2021 में भारत अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है और ये दिन बहुत खास है क्योंकि पहली बार न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वेयर पर स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा फैराया जाएगा। जहां एक ओर हर भारतीय के लिए ये दिन खास है वहीं दूसरी ओर कई ऐसे लोग हैं जो इस दिन से जुड़े खास फैक्ट्स को जानते ही नहीं हैं। इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों ये दिन बहुत खास है और इस दिन से जुड़े कुछ खास फैक्ट्स क्या हैं। 

1. आखिर क्यों लाल किले पर ही फैलाया जाता है तिरंगा-

देश की आज़ादी का दिन 15 अगस्त 1947 तय हुआ था और इस समय रायसीना हिल्स (जहां राष्ट्रपति भवन है) पर लॉर्ड माउंटबेटन रह रहे थे। ये वो समय था जब एक जगह तय करनी थी जहां झंडा फहराया जाएगा। ऐसे में रायसीना हिल्स को तिरंगा फहराने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। अब दूसरी सबसे अहम इमारत लाल किला ही थी जहां से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराया था। 

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2. आखिर 18 जुलाई को आज़ादी मिलने के बाद भी 15 अगस्त को क्यों चुना गया?

अधिकतर लोगों को ये नहीं पता होगा, लेकिन भारत को आज़ादी 18 जुलाई 1947 को मिल गई थी, लेकिन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस तय किया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि तत्कालीन और अंतिम वॉयसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने जापान के द्वितीय विश्व युद्ध में समर्पण की दूसरी सालगिराह को भारत की आज़ादी का दिन चुना। 15 अगस्त 1945 को जापान ने समर्पण किया था और तभी दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ था। 

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3. 1950 तक नहीं था राष्ट्रगान-

क्या आप जानते हैं कि 1950 तक हमारे पास राष्ट्रगान नहीं था और उसके बाद बंगाली में 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए गीत 'जन गन मन' को हिंदी में इस्तेमाल किया गया। 

4. भारत ही नहीं 5 अन्य देशों को भी मिली थी इस दिन आज़ादी-

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत को ही 15 अगस्त को आज़ादी मिली थी। बहरीन, नॉर्थ कोरिया, साउथ कोरिया, कॉन्गो और लिंकेस्टाइन को भी इसी दिन आज़ादी मिली थी। हालांकि, ये अलग-अलग सालों में मिली थी। 

5. 15 अगस्त को नहीं मिली थी गोवा को आज़ादी-

भले ही पूरे भारत को 15 अगस्त को आज़ादी मिल गई थी, लेकिन गोवा को तब भी पुर्तगाली कालोनी ही माना गया। यहां कानून भी अलग चलता था। इसे 1961 में भारत का संपूर्ण हिस्सा माना गया था। 

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6. 15 अगस्त 1947 को पूरी तरह से नहीं मिली थी अंग्रेजों से आज़ादी-

दरअसल, 1950 तक भारत का संविधान नहीं बना था और जब तक भारत संपूर्ण तरह से रिपब्लिक नहीं बन पाया। तब तक अस्थाई तौर पर किंग जॉर्ज VI को ही हेड ऑफ द स्टेट माना जा रहा था। 

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7. 26 जनवरी 1930 को भी डिक्लेयर किया गया था स्वतंत्रता दिवस-

 हो सकता है आप इस फैक्ट को देखकर चौंक जाएं, लेकिन ये है सच। दरअसल, 1929 में भारतीय नेशनल कांग्रेस के लाहौर सेशन ने पूर्ण स्वराज का डिक्लेरेशन किया और तब 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस माना गया। इसके बाद ही सिविल डिसओबीडिएंस मूवमेंट (सविनय अवज्ञा आंदोलन) के लिए कांग्रेस ने लोगों को आमंत्रित किया और मार्च में ही 'दांडी मार्च' शुरू हुआ। 

8. कई सालों तक 26 जनवरी ही रहा स्वतंत्रता दिवस-

 1930 से 1946 तक 26 जनवरी को ही कांग्रेस द्वारा स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था। इसके बाद 1947 में ये बदलकर 15 अगस्त किया गया और संविधान बनने के बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया गया। 

 9. स्वतंत्रता दिवस से पहले इस दिन हो गया था बंटवारे का फैसला- 

स्वतंत्रता दिवस और भारत की आज़ादी का एक्ट पास होने के पहले ही 3 जून 1947 को ब्रिटिश इंडिया को दो भागों में विभाजित करने का फैसला ले लिया गया था। इसके बाद 14 अगस्त को पाकिस्तान में आज़ादी का दिन मनाया जाता है और 15 अगस्त को भारत में।  

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