जब हम किसी चीज़ को पाने की इच्छा रखते हैं और वो हमें न मिलकर किसी और के पास होती है तो ये बात ईर्ष्या की भावना को जन्म देती है। ये एक ऐसा भाव है जिसकी वजह से आप दूसरों के सामने अच्छा महसूस नहीं करते हैं। आपके अंदर किसी तरह की कमी या अपूर्णता भी ईर्ष्या को जन्म देती है। यदि आपको ऐसा लगता है कि आपसे बेहतर कोई दूसरा व्यक्ति है तो ये भी उस व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या भाव को जगाता है। खासतौर पर बच्चों के अंदर ये भावना बहुत जल्दी ही उत्पन्न हो जाती है क्योंकि वो किसी भी बात की गहराई को समझ पाने में असमर्थ होते हैं। स्कूल में किसी बच्चे के पास अच्छा लंच बॉक्स देखकर, किसी का ज्यादा महंगा पेन्सिल बॉक्स देखकर या फिर बर्थडे में अच्छे कपड़े पहने हुए देखकर अक्सर बच्चों के मन में ईर्ष्या की भावना आ जाती है जो उसके मानसिक विकास के लिए हानिकारक है। यही नहीं अपने ही घर में छोटे भाई या बहन के लिए माता-पिता का अधिक झुकाव भी बच्चे में ईर्ष्या उत्पन्न करता है। अगर बचपन से ही बच्चे की इस भावना को नियंत्रित न किया गया तो ये उसके भविष्य के लिए भी घातक हो सकती है। आइए जानते हैं बच्चों में ईर्ष्या भावना के प्रकार और परिणामों के बारे में -

ईर्ष्या भावना के प्रकार 

मटेरियल जेलेसी

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मटेरियल जेलेसी यानि किसी भी भौतिक वस्तु को देखकर उत्पन्न होने वाली ईर्ष्या भावना। इसमें किसी ऐसी चीज़ को देखकर बच्चा दूसरे बच्चे से जलन करने लगता है जो उसके पास नहीं है। जब किसी चीज़ के प्रति बच्चा आकर्षित होता है और वो दूसरे बच्चे के पास होती है, तो बच्चा किसी भी तरह उस चीज़ को हांसिल करने के बारे में सोचने लगता है। उसकी यही सोच उसे गलत रास्ते पर ले जा सकती है और वो चोरी की आदत भी सीख सकता है।

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सोशल  जेलेसी

ये ईर्ष्या आमतौर पर बढ़ते हुए बच्चों में उत्पन्न होने लगती है। अपने बेस्ट फ्रेंड या फिर गर्लफ्रेंड,बॉयफ्रेंड को लेकर होती है। कई बार ऐसा होता है कि बच्चा किसी लड़की को पसंद करता है और हो सकता है कि उसकी गर्लफ्रेंड किसी और को पसंद करती है तो बच्चा उस दूसरे बच्चे से नफरत करने लगता है, जिसे उसकी गर्लफ्रेंड पसंद करती है। 

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सिबलिंग जेलेसी

अक्सर देखा गया है कि जब घर में दूसरे बच्चे यानी कि सिबलिंग का जन्म होता है तो उसके प्रति बच्चे के अंदर ईर्ष्या भाव पैदा हो जाता है। बच्चे को ऐसा लगने लगता है कि उसके पैरेंट्स का प्यार उसके प्रति कम हो गया है और उसकी चीज़ों पर उसका अधिकार नहीं  है। ऐसी स्थिति में बच्चा सिबलिंग से ईर्ष्या करने लगता है और उसे आघात पहुंचाने के बारे में सोचता है। 

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ऐकडेमिक जेलेसी 

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आमतौर पर स्कूल में क्लास मेट के अच्छे नंबर आते हुए देखकर बच्चों में ये भावना उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में बच्चा आगे निकलने की होड़ में दूसरे बच्चे को नुकसान तो पहुंचाता ही है साथ ही एग्जाम में नक़ल करने की कोशिश भी करता है। 

बच्चे को ईर्ष्या भावना से ऐसे बचाएं 

यदि बच्चे में कोई भी उपर्युक्त लक्षण हैं तो बहुत जल्द ही उसे इस ईर्ष्या की भावना से निकालना जरूरी है। इसके लिए पैरेंट्स इन बातों का ध्यान रख सकते हैं 

बच्चे से बातें करें 

बच्चे के अंदर ऐसी कोई स्थिति न हो इसके लिए पैरेंट्स को बच्चों से ज्यादा से ज्यादा बातें करनी चाहिए। पैरेंट्स जितना ज्यादा समय बच्चों को देंगे बच्चे इस स्थिति का शिकार होने से बचेंगे। 

इंडोर और आउटडोर गेम खेलें 

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खाली समय में बच्चों के साथ गेम्स खेलें। ऐसा करने से उनका दिमाग एनालिटिकल हो जाएगा साथ ही उनका शारीरिक विकास भी होगा। यही नहीं बच्चा ऐसी किसी भी सोच में उलझेगा नहीं जिसका असर उसके दिमाग में न पड़े। 

चीजों की अहमियत सिखाएं 

अक्सर बच्चे पेरेंट्स से ये शिकायत करते हैं कि उनके पैरेंट्स उनके लिए मनपसंद सामान नहीं ला रहे हैं। बच्चों को चीज़ों की अहमियत पैरेंट्स ही समझा सकते हैं इसलिए उन्हें बताएं कि आप कितनी मेहनत से पैसे कमाते हैं।

सिबलिंग की तरफ कम ध्यान दें 

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बच्चे के सामने कभी भी ऐसा न दिखाएं कि आप नए जन्म लिए हुए बच्चे को ज्यादा प्यार कर रहे हैं। हमेशा उसे ऐसा फीलकराएं की वो बच्चा आपके लिए ज्यादा महत्त्व रखता है लेकिन न्यू बॉर्न की केयर करनी भी जरूरी है। इसलिए बच्चे से उसके सिबलिंग के कुछ काम भी कराएं जैसे उसके कपड़े सेलेक्ट करना ,उसकी वॉटर बॉटल देना ऐसा करने से बच्चा सिबलिंग से प्यार करने लगेगा। 

 

इन बातों को ध्यान में रख कर आप अपने बच्चे को ईर्ष्या की भावना से तो बचा ही सकती हैं साथ ही उसके भविष्य के लिए भी अच्छा मार्गदर्शन दे सकती हैं। 

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