गंगा को देव नदी कहा जाता है। भगवान शंकर ने भी गंगा नदी को अपने शीश पर स्थान दिया। हिंदू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी बताया गया है और हिंदू धर्म को मानने वाले गंगा को देवी की तरह पूजते हैं। गंगा की अराधना एकदम वैसे ही की जाती है जैसे से अन्य देवी देवताओं की होती है। ‘वराह पुराण’ की मानें तो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को देवी गंगा स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर अवतरित हुईं थीं। इस दिन को देवी गंगा के पृथ्वी पर जन्म लेने की खुशी में मनाया जाता हैं। इस दिन को गंगा दशहरा कहा गया है। इस बार गंगा दशहरा 12 जून को है। 

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Ganga Dussehra  Shubh Mahurat

गंगा दशहरा के दिन लोग गंगा नदी के तट पर जा कर उनकी पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अगर शुभ मुहूर्त में गंगा में डुबकी लगा ली जाए तो इससे सारे कष्ट और पाप धुल जाते हैं। इसलिए गंगा दशहरा के दिन गंगा मैया के भक्तों की भीड़ गंगा के तटों पर नजर आती है। इस दिन गंगा मैया की पूजा, कथा और स्नान का अलग ही महत्व है। ज्यादातर लोग इस दिन को मनाने के लिए कोलकाता के गंगा सागर, वाराणसी और हरिद्वार जाते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कि इस बार गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त क्या है। 

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Shubh Mahurat Puja Vidhi

शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि 

इस बार अगर आप गंगा दशहरा वाले दिन गंगा नदी में स्नान करना चाहती हैं तो सबसे अच्छा मुहूर्त 11 जून की रात 8:19 से शुरू होकर 12 जून शाम 6:27 तक है। आमतौर पर इस दिन लोग गंगा नदि के तट पर जाते हैं और स्नान करते हैं। गंगा में स्नान करते वक्त लोग 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः’ मंत्र का जाप करते हैं।

इसके बाद गंगा नदी के तट पर बैठ कर हवन भी करते हैं। इस दिन हवन का ही नहीं बल्कि 10 फल, 10 दीपक और 10 सेर तिल को गंगा नदी में चढ़ाने का रिवाज है। इस दिन कई लोग चीजों को दान भी करते हैं। अगर आप इस दिन दान करने की सोच रही हैं तो आपको एक चीज 10 की संख्या में दान करनी होगी। 

Ganga Dussehra Significance

गंगा दशहरा का महत्व 

हिंदू धर्म में इस दिन का बड़ा महत्व है। इस दिन से जुड़ी एक प्रचलित कथा है। कथा यह है कि राजा भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्थियों को विसर्जित करना था और इसके लिए उन्होंने गंगा नदी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के लिए विशेष तपस्या की। राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से खुश होकर गंगा मैया ब्रम्हा जी के कमंडल से निकलीं और सीधा पृथ्वी पर पहुंच गईं। गंगा की तेज धार पृथ्वी के लोग सह न पाए।

इसलिए उनकी धार को काबू करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में बांध लिया। इस तरह तपस्या के फलस्वरूप राजा भागीरथ अपने पूर्वजों की अस्थियों को जल में प्रवाहित करने में सफल रहे। ऐसा भी कहा गया है कि गंगा दशहरा के दिन से ही मौसम बदल जाता है और गर्मी कें बाद वर्षा का मौसम आ जाता है और हर जगह हरियाली फैल जाती हैं।