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मानसून कैसे आता है? जानिए क्या है इसके पीछे की साइंस

मानसून एक मौसमी हवाओं की प्रणाली है, जो गर्म और आर्द्र हवाओं को गर्म समुद्रों से ठंडे महाद्वीपों की ओर ले जाती है।
Updated:- 2024-06-27, 18:18 IST
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मानसून एक विशेष प्रकार का जलवायु परिवर्तन है, जो अपने साथ बारिश और आंधी लेकर आता है। इसे आमतौर पर गर्मी के अंत और वर्षा ऋतु के शुरू होने पर देखा जाता है। अक्सर 20 से 25 जून तक मानसून उत्तर भारत में दस्तक दे ही देता है और 15 जुलाई तक यह पूरे भारत में आ जाता है। सरल शब्दों में मानसून को आप रिवर्सल ऑफ विंड भी कह सकते हैं। यह कई कारणों से आता है। आइए आज हम आपको इसके पीछे की साइंस के बारे में बताते हैं।

मानसून के बनने के पीछे कारण क्या हैं?

मानसून तब बनता है जब गर्मी के मौसम में हिंद महासागर में सूर्य विषुवत रेखा के ठीक ऊपर होता है। इस दौरान समुद्र का तापमान 30 डिग्री और पृथ्वी का टेंप्रेचर 45-46 डिग्री तक रहता है। ऐसे में, हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से में मानसूनी हवाएं एक्टिव हो जाती हैं और फिर ये विषुवत रेखा को पार करके एशिया की ओर बढ़ने लगती है। इस परिवर्तन के कारण हवा उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से निम्न दबाव वाले क्षेत्रों की ओर प्रवाहित होती है, जिससे मानसून वायु गतिशील होती है। यह प्रक्रिया उषा और लवर्षा ऋतु के बीच स्थिर होती है और मानसून को उत्पन्न करती है। 

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भारत के दो हिस्से में अलग तरीके से आता है मानसून

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तेज हवाएं और बारिश वाले बादल जब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में पहुंचते हैं, तो ये दो हिस्सों में बंट जाते हैं। इसका एक हिस्सा अरब सागर की ओर यानी गुजरात, मुंबई, राजस्थान से होते हुए आगे बढ़ता है। वहीं, इसका दूसरा हिस्सा बंगाल की खाड़ी से पश्चिम बंगाल, बिहार होते हुए हिमालय से टकराकर गंगा के तलहटी क्षेत्रों की ओर मुड़ जाता है। इस तरीके से मानसून भारत में दस्तक देता है।

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मानसून की उत्पत्ति कैसे हुई?

मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द 'मौसिम' से हुई है, जिसका अर्थ है- ऋतु या मौसम। इसकी उत्पत्ति अरब के समुद्री व्यापारियों द्वारा की गई थी। जानकारी के लिए बता दें कि समुद्री व्यापारी समुद्र में चलने वाली हवा को मौसिम कहा करते थे, जिसे धीरे-धीरे मानसून के रूप में जाना जाने लगा।

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