बजट 2019 को लेकर महिलाओं की बहुत सी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। शायद इसलिए क्योंकि पहली बार देश को खजाने की चाबी एक महिला के हाथ में है। कई समस्याओं के बीच एक सबसे अहम बात है सुरक्षा की। भारत में महिला सुरक्षा को लेकर किस तरह के हालात हैं ये किसी से छुपे हुए नहीं हैं। इस मामले में चाहें वर्किंग वुमन हो या फिर गृहणी सभी परेशान है। ईव टीजिंग से लेकर ट्रैवल की समस्या और रोज़ाना ट्रैवल करने वालों के लिए महीने का बजट बनाना भी एक समस्या बन जाती है। ओला-ऊबर तो छोड़िए मेट्रो और शेयर्ड ऑटो भी जेब पर भारी पड़ते हैं. उसपर अगर सुरक्षा भी न मिले तो महिलाओं की दिक्कत और बढ़ जाती है। 

बजट 2019 में अगर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ ठोस कदम नहीं उठाए गए तो निराश होना लाज़मी है। खास तौर पर उन महिलाओं के लिए जिन्हें रोज़ सुबह निकलकर अपने काम पर जाना होता है और वापसी में उन्हें आते-आते देर हो जाती है। सुरक्षा को लेकर ऐसी स्कीम की जरूरत है जो ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के लिए असर करे। 

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1. कामकाजी महिलाओं का रखें ध्यान:

वर्किंग वुमेन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक होता है वर्क ट्रैवल। मेट्रो शहरों में तो इससे अधिकतर महिलाएं परेशान रहती हैं। सुबह उठकर घर का काम कर लगभग भागते हुए निकलने वाली महिलाएं ट्रैवल करते हुए किसी तरह से ऑफिस पहुंचती हैं। उन्हें लोकल, मेट्रो, बस, ऑटो, या कुछ को अपने निजी वाहनों से सफर करना होता है ऐसे में अगर लगातार ट्रैवल का खर्च बढ़ता रहेगा तो क्या होगा? 

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अब यहां पर अगर ओला या ऊबर जैसी कैब सर्विस का इस्तेमाल करना हो तो ये और दिक्कत। कई बार तो ये भी समझ नहीं आता कि शेयर्ड कैब की जाए या नहीं। क्योंकि कई बार कैब में 4-5 पुरुषों के बीच एक महिला बैठी होती है। ऐसा ही शेयर्ड ऑटो और टैक्सी का हाल होता है। अगर ट्रांसपोर्ट सेफ्टी को लेकर सरकार कोई बेहतर स्कीम लेकर आती है तो ऐसे मामलों में महिलाएं ज्यादा आसानी से सफर कर पाएंगी। साथ ही, अगर सरकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे पिंक ऑटो और बस की संख्या बढ़ जाती है तो हर बात के लिए कैब करने की जरूरत खत्म हो जाएगी। ये भी सीधे तौर पर ज्यादा सुविधाजनक होगा। 

2. पब्लिक ट्रांसपोर्ट में दें थोड़ी सी रियायत:

2017 के बाद जब दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ा तो आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि 32% लोगों ने रोज़ इससे सफर करना कम किया। मतलब दिन के 3 लाख लोग। अगर इस तरह ही किराया बढ़ता रहेगा तो इसी तरह की स्थिति सामने आएगी। महिलाओं को बजट बनाने में भी समस्या होगी और इसे आगे चलकर निभाने में भी। इसी तरह 2018 की पेट्रोल की कीमतों के कारण ऑटो, टैक्सी, बस आदि का किराया बढ़ गया है। अगर सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाए तो इस तरह का किराया रखना होगा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया ज्यादा न बढ़े।

 

3. रात में सफर को बनाए आसान:

महिलाओं को लेकर अधिकतर समस्याएं रात में आती हैं। रात में अकेले सफर करना बहुत मुश्किल है और ऊपर से रात में ओला-ऊबर की सर्ज प्राइसिंग न सिर्फ जेब पर भारी पड़ती है बल्कि रात में कैब सर्विस के अलावा कोई और साधन मिलना भी मुश्किल हो जाता है। खुद ही सोचिए, अगर किसी को रात में फ्लाइट या ट्रेन पकड़नी हो तो साधन क्या होगा? ऐसे में अगर कोई स्कीम निकाली जाए जो कैब की सर्ज प्राइसिंग में रहात दे सके या ऐसा कुछ कि रात के समय ट्रैवल ज्यादा आसान बना सके ये बेहतर होगा। 

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4. मंथली पास और स्बसिडी की स्कीम:

मंथली पास भी बहुत जरूरी है जो पब्लिक ट्रैवल को ज्यादा सुरक्षित और किफायती बना सकता है। मुंबई लोकल में ये स्कीम है, लेकिन मेट्रो में नहीं। मेट्रो कार्ड से कम खर्च तो होता है, लेकिन ऐसा न जाने कितनी बार होता है कि उसमें पैसे खत्म हो गए तो बार-बार लाइन में लगकर रीचार्ज करवाना पड़े। कोई मंथली स्कीम जिसमें और भी ज्यादा सस्ता किराया हो वो पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ज्यादा किफायती बनाने में मदद कर सकती है। इससे बजट पर भी ज्यादा नुकसान नहीं होगा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ज्यादा लोग भी सफर करेंगे। अगर ये नहीं तो सरकार की तरफ से सब्सिडी ही मिल सकती है जिससे हमें ज्यादा आसानी होगी। 

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5. नाइट पेट्रोलिंग: 

मुंबई लोकल ट्रेन के महिला फर्स्ट क्लास डिब्बे में रात के समय एक पुलिस वाला रहता है। हालांकि, ये आखिरी लोकल तक नहीं रुकता, लेकिन फिर भी इससे महिलाओं को बहुत राहत होती है। ऐसा कुछ भी दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकता, चेन्नई, लखनऊ, हैदराबाद और ऐसे कई शहरों में किया जा सकता है। भोपाल जैसे शहर में भी रात के वक्त अगर कहीं निकलना पड़े तो चिंता हो जाती है ऐसे में अगर नाइट पेट्रोलिंग होती रहेगी, खास तौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट या किसी जंक्शन के पास जहां से लोगों का ज्यादा आना-जाना होता है तो वो बेहतर साबित हो सकता है। इसके लिए तो बजट में प्रावधान बनाने ही होंगे कि महिलाओं की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिए जाएं।