महिलाएं हर काम को मैनेज करने में काफी तेज़ होती हैं। घर और बाहर की पूरी जिम्मेदारी संभाल लेती हैं। रोज़ अपने आस-पास की जिंदगियों को देखें तो पाएंगे कि कितनी महिलाएं कितना कुछ संभाले हुए हैं और उसपर वो घर का बजट भी बखूबी बना लेती हैं। ये आम बात नहीं है कि छोटी-छोटी चीज़ों को ध्यान में रखने के बाद भी महिलाएं पैसे बचा भी लेती हैं। अगर बजट बनाने की बात हो रही है तो चलिए कुछ ऐसे तरीकों की बात कर लेते हैं जो इस काम को और आसान बना देगा।  

कई बार महिलाएं कुछ छोटे-छोटे बदलावों से बेहतर नतीजे पा सकती हैं। चाहें घर का बजट बनाने की बात हो या फिर किसी काम में थोड़े पैसे बचाने की कुछ खास तरीके मददगार साबित हो सकते हैं। Wealth Aware कंपनी की संस्थापक और एमडी तन्वी केजरीवाल गोयल इसी बारे में बात कर रही हैं। तन्वी ने अपनी फाइनेंशियल नुस्खों की किताब से कुछ तरीके साझा किए हैं। चलिए जानते हैं वो तरीके-  

Money and personal finance

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1. टेलिफोन/इंटरनेट बिल-  

महिलाओं को अक्सर फोन पर लंबी बातें करने की आदत होती है। पर कई महिलाएं अभी भी पुराने फोन और इंटरनेट प्लान का इस्तेमाल करती हैं। अगर आपके घर में फोन और इंटरनेट बिल 4000 तक आ रहा है तो ये भी आज के हिसाब से काफी ज्यादा है। जरूरी नहीं कि आपके पास कौन का सर्विस प्रोवाइडर हो, लेकिन सभी अब अच्छे प्लान देने लगे हैं। 200-250 रुपए प्रति माह में कई प्लान उपलब्ध होंगे। अगर आपका इससे ज्यादा का प्लान है तो एक बार अपने सर्विस प्रोवाइडर से बात कीजिए। इसमें रोमिंग, कॉल मिनट, 1.5GB फ्री डेटा प्रति दिन आदि सब कुछ उपलब्ध है। ऐसे में क्यों महंगा प्लान लिया जाए। ऐसा ही इंटरनेट के लिए भी है। अगर घर के लिए प्लान लेना है तो 500-800 रुपए प्रति माह के पैक में बेहतरीन प्लान मिल सकता है। एक बार अपने पुराने प्लान को बदलवाने के बारे में सोचें महीने भर का बिल बच सकता है।  

ऐसे में महिलाओं का बजट काफी हद तक बचत में तब्दील हो जाएगा।  

2. गिफ्ट और लग्जरी ब्रांड खरीदने का मौका- 

ऐसा यकीनन होता है कि महिलाओं को कुछ ब्रांड से प्यार हो जाए। उन्हें लगता है कि वो अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव न करें। भले ही लिपस्टिक हो या फिर कोई बैग ब्रांड होना जरूरी है। ऐसे में अगर खरीदारी करनी है तो उसका समय निर्धारित किया जा सकता है। अगर दिल्ली की बात करें तो सेल का समय जुलाई और जनवरी में होता है जब लगभग सभी ब्रांड स्टोर्स डिस्काउंट देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपनी शॉपिंग प्लान कर लें। ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स तो साल में 3-4 बार ऐसी सेल रखती हैं। ऐसे में न सिर्फ अपनी शॉपिंग बल्कि गिफ्ट भी प्लान किए जा सकते हैं।  

Money saving tips

सुनने में ये तरीका बड़ा ही साधारण सा लगेगा, लेकिन है बिलकुल सटीक। आपको पता है कि आने वाले समय में किसी के जन्मदिन, किसी की शादी वगैराह में गिफ्ट देना है। ऐसे में यकीनन उसे पहले से प्लान किया जा सकता है। ऐसे में दो फायदे होंगे। पहला डिस्काउंट में शॉपिंग हो जाएगी और दूसरा एक लिस्ट बनी रहेगी तो एक्स्ट्रा चीज़ें खरीदने से बचेंगे।  

इसी के साथ, ऑनलाइन शॉपिंग करते समय ध्यान रखें कि कहां कैशबैक, डिस्काउंट ऑफर ज्यादा मिल रहे हैं। वॉलेट, कार्ड या नेटबैंकिंग जिस भी तरीके में ज्यादा डिस्काउंट हो उसे ही चुनें।  

3. एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट- 

ये बहुत लुभावने लगते हैं। कम्प्यूटर, टीवी, फ्रिज, गाड़ी आदि खरीदते समय आपको स्कीम बताई जाती है कि 2-3 हज़ार ज्यादा देकर आप अपने अप्लायंस की मेंटेनेंस में कुछ एक्स्ट्रा करवा सकते हैं। पर क्या हर अप्लायंस के लिए ये जरूरी है? तनवी की मानें तो ये भले ही कम अमाउंट लगे, लेकिन ये होता बहुत ज्यादा है और धीरे-धीरे कर बजट बढ़ाता है। इस मेंटेनेंस के बाद भी कई बार सर्विस कॉस्ट लगती है। ऐसे में क्या किया जाए? सिर्फ वाटर प्यूरिफायर और एयर कंडीशनर ऐसे डिवाइस हैं जिनके लिए ये कॉन्ट्रैक्ट काम आ सकते हैं। बाकी के लिए सर्विस के लिए तब कॉल किया जा सकता है जब जरूरी हो। Urban Clap और house Joy जैसे एप्स काम आ सकते हैं। ये अच्छी सर्विस देते हैं और दाम भी ज्यादा नहीं हैं। इसके अलावा, वारंटी वाले गैजेट्स के लिए ऐसे कॉन्ट्रैक्ट की जरूरत नहीं होगी।  

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4. यूटिलिटी सर्विस-

जहां हर चीज़ स्मार्टफोन से जुड़ गई है वहीं किराना और दवाओं जैसे काम के लिए भी एप्स का इस्तेमाल हो सकता है। दवाओं को लिए  netmeds और pharmeasy का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये दवाओं के बिल को कम करने में मदद करेगी। इसी के साथ, किराना सामान या यूटिलिटी के लिए Amazon और Grofers जैसे एप्स बहुत अच्छा डिस्काउंट दे रहे हैं। ये कुछ तरीके साल के 50 हज़ार तक बचाने में कारगर साबित हो सकते हैं। बस करना कुछ नहीं है धीरे-धीरे ये काम निपटाना है। 

तन्वी महिलाओं की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए जो वर्कशॉप लेती हैं उसमें एक और टिप बताती हैं। अपनी हर खरीददारी का हिसाब रखा जाए। इसमें MONEFY और WALLET जैसे एप्स आपके काम के हो सकते हैं। एक एक्सल शीट भी बनाई जा सकती है जो मदद करे। ऐसे में आपका बजट सही रहेगा और अगर कहीं ज्यादा खर्च हो रहा है तो उसके बारे में भी पता चल जाएगा। इंसान खुद ही ये सोचेगा कि वहां कटौती की जा सकती है। कई बार खर्च का लेखा-जोखा न होने के कारण भी खर्च बढ़ जाता है।