शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की कहानी 'शेरशाह' के जरिए अब सभी के दिलों में राज कर रही है। विक्रम बत्रा और डिंपल चीमा की लव स्टोरी जो आज भी जिंदगी भर का साथ बनी हुई है और हीर-रांझा, लैला-मजनू की तरह अब विक्रम और डिंपल की प्रेम कहानी के भी चर्चे होने लगे हैं। कैप्टन विक्रम बत्रा एक लेजेंड रहे हैं और फिल्म 'शेरशाह' के आने के बाद तो उनकी जिंदगी एक खुली किताब सी लगती है। 

अधिकतर लोगों को लगता है कि फिल्म में बोले गए डायलॉग और सीन्स नकली हैं और विक्रम बत्रा ने शायद वो ना कहा हो, लेकिन मैं आपको बता दूं कि फिल्म 'शेरशाह' के कई ऐसे डायलॉग हैं जो विक्रम बत्रा ने खुद कहे थे और वो यकीनन आपको गर्व से भर देंगे। 9 सितंबर को विक्रम बत्रा की बर्थ एनिवर्सरी होती है और इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं उन डायलॉग्स के बारे में। 

'ये दिल मांगे मोर...'

कारगिल युद्ध पर पहली विजय मिलने के बाद विक्रम बत्रा ने अपने सुपीरियर को फोन पर यही कहा था। ये फिल्मी डायलॉग नहीं बल्कि असली शब्द हैं जिन्हें फिल्म 'LOC कारगिल' में भी बताया गया है। विक्रम बत्रा ने बहुत खुशी जाहिर करते हुए कहा था, 'ये दिल मांगे मोर..', प्वाइंट 5140 को कैप्टन विक्रम बत्रा की अगुवाई में वापस कैप्चर कर लिया गया था।

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'वो गोली मेरे लिए थी..'

'शेरशाह' फिल्म का एक इमोशनल सीन है जिसमें कैप्टन विक्रम बत्रा अपने एक साथी के शहीद हो जाने से बेहद दुखी थे। इसी सीन में वो कहते हैं, 'वो मेरी मौत मरा है, वो गोली मेरे लिए थी और मेरी जगह वो... वो गोली मेरे लिए थी।' ये बात सही है, कैप्टन बत्रा ने अपनी बहन को फोन पर ये भी कहा था, 'दीदी, वो मेरे लिए थी और मैंने एक इंसान खो दिया।'

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'तिरंगा लहरा कर आऊंगा'

कैप्टन विक्रम बत्रा द्वारा कही गई ये लाइन शायद हर हिंदुस्तानी के मन में आदर की भावना भर देगी। कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा था, 'तिरंगा लहराकर आऊंगी, नहीं तो उसमें लिपट कर आऊंगा, लेकिन आऊंगा जरूर।' ये शब्द किसी भी फौजी के लिए गर्व भरे शब्द होते हैं और यकीनन कैप्टन विक्रम बत्रा के ये शब्द बहुत खास रहे हैं। 

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जंग के बीच माधुरी दीक्षित की बात- 

फिल्म 'शेरशाह' के एक सीन में कैप्टन विक्रम बत्रा माधुरी दीक्षित के बारे में बात कर रहे हैं जहां वो पाकिस्तानी सिपाही को जवाब दे रहे हैं। पाकिस्तानी सिपाही ने कहा है, 'माधुरी दीक्षित हमें दे दे, हम सब यहां से चले जाएंगे,' उसपर विक्रम बत्रा ने कहा है, 'माधुरी दीक्षित दूसरी तरह की शूटिंग में व्यस्त है, अभी इसी से काम चला ले।' इसके बाद कैप्टन बत्रा उस ऑफिसर को गोली मार देते हैं।  

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असल में कैप्टन विक्रम बत्रा के भाई ने TedX टॉक में इस बात का ज़िक्र किया था और कहा था कि माधुरी दीक्षित वाला ये वक्या असल में हुआ था, लेकिन कैप्टन विक्रम बत्रा ने गोली नहीं मारी थी बल्कि ग्रेनेड का इस्तेमाल किया था और कहा था, 'ये लो माधुरी दीक्षित का तोहफा'।  

कैप्टन विक्रम बत्रा की लाइफ और उनकी हिस्ट्री बेहद खास रही है और हम उनकी शहादत को सलाम करते हैं। शहीद मरा नहीं करते वो अमर हो जाते हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।