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समलैंगिक रिश्ते : सभी बंदिशों से आजाद होना चाहिए प्यार

प्यार पर क्यों है पहरा? चाहें स्त्री पुरुष का प्यार हो या समलैंगिकों का, प्यार पर हर तरह की बंदिश खत्म होनी चाहिए। जानिए ऐसी महिलाओं के बारे में, जिन्होंने होमोसेक्शुअलिटी के हक में उठाई आवाज।
Editorial
Updated:- 2019-02-14, 20:05 IST

कहते हैं प्यार में किसी तरह की बंदिश नहीं होती। प्यार किसी से भी हो सकता है और कभी भी हो सकता है। लेकिन भारत में प्यार पर तमाम तरह के पहरे हैं, खास तौर पर जब बात सेक्शुअल ओरिएंटेशन की होती है। हमारे यहां पारंपरिक तौर पर सिर्फ पुरुष-महिला के प्रेम की ही स्वीकार्यता रही है। समलैंगिक रिश्तों को लेकर पहले की तुलना में माहौल में काफी बदलाव आया है। पहले समलैंगिंक संबंधों पर खुले तौर पर बात करने में भी संकोच महसूस होता था, लेकिन अब इस तरह के रिश्तों को सामाजिक मान्यता मिलने लगी है। विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट की तरफ से समलैंगिक रिश्तों को अपराध करार देने वाली धारा के हटाए जाने के बाद माहौल पहले की तुलना में काफी ज्यादा सकारात्मक हुआ है। 

सोच बदलने में लगेगा वक्त

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भारतीय समाज में प्यार को लेकर जिस तरह की सोच है, उसमें खुलापन आने और समलैंगिंक रिश्तों को सहज भाव से स्वीकार करने में अभी काफी समय लगेगा, लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि समलैंगिकता पर आक्रामक रवैया अख्तियार करने वालों में कमी आ रही है, क्योंकि ऐसे रिश्ते में शामिल कपल्स के लिए घर-परिवार का सपोर्ट बढ़ रहा है। लेस्बियन लव यानी महिला के किसी अन्य महिला के साथ संबंधों को लेकर अब उन्हें घर-परिवार से प्रताड़ना मिलने के बजाय उनकी बात सुनी जा रही है और उसे समझने का प्रयास किया जा रहा है। यह बदलाव इस बात की तरफ संकेत करता है कि आने वाले समय में समलैंगिक संबंधों को लेकर महिलाओं को किसी तरह की प्रताड़ना का शिकार नहीं होना पड़ेगा। आज वैलेंटाइन्स डे यानी प्यार के त्योहार के दिन जानते हैं ऐसी महिलाओं के बारे में, जिन्हें होमोसेक्शुल होने में किसी तरह की शर्मिंदगी नहीं है। अपनी हमसफर के साथ प्रेम संबंधों में वे पूरी तरह से खुशगवार जिंदगी बिता रही हैं-

कांटों से भरी प्यार की राह 

प्यार में चुनौतियां का सामना तो करना ही पड़ता है, लेकिन सुचंद्रा दास और श्री मुखर्जी के लिए समलैंगिंक रिश्तों की राह और भी ज्यादा मुश्किल साबित हुई। दोनों की मुलाकात फेसबुक के जरिए हुई थी। इनकी दोस्ती बढ़ी और प्यार में बदल गई, लेकिन इन्हें पता था कि इनके लिए सवाल खड़े करने वाले हर तरफ होंगे, इसीलिए इन्होंने अपने प्यार को हर किसी से राज बनाकर रखा, यहां तक कि अपने पड़ोसियों से भी। दोनों ने इस बारे में अपने परिवार वालों से बात की, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा, सुचंद्रा के परिवार वालों ने उनसे नाता ही तोड़ लिया, हालांकि श्री के घरवाले विरोध के बाद नरम पड़ गए। सुचंद्रा परिवार के कॉन्सेप्ट में यकीन रखती हैं और उन्हें बच्चों की ख्वाहिश भी है। लेस्बियन कपल्स के लिए उनका यही मशविरा है कि अपने संबंधों के बारे में खुलकर बात करने से पहले फाइनेंशियली मजबूत होना जरूरी है। 

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उर्वी शाह ने समलैंगिंक रिश्तों के लिए दिया प्लेटफॉर्म

 

 

 

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A post shared by Urvi (@urvi_shah_agm) onFeb 4, 2019 at 11:55pm PST

ज्यादातर परिवारों में अपनी मर्जी के लड़के से शादी करने के लिए महिलाओं को विरोध से गुजरना पड़ता है। इंटरकास्ट मैरिज, इंटर रिलिजन मैरिज में परिवार वालों को मनाना एक बड़ी चुनौती साबित होता है और बात जब समलैंगिंक रिश्तों की हो, तो परिवार को राजी करना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इस बात को शिद्दत से महसूस किया उर्वी शाह ने, जो स्वयं होमोसेक्शुअल नहीं हैं। उर्वी ने LGBTQ समुदाय के लिए एक एक्सक्लूसिव वेबसाइट बनाई है, जहां वे अपने लिए रिश्ते ढूंढ सकते हैं। इस तरह का काम उर्वी के लिए आसान नहीं था। उर्वी ने साल 2015 में यह वेबसाइट शिकागो में बनाई थी और इसके बाद उन्होंने अपना बिजनेस अहमदाबाद शिफ्ट कर लिया। दरअसल उर्वी ने काफी रिसर्च करने के बाद पाया कि इस समुदाय के लोगों के लिए कोई मैट्रिमोनियल वेबसाइट ही नहीं है और इसीलिए उन्होंने इस तरह की पहल की। इसके लिए उर्वी के घरवालों और दोस्तों ने उनकी काफी आलोचना की, लेकिन उर्वी ने अपना फैसला नहीं बदला। 

 'एक लड़की...' के जरिए आया नया बदलाव

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आपको Myntra का वुमन वियर वाला वो बोल्ड ऐड याद होगा, जिसमें समलैंगिक कपल रिश्ते की बात पेरेंट्स से करने के लिए तैयार हो रहा है। इस प्यारे से वीडियो के जरिए इस विषय पर बात करने को आसान बनाने की कोशिश की गई है। इस तरह के विषय जब फिल्मों में उठाए जाते हैं, तो उसमें ज्यादातर फिजिकल इंटिमेसी पर ही चर्चा होती है। लेकिन इस मामले में एक लड़की को देखा तो ऐसा फिल्म एक पॉजिटिव बदलाव था, जिसमें होमोसेक्शुअलटी को बहुत इमोशनल कहानी के जरिए दिखाया गया। इस फिल्म को लिखने वाली गजल धालीवाल स्वयं एक ट्रांसवुमन हैं, जो लड़के से लड़की बनी हैं। 

 

उबर की नई पहल

वैलेंटाइन डे पर उबर ने एक नए कैपेंन की शुरुआत की है, जिसके तहत गर्व से हार्ट इमोजी के लिए पिटीशन साइन कराया जाएगा। इसके जरिए समलैंगिक संबंधों के लिए स्वीकार्यता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। इस पहल के जरिए वैलेंटाइन्स डे को हर तरह के प्रेम संबंधों के लिए एक्सेप्टेबल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

 

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