अक्सर लोग डाइनिंग टेबल, सोफे या फिर बिस्तर पर बैठकर भोजन करते हैं। हो भी क्यों न, ऐसे खाना खाने से जब आपको स्वाद के साथ आराम भी मिल रहा हो तो भला कौन पीछे रहेगा? लेकिन कभी आपने सोचा है कि शास्त्रों में इस बात का जिक्र किया गया है कि जमीन पर बैठकर भोजन करना हमेशा हमारे लिए फायदेमंद क्यों होता है?

क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि, जमीन पर बैठकर खाया गया भोजन न सिर्फ शरीर बल्कि हमारे मन मस्तिष्क को भी लाभ पहुंचा सकता है। दरअसल शास्त्रों में ऐसी न जाने कितनी बातें बताई गई हैं जिनके बारे में मंथन करना और उनकी गहराई पर जाना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन जब आप इसके बारे में सोचते हैं तब इसकी गहराई और सच्चाई कुछ अलग ही होती है। तो चलिए इस बारे में जानते हैं कि जमीन पर बैठकर खाने के बारे में क्या कहता है शास्त्र?

जमीन पर बैठकर भोजन का शास्त्रों से संबंध

eating in floor

शास्त्रों की मानें तो जब आप सीधे फर्श पर बैठकर भोजन करते हैं, तो शरीर सीधे ही पृथ्वी के संपर्क में आता है और पृथ्वी की तरंगें पैरों की उंगलियों से होकर पूरे शरीर में फ़ैल जाती हैं। ये तरंगें शरीर को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने के अलावा शरीर के स्वास्थ्य को भी सुचारु बनाए रखने में मदद करती हैं। इसी तरह जब हम जमीन पर बैठकर लकड़ी के आसन में खाना खाते हैं तो सूक्ष्म अनुपात में तेजतत्व प्रधान तरंगों की गति होती है। इन तरंगों की गति से गर्म ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह शक्ति पृथ्वी से निकलकर शरीर में प्रवेश करती है और शरीर को भी ऊर्जावान बनाने में मदद करती है। शास्त्रों की मानें तो शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाली ये तरंगें कई तरह की ऊर्जाओं को जोड़कर शरीर में एक साथ प्रवेश करती हैं और कई बीमारियों से बचाती हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार जब व्यक्ति जमीन पर बैठकर भोजन करता है तो वह सुखासन में बैठता है और इस मुद्रा में बैठकर भोजन करने से पाचन क्षमता बढ़ती है। यही नहीं  पीठ का निचला हिस्सा तथा पेट के आसपास की मांसपेशियों में भी खिंचाव आता है और पेट संबंधी बीमारियों से राहत मिलती है।

शास्त्रों के अनुसार खाने की जगह भी है महत्वपूर्ण

शास्त्रों में खाने की जगह को लेकर बताया जाता है कि भोजन का सबसे अच्छा स्थान किचन है। इसी मान्यता की वजह से पहले के समय में लोग घर की रसोई में जमीन में बैठकर भोजन करते थे। लेकिन आधुनिक समय में किचन का स्थान छोटा होने की वजह से किचन में बैठकर भोजन करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में आप किसी और कमरे में भी जमीन पर बैठकर भोजन कर सकते हैं। ध्यान में रखने वाली बात यह है कि खाना खाने की जगह हमेशा साफ़-सुथरी हो और खाना खाते समय आस-पास का वातावरण भी खुशनुमा हो। एक कहावत है कि " जैसा खाए अन्न वैसा हो मन " इसका मतलब हुआ कि हमारे द्वारा खाए हुए खाने से हमारे विचारों में भी बहुत प्रभाव पड़ता है।  

शास्त्रों के अनुसार भोजन करते समय मुख की दिशा

eating face direction

शास्त्रों में वर्णन किया गया है कि जब भी आप भोजन करते हैं तब आपके लिए दिशा भी बहुत ज्यादा मायने रखती है। यदि संभव हो तो भोजन करते समय पूर्व या पश्चिम की ओर मुंह करके ही बैठें। पूर्व दिशा अग्नि तत्व की पूरक है और शास्त्रों में भोजन को यज्ञ कर्म की तरह बताया गया है। जब यह यज्ञकर्म पूर्व दिशा में तेज की ऊर्जा की मदद से शरीर में फैलता है, तो यह खाना भोजन के पाचन की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है। भोजन करते समय कभी भी दक्षिण दिशा में मुंह करके नहीं बैठना चाहिए। दक्षिण दिशा में यम तरंगों की प्रधानता होने के कारण रज-तम-प्रधान तरंगों के अशुद्ध क्षेत्र में बैठकर भोजन को दूषित नहीं करना चाहिए। चूंकि यम तरंगों से युक्त भोजन करने पर असंतुष्ट आत्माओं को कष्ट होने की संभावना रहती है, इसलिए यह नियम है कि हमें दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके भोजन नहीं करना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार पैरों को धोकर खाने बैठें

शास्त्रों में जिक्र है कि खाने के लिए बैठने से पहले, चेहरा, हाथ और पैर धो लें। खासतौर पर तीन बार पानी से मुंह धोकर भीगे पैरों के साथ बैठ भोजन के लिए बैठ जाएं। खाना खाते समय चेहरा, हाथ और पैर गीले होने चाहिए, क्योंकि इससे जीवन काल बढ़ता है। स्वास्थ्य के लिए भी देखा जाए तो खाना खाने से पहले चेहरा, हाथ और पैर धोने से उन पर लगे धूल के कणों को हटाने में मदद मिलती है जिससे भोजन में शुद्धता बनी रहती है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

जमीन पर बैठकर खाना खाने के बारे में हमने Life Coach and Astrologer Sheetal Shaparia से बात की उन्होंने हमें बताया कि फर्श पर बैठकर खाना खाते समय पैरों को क्रॉस करके बैठना एक पुरानी भारतीय परंपरा है जो अभी भी मौजूद है और कुछ लोगों द्वारा आज भी इसका पालन किया जाता है। हालांकि बदलते परिवेश के साथ अब हम टेबल और कुर्सी में खाना खाना पसंद करने लगे हैं। यह निश्चित रूप से अधिक आरामदायक है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। जमीन पर बैठकर खाने के बहुत सारे फायदे हैं और यह हमारे स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचा सकते हैं।

digestion eating at floor

पाचन में सुधार - पैरों को क्रॉस करके फर्श पर बैठना सुखासन के रूप में जाना जाने वाला एक योगासन है जो भोजन के आसान पाचन में मदद करता है। जब आप अपनी प्लेट को जमीन पर रखते हैं और खाने के लिए थोड़ा आगे बढ़ते हैं और अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाते हैं, तो यह पेट के एसिड के स्राव को बढ़ाने में मदद करता है जिससे भोजन पचता है।

वजन कम करना- जब आप फर्श पर बैठते हैं तो आपका दिमाग अपने आप शांत हो जाता है और अपने खाने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह स्थिति आपके शरीर में गति को भी बढ़ाती है और आपको तेजी से पूर्ण महसूस करने में मदद करती है। इस पैटर्न का नियमित रूप से पालन करने से आपको वजन कम करने में मदद मिलती है क्योंकि यह आपको अधिक खाने से रोकने में मदद करता है।

तनाव होता है दूर- पद्मासन और सुखासन ध्यान के लिए आदर्श स्थिति हैं और दोनों ही मन से तनाव को दूर करने में सहायता करते हैं। इसलिए, जमीन पर बैठकर खाने से आपको अपने मन को शांत करने में मदद मिलेगी और आपका शरीर सभी पोषण को स्वीकार करेगा।

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रक्त संचार बढ़ाता है- जब हम खाते हैं तो हमारे पेट को भोजन को पचाने के लिए जितनी ऊर्जा खर्च होती है, उतनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसके कारण कुछ लोगों को भोजन करते समय गर्मी का एहसास और पसीना आ सकता है। फर्श पर बैठने से हृदय को परिसंचरण का लाभ मिलता है क्योंकि रक्त को हृदय के माध्यम से पाचन के लिए आवश्यक सभी अंगों तक आसानी से पहुँचाया जाता है।

शरीर की मुद्रा में सुधार- जमीन पर सुखासन में बैठने से आपकी मांसपेशियों को राहत देने और अच्छी मुद्रा बनाए रखने में मदद मिलती है। बिना किसी सहारे के उठने की कला का अभ्यास करने से आपके शरीर को ताकत मिलती है और आपको लचीलापन भी महसूस होता है।

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डाइट एक्सपर्ट की राय

डाइट एक्सपर्ट प्रीती त्यागी बताती हैं कि खाते समय अपनी थाली को जमीन पर रखें और खाने के लिए अपने शरीर को थोड़ा आगे की ओर ले जाएं और वापस अपनी मूल स्थिति में आ जाएं। बार-बार थोड़ा सा झुकने की इस क्रिया से पेट की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं, जिससे पेट के एसिड का स्राव बढ़ जाता है और भोजन तेजी से पचता है। उठने-बैठने से शरीर की गति बढ़ती है। इस तरह यह आपको जल्दी भरा हुआ महसूस करने में भी मदद करता है। कुर्सी पर बैठने के बजाय खाने के लिए एक चटाई बिछाएं, अपने पैरों को क्रॉस करें और अपनी पीठ को सीधा रखें। यह आपकी अधिक खाने से भी रोकता है, और एक व्यक्ति को भोजन करने के बाद भी खुश और ऊर्जावान महसूस कराता है।

इस तरह जब भी आप जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तब ये आपके शरीर के साथ आपको मानसिक संतुष्टि भी प्रदान करता है। इसलिए शास्त्रों की बात को मानते हुए हमें इसी मुद्रा में भोजन करना चाहिए।

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