
हिन्दू धर्म में किसी भी विवाहित महिला का सोलह श्रृंगार करना बहुत ही शुभ माना जाता है। हाथों में मेहंदी, मांग में सिंदूर और पैरों में आलता, किसी भी दुल्हन की पहचान माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि किसी भी सुहागन महिला का श्रृंगार इन सभी चीजों के बिना अधूरा है।
ख़ासतौर पर जब बात पैरों में आलता लगाने की हो, तब धर्म शास्त्रों में इससे जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि किसी भी व्रत और त्योहार में हर एक विवाहित को आलता जरूर लगाना चाहिए।
करवा चौथ या किसी ऐसे त्योहार में आलता का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है जिसमें एक विवाहित महिला पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत या पूजन करती है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि किसी भी श्रृंगार को करने के अपने अलग नियम बनाए गए हैं और उनका पालन भी जरूरी माना जाता है।
ऐसे ही यदि आप किसी भी शुभ अवसर पर अपने पैरों को आलता के रंग से सजा रही हैं तो आपको भूलकर भी ज्योतिष में बताई गई कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए। मान्यता यह भी है कि यदि आप ज्योतिष की बताई बातों का पालन किए बिना ही आलता लगाती हैं तो ये पति के जीवन में कोई बड़ा संकट ला सकता है। आइए Life Coach और Astrologer Sheetal Shaparia से जानें कि आपको किन गलतियों से बचना चाहिए।

सोलह श्रृंगार में सबसे ख़ास आलता को माना जाता है, ये न सिर्फ दुल्हन की पहचान होता है बल्कि इसे श्रृंगार का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। यदि पौराणिक कथाओं की बात की जाए तो ये भगवान कृष्ण के कई चित्रणों में भी देखने को मिलता है, ऐसी मान्यता है कि उन्होंने राधा रानी के चरणों को आलता से सजाया था। यह लाल रंग का एक तरल होता है और लाल रंग को उर्वरता, प्रेम तथा समृद्धि के प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि जो भी स्त्री इसे पैरों में लगाती है उसके सौभाग्य में वृद्धि होती है और पति के साथ संबंध मजबूत होते हैं। इसे लक्ष्मी के आगमन के लिए भी शुभ माना जाता है, इसी वजह से जब कोई नई दुल्हन ससुराल में प्रवेश (दुल्हन के गृह प्रवेश के समय कलश गिराने की रस्म) करती है तब वो आलता में पैर रखकर अंदर कदम बढ़ाती है। इससे नई दुल्हन के साथ मां लक्ष्मी का भी प्रवेश होता है।
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किसी भी विवाहित महिला को पैरों में आलता का इस्तेमाल करते समय गलत दिशा यानी कि दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके इसे नहीं लगाना चाहिए। ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि आलता का इस्तेमाल महिलाएं जब भी करें उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही करें। दरअसल कोई भी श्रृंगार आपको दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके नहीं करना चाहिए, इस दिशा को श्रृंगार के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
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विवाहित महिलाओं को मंगलवार के दिन पैरों में आलता न लगाने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह दिन हनुमान जी को समर्पित है और वो बाल ब्रह्मचारी हैं, इसी वजह से इस दिन महिलाओं को श्रृंगार न करने की सलाह दी जाती है।

यदि आप जल्दबाजी में भी आलता लगा रही हैं तब भी आपको इसके किसी भी आलता डिज़ाइन को पूरा करके ही छोड़ना चाहिए। विवाहित महिलाओं को हमेशा पैरों के आगे वाले हिस्से से एड़ी तक इसे लगाना चाहिए और कभी भी एड़ी को खाली नहीं छोड़ना चाहिए।
कभी भी आपको तुरंत आलता लगाने के बाद पैर नहीं धोने चाहिए और इसे जानबूझकर पैरों से हटाना नहीं चाहिए। ये आपके पति के लिए दुर्भाग्य ला सकता है। आलता को पानी से छुड़ाना श्रृंगार का अपमान करना है। इससे आपके दाम्पत्य जीवन में संकट के संकेत मिलते हैं।
यदि आप किसी भी व्रत या त्योहार में पैरों को आलता से सजा रही हैं तो यहां बताई बातों को ध्यान में रखें जिससे आपका रिश्ता हमेशा के लिए मजबूत रहे।
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