World Kidney Day: किडनी डिजीज और ग्लूकोमा से बचाव का सबसे आसान तरीका क्या है? डॉक्टर से जानें

कई बीमारियां ऐसी होती हैं जो शुरुआत में बिना किसी खास लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। किडनी की बीमारी और ग्लूकोमा भी ऐसी ही दो समस्याएं हैं। अगर इनका समय पर पता न चले तो ये किडनी फेल होने या आंखों की रोशनी जाने जैसी कंडीशन पैदा कर सकती हैं। इसलिए इन बीमारियों को रोकने में जल्दी चेकअप महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर इस विषय पर जानकारी डॉ. शालिनी सिंह दे रही हैं, जो Ampath में डायरेक्टर, लैब ऑपरेशंस हैं।
किडनी की बीमारी साइलेंट डिजीज क्यों कहलाती है?
किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट डिजीज कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण तब दिखाई देते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। दुनिया भर में लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें पता ही नहीं होता कि उनकी किडनी धीरे-धीरे कमजोर हो रही है।

किडनी की बीमारी के कारण
कुछ कारण जो किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं-
- डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- मोटापा
- खराब लाइफस्टाइल
किडनी की चेकअप के लिए जरूरी टेस्ट
किडनी की चेकअप के लिए डॉक्टर कुछ आसान टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, जैसे-
- ब्लड टेस्ट (क्रिएटिनिन लेवल)
- eGFR टेस्ट
- यूरिन टेस्ट (प्रोटीन की चेकअप)
अगर बीमारी शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो दवाइयों और लाइफस्टाइल बदलाव से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
आंखों की रोशनी चुरा लेने वाली बीमारी ग्लूकोमा क्यों होती है?
ग्लूकोमा एक ऐसी आंखों की बीमारी है जो धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। यह नर्व आंखों से दिमाग तक देखने की जानकारी पहुंचाती है।
इस बीमारी में अक्सर आंखों के अंदर प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होने लगती है। समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके कोई खास लक्षण नहीं होते, इसलिए कई लोगों को इसका पता तब चलता है जब नजर कमजोर हो चुकी होती है।

ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए जरूरी चेकअप
- आई प्रेशर टेस्ट (Intraocular Pressure)
- ऑप्टिक नर्व चेकअप
- आंखों का रेगुलर चेकअप
जल्दी चेकअप सबसे बड़ा बचाव क्यों है?
आजकल मेडिकल टेक्नोलॉजी की मदद से डॉक्टर बीमारी के शुरुआती संकेत बहुत पहले पहचान सकते हैं। लैब टेस्ट, स्कैन और नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग से शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को भी समय रहते पकड़ा जा सकता है।
जल्दी चेकअप के फायदे
- बीमारी को शुरुआती स्टेज में पहचानना
- समय पर इलाज शुरू करना
- बीमारी को बढ़ने से रोकना
- लंबे समय तक हेल्दी जीवन जीना
भारत में खतरा क्यों बढ़ रहा है?
भारत में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे लाइफस्टाइल रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी वजह से किडनी रोग और ग्लूकोमा का खतरा भी बढ़ रहा है। जिन लोगों को ये समस्याएं हैं या परिवार में इन बीमारियों का इतिहास है, उन्हें नियमित हेल्थ चेक-अप और डायग्नोस्टिक टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।

जागरूकता और रेगुलर चेकअप है जरूरी
आज के समय में डायग्नोस्टिक लैब और हेल्थकेयर सेंटर लोगों को सही और समय पर चेकअप की सुविधा दे रहे हैं। साथ ही वर्ल्ड किडनी डे और वर्ल्ड ग्लूकोमा डे जैसे मौके लोगों को हेल्थ चेकअप के लिए जागरूक करने में मदद करते हैं।
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समय पर चेकअप सिर्फ बीमारी पकड़ने के लिए नहीं होती, बल्कि यह लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक और मजबूत बनाती है। किडनी की बीमारी और ग्लूकोमा जैसी समस्याओं में जल्दी चेकअप से किडनी की कार्यक्षमता बचाई जा सकती है और आंखों की रोशनी सुरक्षित रखी जा सकती है। इसलिए याद रखें कि रेगुलर हेल्थ चेक-अप ही हेल्दी और सुरक्षित भविष्य की पहली सीढ़ी है।
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