को बहुत अपीलिंग लगी थी। इस फिल्म में नूतन ने एक अमीर शख्स की भतीजी का किरदार निभाया था, जिनके यहां एक गरीब और ईमानदार मजदूर काम करता है। इस फिल्म में नूतन का अभिनय दर्शकों को ही नहीं बल्कि राज कपूर के दिल को भी छू गया था। इस फिल्म के गाने दिल की नजर से, वो चांद खिला लता मंगेशकर और मुकेश जैसे लोकप्रिय सिंगर्स ने गाए थे। इस फिल्म का एक और गाना 'तेरा जाना' भी बहुत सुरीला है और आज भी पुराने वक्त की सुनहरी यादों को ताजा कर देता है। 

nutan mother mohnish bahl inside

तेरे घर के सामने

फिल्म 'तेरे घर के सामने' में नूतन और देव आनंद की जोड़ी को खूब पसंद किया गया था। फिल्म का गाना 'तेरे घर के सामने' अपने समय में हर किसी को जुबानी याद हुआ करता था। इस फिल्म में नूतन ने एक मॉडर्न महिला का किरदार निभाया था, वहीं देवानंद ने एक आर्कीटेक्ट की भूमिका निभाई थी, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेश से वापस लौट आते हैं। इस फिल्म के जरिए एक खूबसूरत मैसेज देने की कोशिश की गई कि हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती। एस डी बर्मन के गाना 'देखो रूठा ना करो' में नूतन की अदाएं दर्शकों ने काफी ज्यादा पसंद की थीं। इस किरदार को निभाने के लिए उनको बेस्ट एक्ट्रेस का पहला फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था।

दिल ही तो है

राज कपूर के साथ नूतन की जोड़ी फिल्म दिल ही तो है में भी नजर आई थी। इस फिल्म में नूतन ने एक मुस्लिम महिला का किरदार निभाया था, जो मस्ती करने वाले राज कपूर के इश्क में गिरफ्तार हो जाती हैं। इस फिल्म में नूतन के डायलॉग डिलीवरी और चेहरे के हाव-भाव देखने लायक हैं। 

मिलन

इस फिल्म में नूतन और सुनील दत्त ने एक शादीशुदा जोड़े की भूमिका निभाई थी, जिन्हें पता चलता है कि पूर्व जन्म में वे सामाजिक बंधनों के कारण साथ नहीं हो पाए थे। इस फिल्म के जरिए नूतन ने एक बार फिर साबित किया था कि वह सादगी के साथ दमदार भूमिकाएं निभाने में सक्षम हैं।