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पीएफ और पीपीएफ में क्या है फर्क और कितना फायदा होता है इनसे, जानिए

पीएफ और पीपीए में क्या फर्क होता है, इस बात को लेकर महिलाएं उलझन में पड़ जाती हैं। आइए जानें इन दोनों बचत योजनाओं में अंतर ताकि आप समझदारी से अपने लिए...
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Published -07 Nov 2018, 11:27 ISTUpdated -07 Nov 2018, 11:51 IST
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pf and ppf tax saving schemes are different from each other main

जब बात सेविंग्स करने की होती है तो महिलाओं को अक्सर पीपीएफ ( public providend fund ) के तहत बचत करने की सलाह होती है। लेकिन बहुत सी महिलाएं इस बात को लेकर उलझन में पड़ जाती हैं कि पीएफ और पीपीएफ में क्या फर्क होता है। पीएफ खाते नौकरीपेशा महिलाओं के लिए किसी भी संस्थान में काम करने के साथ ही खोल दिए जाते हैं। वहीं पीपीएफ एक अलग तरह का बचत खाता होता है, जिसमें पैसे जमाकर करके आप अपने लिए सेविंग्स करने के साथ साथ इनकम टैक्स में छूट भी पा सकती हैं। इन दोनों में बचत करने के अलग-अलग नियम होते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं-

पीएफ और पीपीएफ में ये है अंतर

पीएफ मूल रूप से नौकरीपेशा लोगों के लिए खोला जाता है और इसे ईपीएफ भी कहा जाता है। वहीं पीपीएफ केंद्र सरकार की एक बचत योजना है, जिसे बैंक और डाकघरों की तरफ से चलाया जाता है। इस खाते को कोई भी महिला खुलवा सकती है, भले ही वो नौकरीपेशा हो या न हो।

pf and ppf tax saving schemes are different from each other inside

ये है पीएफ

नौकरीपेशा लोगों के लिए खोले जाने वाले इस अकाउंट में नियोक्ता आपकी बेसि‍क सैलरी से एक निश्चित रकम काटकर पीएफ अकाउंट में जमा करा देता है। वर्तमान समय में यह रकम सैलरी की 12% होती है। वैसे यह रकम सरकार की ओर से तय होती है और इसमें इतना ही हिस्सा कर्मचारी के योगदान के तौर पर अकाउंट में जमा किया जाता है। नियोक्ता की ओर से जमा रकम में से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में जाता है। इस पर 8.65 फीसद ब्याज मिलता है। इसके लिए हर अकाउंट होल्डर को UAN नंबर जारी किया जाता है। अच्छी बात ये है कि वर्किंग वुमन इस व्यवस्था के तहत फाइनेंशियली सिक्योर होती हैं और काम से रिटायर होने के बाद उन्हें एक बड़ी राशि पीएफ खाते से मिलती है, जिसे वे अपनी अहम जरूरतों जैसे कि बच्चों की शादी या घर खरीदने आदि के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। 

टैक्स बेनिफिट : अगर जमा की गई रकम 5 साल से पहले निकाली तो धनराशि पर टैक्स लगेगा, वहीं 5 साल की अवधि पूरी होने पर 80C के अंतर्गत छूट मिलती है।

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ये है पीपीएफ

सरकार की यह स्कीम बैंकों और डाकघरों की तरफ से चलाई जाती है। इसमें खाता खुलवाने के लिए आपका नौकरी पेशा होना अनिवार्य नहीं है। इसमें खाता खुलवाने पर 7.8 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है। इसमें मैच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है, लेकिन आप 5 साल बाद जमा की हुई रकम का कुछ हिस्सा निकाल सकती हैं।

टैक्स बेनिफिट : खाते में जमा राशि पर 80C के अंतर्गत छूट मिलती है और मेच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं देना होता।

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पीपीएफ है बहुत फायदेमंद

  • पीपीएफ अकाउंट में जमा पैसों पर आयकर की धारा 80 सी के तहत छूट।
  • पीपीएफ अकाउंट पर मिले ब्याज पर नहीं चुकाना होता है टैक्स।
  • खाते में जमा राशि पर 7.8 फीसदी की दर से मिलता है ब्याज।
  • खाते में जमा रकम पर मैच्योरिटी होने पर नहीं चुकाना होता है टैक्स।
  • किसी आकस्मिक जरूरत, बीमारी की स्थिति में या फिर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए आप 5 साल पुराने पीपीएफ अकाउंट को बंद करके पूरी रकम निकाल सकती हैं।

यानी ये दोनों बचत खाते आपकी शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इनके बीच अंतर समझने और इनसे मिलने वाले ब्याज के अंतर को समझने के बाद आप इंटेलिजेंट तरीके से अपनी बचत की प्लानिंग कर सकती हैं।

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