India UNESCO Festival: बिहार छठ पर्व यूनेस्को लिस्ट में हुआ शामिल, जानें कौन-कौन से पर्व पहले से हैं इसका हिस्सा; लिस्ट में जगह पाने के लिए क्या होती है पूरी प्रक्रिया

चार दिनों तक चलने वाला छठ त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है और सप्तमी तिथि को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है। इस त्योहार को खासतौर से बिहार में एक बड़े स्तर पर मनाया जाता है। बता दें कि हाल ही में, भारत सरकार द्वारा बिहार के महापर्व छठ पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की लिस्ट में शामिल होने वाला है, जो इस पर्व की भव्यता और दिव्यता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करेगा। इस लेख में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारत के कौन-कौन से पर्व पहले से हैं इस लिस्ट में अपनी जगह बना चुके हैं। साथ ही जानें यूनेस्कों के लिए कब और कैसे किसी फेस्टिवल को सिलेक्ट किया जाता है।
यूनेस्को लिस्ट में कौन-कौन से पर्व शामिल हैं?
यूनेस्को की लिस्ट में छठ पूजा से पहले भारत के 15 अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तत्व यूनेस्को की लिस्ट का हिस्सा बन चुके हैं। नीचे देखें त्योहारों की लिस्ट
- दुर्गा पूजा (कोलकाता) (2021)- यह पर्व अपनी विस्तृत कलाकृतियों, पंडालों और सामुदायिक भागीदारी के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- गरबा (गुजरात) (2023)- नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला यह नृत्य-रूप।
- कुंभ मेला (2017)- दुनिया का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण धार्मिक समागम।
- योग (2016)- प्राचीन भारतीय शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास।
- नवरोज (2016)- फारसी नव वर्ष का उत्सव।
- रामलीला (2008)- रामायण का पारंपरिक प्रदर्शन।
- रम्माण (2009)- गढ़वाल हिमालय का धार्मिक उत्सव और अनुष्ठान नाट्य।
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यूनेस्को में शामिल होने की क्यों है पूरी प्रक्रिया?
किसी भी त्योहार को इस लिस्ट में शामिल होने के लिए कई चरण को पार करना होता है। नीचे जानें क्या है पूरा प्रोसेस
- सबसे पहले, सदस्य देश को उस तत्व को अपनी राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची/रजिस्टर में शामिल करना होता है। भारत में, संगीत नाटक अकादमी संस्कृति मंत्रालय के नोडल कार्यालय के रूप में एक नेशनल लिस्ट बनाए रखती है।
- इसके बाद संबंधित समुदाय, समूह और विशेषज्ञों के साथ मिलकर, देश एक नामांकन फाइल तैयार करता है। इस फाइल में यह साबित किया जाता है कि वह त्योहार'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची' के मानदंडों को पूरा करता है।
- इसके तहत यह दर्शाया जाता है कि तत्व समुदाय द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित किया गया है, पहचान और निरंतरता प्रदान करता है, आपसी सम्मान को बढ़ावा देता है और इसके संरक्षण के लिए सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
- इसके बाद तैयार नामांकन फाइल को यूनेस्को के मुख्यालय में जमा किया जाता है।
- यूनेस्को की अंतर-सरकारी समिति द्वारा स्थापित एक मूल्यांकन निकाय नामांकन फाइल की समीक्षा करता है।
- इसके बाद मूल्यांकन निकाय की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए कन्वेंशन' की अंतर-सरकारी समिति अंतिम निर्णय लेती है कि उस तत्व को यूनेस्को की सूची में शामिल किया जाए या नहीं।
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