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Kalashtami 2023: कालाष्टमी पर करें शिव प्रिय भैरव स्तुति, हर संकट होगा दूर

भगवान शिव के 11 रुद्र अवतार हैं जिनमें से एक हैं भगवान काल भैरव। भगवान काल भैरव की पूजा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है।  
Editorial
Updated:- 2023-08-04, 17:24 IST

Masik Kalashtami 2023 Kaal Bhairav Stuti: हिन्दू धर्म में कालाष्टमी का बहुत महत्व माना जाता है।

इस दिन भगवान शिव के अवतार भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है।

पंचांग के अनुसार, साल में कुल 12 कालाष्टमी आती हैं। यानि कि हर माह में एक कालाष्टमी पड़ती है। 

अगस्त माह में कालाष्टमी 8 अगस्त, दिन मंगलवार की पड़ रही है। इस दिन भैरव बाबा की पूजा होती है। 

ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स का कहना है कि कालाष्टमी के दिन भैरव स्तुति का पाठ करना चाहिए। 

काल भैरव स्तुति

kaal bhairav ka stuti path

  • यं यं यं यक्षरूपं दशदिशिविदितं भूमिकम्पायमानं। सं सं संहारमूर्तिं शिरमुकुटजटाशेखरं चन्द्रबिम्बम्।।
  • दं दं दं दीर्घकायं विकृतनखमुखं चोर्ध्वरोमं करालं। पं पं पं पापनाशं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • रं रं रं रक्तवर्णं कटिकटिततनुं तीक्ष्णदंष्ट्राकरालं। घं घं घं घोषघोषं घ घ घ घ घटितं घर्घरं घोरनादम्।।
  • कं कं कं कालपाशं धृकधृकधृकितं ज्वालितं कामदेहं। तं तं तं दिव्यदेहं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • लं लं लं लं वदन्तं ल ल ल ल ललितं दीर्घजिह्वाकरालं। धुं धुं धुं धूम्रवर्णं स्फुटविकटमुखं भास्करं भीमरूपम्।।
  • रुं रुं रुं रुण्डमालं रवितमनियतं ताम्रनेत्रं करालं। नं नं नं नग्नभूषं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • वं वं वं वायुवेगं नतजनसदयं ब्रह्मपारं परं तं। खं खं खं खड्गहस्तं त्रिभुवननिलयं भास्करं भीमरूपम्।।
  • चं चं चं चं चलित्वा चलचलचलितं चालितं भूमिचक्रं। मं मं मं मायिरूपं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।

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  • शं शं शं शङ्खहस्तं शशिकरधवलं मोक्षसंपूर्णतेजं। मं मं मं मं महान्तं कुलमकुलकुलं मन्त्रगुप्तं सुनित्यम्।।
  • यं यं यं भूतनाथं किलिकिलिकिलितं बालकेलिप्रधानं। अं अं अं अन्तरिक्षं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • खं खं खं खड्गभेदं विषममृतमयं कालकालं करालं। क्षं क्षं क्षं क्षिप्रवेगं दहदहदहनं तप्तसन्दीप्यमानम्।।
  • हौं हौं हौंकारनादं प्रकटितगहनं गर्जितैर्भूमिकम्पं। बं बं बं बाललीलं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • सं सं सं सिद्धियोगं सकलगुणमखं देवदेवं प्रसन्नं। पं पं पं पद्मनाभं हरिहरमयनं चन्द्रसूर्याग्निनेत्रम्।।
  • ऐं ऐं ऐश्वर्यनाथं सततभयहरं पूर्वदेवस्वरूपं। रौं रौं रौं रौद्ररूपं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • हं हं हं हंसयानं हपितकलहकं मुक्तयोगाट्टहासं। धं धं धं नेत्ररूपं शिरमुकुटजटाबन्धबन्धाग्रहस्तम्।।
  • टं टं टं टङ्कारनादं त्रिदशलटलटं कामवर्गापहारं। भृं भृं भृं भूतनाथं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम् ।।
  • इत्येवं कामयुक्तं प्रपठति नियतं भैरवस्याष्टकं यो। निर्विघ्नं दुःखनाशं सुरभयहरणं डाकिनीशाकिनीनाम्।।
  • नश्येद्धिव्याघ्रसर्पौ हुतवहसलिले राज्यशंसस्य शून्यं। सर्वा नश्यन्ति दूरं विपद इति भृशं चिन्तनात्सर्वसिद्धिम् ।।
  • भैरवस्याष्टकमिदं षण्मासं यः पठेन्नरः।। स याति परमं स्थानं यत्र देवो महेश्वरः ।।

काल भैरव स्तुति के लाभ 

kaal bhairav ki puja vidhi

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  • कालाष्टमी के दिन इस पाठ को करने से राहु का दुष्प्रभाव कुंडली से हटने लगता है।
  • काल भैरव स्तुति पाठ से भगवान शिव और उनके कल भैरव रूप की कृपा मितली है।

 

अगर आप भी कालाष्टमी की पूजा करते हैं तो भगवान शिव और काल भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए भैरव स्तुति का पाठ अवश्य करें। अगर हमारी स्टोरीज से जुड़े आपके कुछ सवाल हैं, तो वो आप हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आप तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। 

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