जीवन में सब कुछ भाग्य पर निर्भर नहीं करता। आपकी सोच भी जीवन को नए मोड़ देती है। तभी तो यह कहा जाता है कि अगर अच्छा सोचोगे, तो जीवन में सबकुछ अच्छा होगा। लेकिन आमतौर पर हम ऐसा करते नहीं है। जब भी जीवन में थोड़ी सी भी बुरी परिस्थिति आती है तो हम सभी निराशावादी हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ बच्चों के साथ भी होता है। दरअसल, बच्चे हमेशा अपने पैरेंट्स को देखकर ही सीखते हैं और जब आप विपरीत परिस्थितियों में नकारात्मक सोच रखती हैं तो इससे उनकी सोच भी कुछ ऐसी ही हो जाती है। हालांकि इसका हर्जाना उन्हें जीवनभर उठाना पड़ाता है। वह मुश्किलों से पॉजिटिव थिंकिंग के साथ लड़ने की जगह अपनी नकारात्मकता से खुद को तनावग्रस्त कर लेते हैं। कई बार तो यह नकारात्मकता उनके जीवन पर भी भारी पड़ जाती है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि बच्चों के भीतर बचपन से ही Positive Thinking का संचार किया जाए। अब आप यह सोच रही होंगी कि बच्चों को सकारात्मक रूप से सोचना किस तरह सिखाया जाए तो इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप कुछ आसान टिप्स को अपनाकर उन्हें जीवन को देखने का सकारात्मक दृष्टिकोण सिखा सकती हैं-

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फीलिंग एक्सप्रेस करना सिखाएं

express feeling inside

बच्चों के जीवन में सकारात्मकता लाने का सबसे आसान और महत्वपूर्ण तरीका है कि आप पहले उन्हें अपनी फीलिंग को एक्सप्रेस करना सिखाएं। फिर भले ही वह उदासी हो या खुशी, भय हो या चिंता। यह सभी व्यक्ति के मन के सामान्य भाव है और जब बच्चे अपनी फीलिंग को व्यक्त करना सीख जाता है तो इससे उनके जीवन में नकारात्मकता के लिए कोई जगह नहीं होगी। दरअसल, जब वह खुद को एक्सप्रेस करते हैं तो इसका अर्थ है कि वह अपनी समस्या को जानते हैं और उस फीलिंग को एक्सप्रेस करने के बाद उन्हें उसका हल भी मिल जाता है।

बनें रोल मॉडल

role model inside

इस बात में कोई दोराय नहीं है कि बच्चे के सबसे पहले शिक्षक उसके माता-पिता ही होते है, इसलिए आप चाहें मुंह से कुछ भी कहें, लेकिन उस बात को अपने जीवन में नहीं उतारती तो बच्चा भी उन मूल्यों को कभी नहीं अपनाएगा। इसलिए सबसे पहले आप अपने जीवन में सकारात्मकता का हाथ थामे। धीरे-धीरे बच्चा आपको देखकर ऐसा ही करने लगेगा।

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करें मोटिवेट

motivate inside

बच्चों में पॉजिटिव थिंकिंग को डेवलप करने का एक तरीका यह भी है कि आप उन्हें समय-समय पर मोटिवेट करती रहें। जब वे किसी चीज में सफल हो जाएं तो उनकी सराहना करें और अगर वे गलतियां करते हैं तो उन्हें डांटें नहीं। बल्कि उन्हें यह समझाएं कि उन्हें गलती करने से डरना नहीं है, बल्कि अपनी गलतियों से सीखना है और उसे सुधारने की कोशिश करनी है। साथ ही उन्हें बताएं कि हर गलती या बुरा वक्त भी एक अच्छी सीख देकर जाता है। इस तरह वह गलत चीजों में भी अच्छी बातें समझना सीख जाते हैं।

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सही दोस्तों का मिले साथ

right friends inside

जीवन में दोस्तों का एक खास प्रभाव होता है। इसलिए बच्चों में सकारात्मकता का संचार करने के लिए यह जरूरी है कि आप उनके दोस्तों पर भी गहरी नजर रखें। आपको यह पता होना चाहिए कि आपके बच्चे के दोस्त कैसे हैं। जब उसके आसपास पॉजिटिविटी होगी तो वह खुद भी पॉजिटिव सोचना शुरू कर देगा।

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