ट्रिपल तलाक मामले पर राज्यसभा में बिल पारित होने पर मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर है। ट्रिपल तलाक के 150 से ज्यादा मामलों में काउंसलिंग करने वाली नियाजमीन दहिया ने इस बारे में HerZindagi के साथ खास बातचीत की। नियाजमीन ने इसे मुस्लिम महिलाओं की कानूनी लड़ाई की जीत बताया। हालांकि नियाजमीन ये भी मानती हैं कि मुस्लिम महिलाओं को अभी न्याय और अपना हक पाने में थोड़ी वक्त और लगेगा, लेकिन इस कानून के बनने से मुस्लिम महिलाओं के हौसले मजबूत होंगे। नियाजमीन से ट्रिपल तलाक के मामले और कानूनी संघर्षों के बारे में आइए विस्तार से जानें-

मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली और उन्हें कानूनी मदद दिलाने वाली भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की कन्वीनर और काउंसलर नियाजमीन दहिया का इस बिल के पास होने पर कहा है, 'तीन तलाक बिल का बहुमत से पारित होना स्वागत योग्य है, हम 15 साल से इसके लिए आवाज उठा रहे थे। बहुत सी मुस्लिम महिलाएं प्रताड़ना की शिकार होती थीं, लेकिन अब ये चीजें नहीं होंगी। अब महिलाओं में ये जागरूकता आ रही है कि एक कानून के तहत मुझे न्याय मिल सकता है। महिलाओं को पता चल रहा है कि वे थाने जा सकती हैं, पुलिस के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। पहले 'घर का मामला' कहकर मामले को रफादफा कर दिया जाता था। लेकिन अब महिलाएं अन्याय होने पर केस रजिस्टर करा सकती हैं और सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगा सकती हैं। इस कानून के बनने को महिलाओं ने बहुत पॉजिटिव लिया है। हालांकि और भी कई मुद्दे हैं, जिन पर मुस्लिम महिलाएं न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन यह कदम मुस्लिम महिलाओं का हौसला बढ़ाएगा। मुस्लिम महिलाओं ने अभी तक सोचा नहीं था कि उनकी समस्याओं पर विशेष रूप से चर्चा होगी, लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। हम आगे भी संघर्ष करते रहेंगे और अपनी आवाज उठाते रहेंगे।'

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इन पर सबसे ज्यादा आते हैं ट्रिपल तलाक के मामले 

नियाजमीन दहिया अब तक ट्रिपल तलाक के 150 से ज्यादा मामलों में काउंसलर रह चुकी हैं। वह दिल्ली के मदनगीर, मालवीय नगर, हौजरानी, संगम विहार जैसे इलाकों में महिलाओं को कानूनी सलाह देती हैं। नियाजमीन ने बताया, 'मेरे पास ट्रिपल तलाक के सबसे ज्यादा मामले दहेज नहीं देने, कम दहेज देने के लिए आते हैं। इसके अलावा भी पुरुष जॉब के लिए बाहर जाने, जबान लड़ाने, शादी के बाद दिल भर जाने जैसी चीजों का हवाला देकर ट्रिपल तलाक दे देते हैं। ट्रिपल तलाक पर कानून बनने से महिलाओं को इंसाफ मिलने का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही महिलाएं हलाला के मामलों में भी न्याय पाना चाहती हैं। हालांकि मेरे पास ऐसे मामले नहीं आए, लेकिन महाराष्ट्र और हैदराबाद में इस तरह के मामले सामने आते हैं। जिस तरह तलाक जैसे मामले बढ़ रहे हैं, उसके साथ ही ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जिसमें पति दोबारा अपनी पत्नी को अपनाना चाहते हैं और ऐसी स्थिति में महिलाओं को हलाला कराना पड़ता है। अपने पति के पास वापस आने के लिए महिला की दूसरी शादी उसके साथ जुल्म है। हम इसका विरोध करते हैं, मीटिंग में महिलाओं को इसके बारे में बताते हैं क्योंकि बहुत सी महिलाओं को इसकी जानकारी नहीं है। कुरान में हलाला का जिक्र नहीं है। कहा जाता है कि हलाला पुरुष और महिलाओं को सबक सिखाने के लिए कराया जाता है, ताकि उन्हें अपनी गलती का अहसास हो, लेकिन हलाला में सजा तो सिर्फ महिलाओं को ही मिलती है।' 

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मुश्किल है सफर, लेकिन बुलंद हैं हौसले

मुस्लिम महिलाओं को अपनी कानूनी स्थिति मजबूत करने में और पुरुषों की तरह बराबरी का हक पाने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन इस कानून से निश्चित रूप से उनकी स्थिति बेहतर होगी। नियाजमीन दहिया बताती हैं कि कानून पारित होने के बाद भी उनके पास ट्रिपल तलाक की धमकी देने का मामला आया और उस पर उन्होंने पीड़िता का मनोबल कैसे मजबूत किया, 'एक महिला मेरे पास आईं और उन्होंने बताया कि पति ने उन्हें ट्रिपल तलाक की धमकी दी है। इनके 6 बच्चे हैं। पति ने उनसे कहा कि मैं 6 बच्चों की जिम्मेदारी नहीं उठा सकता और घर छोड़कर चले गए। इस पर मैंने पीड़िता को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।'

मुस्लिम महिलाओं की मदद करने पर गलत चीजों का विरोध पर करने पर नियाजमीन को विरोधों का भी सामना करना पड़ा है। नियाजमीन बताती हैं, 'मेरे समुदाय के लोग मेरे खिलाफ हैं, जब मैं मुस्लिम महिलाओं की मदद के लिए जाती हूं, तो वे कहते हैं कि मैं उन्हें भड़का रही हूं, गलत चीजें बता रही हूं। हम मौलवियों से बात करने की सोच भी नहीं सकते। वे कहने लगते हैं कि हदीद में ऐसा लिखा है, शरियत में लिखा है कि महिलाओं को बाहर नहीं जाना चाहिए, पर्दे में रहना चाहिए। बहुत सारे लोग मुझे पर प्रतिबंध लगाने और मुझे समुदाय से बाहर करने की बात भी करते हैं, लेकिन इसके बावूजूद मैं पीड़ित महिलाओं का साथ दे रही हूं।' 

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ट्रिपल तलाक पर कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा न्याय

आज के समय में देश को आगे बढ़ाने में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। खेल से लेकर अर्थव्यवस्था तक और राजनीति से लेकर विज्ञान तक, हर जगह महिलाएं अपना परचम लहरा रही हैं, ऐसे समय में महिलाओं के साथ किसी भी तरह का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता। लंबे वक्त से ट्रिपल तलाक को लेकर देश में आवाजें उठ रही थीं, खासतौर पर मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने इसे खत्म किए जाने के लिए कई बार अपील की थी। इस पर साल 2018 में केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर ट्रिपल तलाक पर फौरी रोक लगाई थी और अब इससे आगे बढ़ते हुए सरकार राज्य सभा में ट्रिपल तलाक बिल को पारित कराने में सफल रही है। इस बिल के तहत ट्रिपल तलाक देना कानूनन अपराध होगा और इसके तहत सजा का भी प्रावधान होगा। ट्रिपल तलाक देने पर पुलिस बिना वारंट पति को गिरफ्तार कर सकती है। इसके अलावा बिल में तीन तलाक देने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। हालांकि इसमें आरोपी मजिस्ट्रेट से जमानत ले सकता है, लेकिन जमानत तभी मंजूर की जाएगी, जब पीड़ित महिला का पक्ष सुना जाएगा। पीड़ित महिला के अनुरोध पर ही मजिस्ट्रेट समझौते की अनुमति दे सकता है। साथ ही पीड़ित महिला पति से गुजारा भत्ते का भी दावा कर सकती है।  

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बहुमत से पारित हुआ बिल

राज्यसभा में इस बिल को पास कराने में केंद्र सरकार को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। इस सदन में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक के पक्ष में 99 वोट डाले गए, जबकि 84 सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया। इस बिल पर वोटिंग के दौरान बीएसपी, पीडीपी, टीआरएस, जेडीयू, एआईएडीएमके और टीडीपी जैसे दलों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और इसी के चलते यह बिल उच्च सदन में आसानी से पारित हो गया। अब इस बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने का इंतजार है, जिसके बाद यह 21 फरवरी को जारी किए गए मौजूदा अध्यादेश की जगह ले लेगा। 

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सरकार ने क्यों बनाया कानून?

ट्रिपल तलाक के मामले पर रवि शंकर प्रसाद ने चर्चा करते हुए कहा कि इस पर मुस्लिम नुमाइंदों ने कहा था कि आपसी रजामंदी से इस पर काम किया जाएगा और मुस्लिम पुरुष तीन तलाक नहीं देंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी देखने में नहीं आया। रवि शंकर प्रसाद ने ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा पर चर्चा करते हुए कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ट्रिपल तलाक पर पहले ही बैन लगा चुकी है और सरकार का मानना था कि उच्चतम न्यायालय की रोक के बाद ट्रिपल तलाक देने के मामले खुद ही खत्म हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आने के बाद इस illegal practice के 574 मामले सामने आए और सरकार की तरफ से ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश लाए जाने के बाद 101 मामले सामने आए। कई रिपोर्ट आईं, जिनमें कहा गया कि मुस्लिम पुरुषों ने महिलाओं को जली हुई रोटियो, सब्जी के लिए पैसे मांगने पर या पति के अश्लील वीडियो बनाने का विरोध करने पर उन्हें तलाक दे दिया। इसीलिए हम इस पर कानून लेकर आए।'  

महिला सशक्तीकरण की मुहिम को मिलेगा बढ़ावा

लंबे वक्त से मीडिया में मुस्लि पुरुषों की तरफ से महिलाओं को छोटी-छोटी बातों पर ट्रिपल तलाक दिए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। कभी तंबाकू वाले मंजन से दांत साफ करने पर, तो कभी नरेंद्र मोदी की रैली में हिस्सा लेने पर, कभी गुजारा भत्ता मांगने पर तो कभी बेटियों को जन्म देने पर महिलाओं को पुरुषों के तलाक देने के मामले सामने आए हैं। गौरतलब है कि तीन तलाक के खिलाफ कानून पारित हो जाने और 3 साल की सजा के प्रावधान से पुरुषों में तीन तलाक देने के मामलों में कमी आएगी। हालांकि मुस्लिम समाज में अभी भी महिलाएं अपने हक पाने के लिए काफी संघर्ष कर रही हैं, लेकिन इस कानून के बनने से उनके संघर्ष को और मजबूती मिलेगी।