बहुत सारे पेरेंट्स इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्‍चा पढ़ाई में ध्‍यान नहीं लगाता है और अच्‍छे अंक नहीं प्राप्‍त करता है। खासतौर पर जब से कोविड-19 संक्रमण के चलते घर से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई है, तब से बच्‍चों का स्‍कूल जैसी सुविधाओं के अभाव में लाख कोशिशों के बाद भी पढ़ाई से मन भटक ही जाता है। 

कुछ पेरेंट्स की यह भी शिकायत रहती है कि उनका बच्‍चा दिन-रात पढ़ाई करता है, मगर उसके नंबर अच्‍छे नहीं आते हैं। अगर मेहनत और कोशिशों के बाद भी बच्‍चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है, तो समझ जाएं कि कहीं न कहीं एकाग्रता में कमी है। इसके लिए घर के माहौल को अध्‍ययन के अनुकूल बनाने के साथ-साथ ज्‍योतिष शास्‍त्र में बताए गए कुछ आसान उपायों को अपना कर भी देखें। ऐसा करने पर बच्‍चे का मन पढ़ाई में पहले से अधिक लगेगा और उसके अंक भी अच्‍छे आएंगे। 

भोपाल के ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ शास्त्री विनोद सोनी पोद्दार हमें कुछ ऐसे ही आसान उपाय बता रहे हैं, जिन्‍हें अपना कर बच्‍चे पढ़ाई में एकाग्रता को बढ़ा सकते हैं। 

इस चौपाई का करें जाप- 

अगर बच्‍चे का मन पढ़ाई में कम लगता है और अन्‍य चीजों की ओर अधिक आकर्षित होता है तो बच्‍चों को तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस में लिखी इस चौपाई का जाप जरूर करना चाहिए-  

'गुरु गृहं गए पढ़न रघुराई, अल्‍पकाल विद्या सब पाई।।' 

भावार्थ- इस चौपाई के माध्‍यम से तुलसीदास जी कहते हैं, 'गुरु की कृपा के बिना कुछ भी प्राप्‍त करना असंभव है। गुरु की शरण में जाने से जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलता है, जैसे भगवान श्री राम के जीवन में गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने पर फैला था।'

पंडित जी कहते हैं, 'प्रति दिन यदि इस चौपाई का जाप विद्यार्थियों द्वारा 11 बार किया जाए तो विद्या ग्रहण करना सहज हो जाएगा और अध्‍ययन में मन भी लगेगा।'

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इस वास्‍तु टिप को अपनाएं 

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार बच्‍चों की स्‍टडी टेबल पर पृथ्‍वी का मानचित्र या फिर ग्‍लोब जरूर रखा होना चाहिए। पढ़ाई करते वक्‍त ध्‍यान भटकने पर यदि बच्‍चा ग्‍लोब को 1 मिनट के लिए ध्‍यान से देखता है तो उसमें एकाग्रता बढ़ती है और वह मन से पढ़ाई करने लगता है। 

कॉपी-किताब में रखें मोर पंख 

मोर पंख भगवान श्री कृष्‍ण को अति प्रिय है। शास्‍त्रों के अनुसार जब भगवान श्री कृष्‍ण का अवतरण हुआ था तब उनके अंदर 16 कलाएं थीं, मगर जब वह गुरु सांदीपनी के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने पहुंचे तो उन्‍होंने बाकी की कलाएं भी सीखीं और वो 64 कलाओं में निपुण हो गए। 

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पंडित जी कहते हैं, 'मोर पंख (घर पर ‘मोर पंख’ रखने के फायदे)श्री कृष्‍ण के साथ-साथ देवी सरस्‍वती को भी अति प्रिय है। अगर बच्‍चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है तो स्‍टडी रूम की दीवार पर एक मोर पंख जरूर लगाएं। ऐसा करने पर बच्‍चे का पढ़ाई की ओर रुझान बढ़ेगा। इतना ही नहीं, बच्‍चा अगर जिद्दी स्‍वभाव का है तो मोर पंख देखने से उसका मन, दिमाग और स्‍वभाव शांत हो जाएगा।'

मां सरस्‍वती की आराधना करें- 

मां सरस्‍वती को ज्ञान की देवी कहा गया है। बच्‍चों को देवी सरस्‍वती की रोज पूजा करनी चाहिए। साथ ही 'ॐ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्रीं मम ज्ञान देहि फट स्वाहा।।' मंत्र का 21 बार जाप करना चाहिए। इतना ही नहीं, पंडित जी कहते हैं कि हर शुक्रवार को गाय को घास और गुड़ खिलाने से भी पढ़ाई में एकाग्रता को बढ़ाया जा सकता है। 

गणेश गायत्री मंत्र का करें जाप 

सच्चे मन से हर विद्यार्थी को नियमित रूप से 11 बार गणेश गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। पंडित जी कहते हैं, 'माता सरस्‍वती ज्ञान की देवी हैं तो श्री गणेश को ज्ञान का देवता कहा गया है। इसलिए श्री गणेश को प्रसन्‍न ( श्री गणेश को प्रसन्‍न करने के उपाय) करने के लिए इस मंत्र का जाप जरूर करें। इससे बुद्धि तेज और सकारात्‍मक हो जाती है, साथ ही अध्‍ययन में अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त होते हैं।' 

गणेश गायत्री मंत्र: ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।

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मिथ 

विद्यार्थियों को लाल स्‍याही से क्‍यों नहीं लिखना चाहिए ? 

पंडित जी कहते हैं, 'लाल स्याही का प्रयोग मूल्यांकन एवं त्रुटि सुधार हेतु होता है। इसलिए इसका इस्‍तेमाल विद्यार्थियों की जगह टीचर करते हैं। वहीं आपराधिक मामलों को भी हमेशा लाल स्‍याही से ही दर्ज किया जाता है। इतना ही नहीं, जब जज किसी अपराधी को मृत्युदंड की सजा सुनाता है तो वह लाल स्‍याही से ही उसकी सजा लिखता है और बाद में निब को तोड़ देता है।' इसलिए बच्‍चों को लिखने के लिए हमेशा नीले रंग के पेन का ही इस्‍तेमाल करना चाहिए। नीले रंग का धार्मिक महत्‍व भी है और वास्‍तु में इसे विशेष तौर पर प्रगति और सकारात्मक परिवर्तन का रंग बताया गया है। इससे बौद्धिक प्रगति भी होती है। 

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