बुलंद हौसलों और कुछ कर गुजरने की चाह लोगों की न जाने कहाँ पहुंचा सकती है। किसी भी उम्र में बड़ी सी बसी उपलब्धि हासिल करना कोई असंभव बात नहीं है। अगर व्यक्ति ठान ले तो वो किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है महाराष्ट्र के नागपुर की 11 साल की छोटी से लड़की रूचा चांदोरकर ने।

11 वर्षीय इस लड़की ने हाल ही में खुद को पृथ्वी के सबसे ज्यादा आई क्यू होने का दर्जा हासिल किया है। उन्हें दुनिया के शीर्ष 1% बुद्धिमान लोगों में स्थान दिया गया है। यह माप दंड मेन्सा सोसाइटी का है जो दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे पुरानी उच्च आईक्यू सोसाइटी है। आइए जानें कौन है 11 साल की ये लड़की और क्या है उसकी उपलब्धियों की कहानी।

आइंस्टीन से भी है आगे है रूचा चांदोरकर का आई क्यू लेवल

यह व्यापक रूप से माना जाता है कि अल्बर्ट आइंस्टीन का आईक्यू 160 था। आइंस्टीन के आईक्यू लेवल की पीछे छिड़ते हुए मेन्सा के आई क्यू टेस्ट में रूचा चांदोरकर ने 162 का स्कोर हासिल किया है और इस स्कोर के साथ वो आईक्यू टेस्ट में दुनिया के सबसे ज्यादा हाई स्कोर वाली लड़की बन गयी हैं। इसके साथ ही रुचा ने अपने बड़े भाई अखिलेश को भी इस स्कोर में पीछे छोड़ दिया है। आपको बता दें कि रुचा के बड़े भाई ने साल 2016 में उसी टेस्ट में 160 रन बनाए थे और ये अब तक का सबसे बड़ा स्कोर था जिसे रुचा ने पीछे छोड़ दिया है। हालांकि कई अन्य युवाओं ने पहले भी मेन्सा के इस टेस्ट को क्रैक किया है, लेकिन भारतीय मूल के भाई-बहनों की इस तरह के असाधारण उच्च अंक प्राप्त करने की कोई रिपोर्ट नहीं है। इसलिए वास्तव में यह न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे सेष के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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रुचा चांदोरकर का आईक्यू लेवल क्या है

rucha chaandorkar score

अल्बर्ट आइंस्टीन के 160 आईक्यू के स्कोर को 11 वर्षीय महाराष्ट्रीयन लड़की रुचा चांदोरकर ने पीछे छोड़ दिया है, जो नागपुर में रहती है और मेन्सा आईक्यू टेस्ट में 162 अंक हासिल किए हैं। मेन्सा सोसाइटी ह्यूमन आईक्यू की पहचान करती  है और उसे बढ़ावा देता है। दुनिया भर में फैला यह संगठन IQ द्वारा अपनी सदस्यता को जनसंख्या के शीर्ष 2 प्रतिशत तक सीमित रखता है। पिछले हफ्ते मेन्सा के इस टेस्ट का रिजल्ट आया और उसमें रुचा ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की।  रुचा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को इंटरव्यू देते हुए कहा कि  "मैं 130 या फिर उससे थोड़े ज्यादा की उम्मीद कर रही थी लेकिन जब मैंने 162 को देखा, तो मैं बहुत खुश हुई। "

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चांदोरकर परिवार के लिए नहीं है ये पहला मौका

मेन्सा आईक्यू इस परिवार के लिए कोई नई बात नहीं है, उनके भाई अखिलेश ने 2016 में मेन्सा आईक्यू टेस्ट में 160 स्कोर करने में कामयाबी हासिल की थी। उस समय, परिवार नागपुर में रहता था, लेकिन हाल ही में स्कॉटलैंड में आ गया, जहां उनके माता-पिता, ऋत्विक और सोनाली ने अपने शुरुआती प्रोफेशनल साल आईटी क्षेत्र में बिताए थे। एक मीडिया इंटरव्यू में रुचा ने बताया कि "भैया ने मेन्सा में 160 रन बनाए और उन्होंने मीडिया के साथ बहुत सारे इंटरव्यू में हिस्सा लिया, इसलिए मुझे लगता था कि जब मैं 11 साल की हो जाउंगी, तो मैं भी परीक्षा के लिए उपस्थित होंगी। सितंबर के अंतिम सप्ताह में घोषित परिणाम निश्चित रूप से चौंकाने वाले थे। रुचा के माता -पिता ऋत्विक और सोनाली, दोनों आईटी पृष्ठभूमि से हैं, इसमें कोई संदेह नहीं था कि रुचा एक प्रतिभाशाली बच्ची हैं। उसके पैरेंट्स बताते हैं कि "हम इन संकेतों को लेने में सक्षम थे क्योंकि वह ऐसी चीजें कर रही थीं जो उनकी उम्र से परे थीं। पहेलियों को सुलझाना, शिक्षाविदों के लिए पहेलियों को सुलझाना, रुचा ने हमेशा एक शानदार स्ट्रीक प्रदर्शित की है।

मेन्सा सोसाइटी क्या है

what is mensa

मेन्सा सोसाइटी का गठन 1946 में ऑक्सफोर्ड में रोलाण्ड बैरल और ऑस्ट्रेलियाई बैरिस्टर और डॉक्टर लेंस वॉर साइंटिस्ट द्वारा किया गया था और निचले संगठन को दुनिया भर में फैलाया गया है। इसकी सदस्यता IQ द्वारा आबादी के शीर्ष 2% तक सीमित है। मेन्सा के दुनिया भर के लगभग 100 देशों में सभी उम्र के सदस्य हैं। या सोसाइटी अपने सदस्यों को सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक बातचीत के लिए विविध और रोमांचक अवसर प्रदान करती है।

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वास्तव में एक छोटी सी बच्ची की इतनी बड़ी उपलब्धि काबिल ए तारीफ़ है और हम सभी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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