घर में कब करें नए मंदिर की स्थापना

घर में नए मंदिर की स्‍थापना करने जा रहे हैं, तो पहले पढ़ लें ये जरूरी नियम। 

where  to  put  mandir  at  home
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हिंदू परिवारों में घर में मंदिर होने का अलग ही महत्व होता है। लोग अपनी-अपनी आस्था के मुताबिक घर में तरह-तरह के मंदिर बनवाते हैं। मगर क्‍या आपने कभी इस विषय में सोचा है कि घर में मंदिर की स्थापना करने के नियम क्या हैं? दरअसल, जब हम नया घर बनवाते हैं, तो वहां रहने से पहले गृह प्रवेश की पूजा करवाते हैं। जब नई कार लेते हैं, तो उसकी भी पहले पूजा होती है। वहीं जब कोई नई दुकान या मकान बनता है, तो हिंदू धर्म में पहले नींव रखी जाती है और भूमि पूजन होता है।

इन सभी के लिए शुभ दिन और मुहूर्त का चुनाव होता है। ऐसे में हम जब घर में मंदिर की स्थापना करते हैं, तब भी कुछ नियमों का पालन करना जरूरी हो जाता है। खासतौर पर इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है कि मंदिर की स्थापना कब की जाए।

आमतौर पर लोग इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं, मगर हमने इस विषय पर भोपाल के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य विनोद सोनी जी से बात की और जाना कि मंदिर की स्थापना कब और कैसे की जाती है।

pooja  room  right  direction

कब करें मंदिर की स्‍थापना

  • मंदिर की स्थापना करने के लिए सबसे अच्‍छे हिंदी महीने चैत्र, फाल्गुन, वैशाख, माघ, ज्‍येष्‍ठ, सावन और कार्तिक होते हैं। इन सभी महीनों में आप अपने घर में मंदिर(घर के मंदिर के लिए नियम) की स्थापना कर सकते हैं।
  • मंदिर की घर में स्थापना करने के लिए केवल महीने ही नहीं बल्कि दिन का भी महत्व है। आप सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन घर में मंदिर की स्थापना कर सकते हैं। केवल मंगलवार, शनिवार और रविवार के दिन आपको घर में मंदिर की स्थापना नहीं करनी चाहिए।
  • इसके अलावा घर में मंदिर की स्थापना हमेशा अभिजीत मुहूर्त में ही करनी चाहिए। कभी भी सुबह या रात के समय नए मंदिर को घर में स्थापित नहीं करना चाहिए ।
  • मंदिर की स्थापना के लिए आप नवरात्रि, रामनवमी, जन्माष्टमी, सावन, दिवाली आदि त्योहारों को भी चुन सकते हैं।
  • इतना ही नहीं आपको मंदिर की स्थापना के दिन शुभ नक्षत्र का भी ध्यान रखना चाहिए। मंदिर की स्थापना के लिए पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा आषाढ़, रेवती, रोहिणी, अश्विनी, श्रवण और पुनर्वसु नक्षत्र सबसे शुभ माने गए हैं।
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घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए?

  • घर में मंदिर की स्थापना वास्तु के हिसाब से ब्रह्म स्थान पर होनी चाहिए। ब्रह्म स्थान घर के केंद्र में होता है। इसके अलावा आप घर के ईशान कोण में भी मंदिर की स्थापना कर सकते हैं। आपको बता दें कि घर की उत्तर-पूर्व दिशा को ही ईशान कोण कहा गया है। इस दिशा के कोने में आपको मंदिर रखना चाहिए।
  • मंदिर को कभी भी दक्षिण और पूर्व दिशा में स्थापित नहीं करना चाहिए। जब भी आप पूजा करें तो आपका मुंह पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • इस बात को भी सुनिश्चित करें कि जहां पर आपने मंदिर की स्‍थापित की है वहां भरपूर रोशनी आती हो। अगर पूजा घर ( पूजा घर वास्‍तु नियम) में सूर्य की किरणें आती हैं, तो यह और भी ज्यादा शुभ होता है।

मंदिर में कब करें मूर्ति की स्थापना

  • घर के मंदिर में आप किसी भी दिन मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं, मगर मंगलवार के दिन आपको इस कार्य से बचना चाहिए। आप शनिवार के दिन शनिदेव और हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं, नवरात्रि में देवी दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं। बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को घर के मंदिर में स्थापित कर सकते हैं। वहीं दिवाली में देवी लक्ष्‍मी, कुबेर की मूर्ति की स्थापना की जा सकती है।
  • किसी भी देवी या देवता की मूर्ति स्थापित करने से पूर्व भी आपको पंडित जी से शुभ मुहूर्त निकलवाना चाहिए।
  • मलमास के महीने में न तो मंदिर की स्थापना करने और न ही मूर्ति को घर के मंदिर में स्थापित करें।
  • जब गुरु या शुक्र अस्त हों या फिर चंद्र निर्बल हो, तब भी आपको घर में मंदिर या घर के मंदिर में मूर्ति की स्थापना से बचना चाहिए।

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Iamge Credit: Shutterstock

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