फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से पहले रखें इन 5 बातों का ध्यान, आगे चलकर नहीं होगी परेशानी

हर महिला के लिए मां बनना खास और इमोशनल एक्सपीरियंस होता है। इस खूबसूरत सफर की शुरुआत बच्चे के आने के बाद नहीं, बल्कि उस दिन से शुरू हो जाती है जब महिला प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई या फर्टिलिटी जर्नी शुरू करती है। यह वह समय होता है जब शरीर में कई बदलाव आते हैं और दिमाग भी सवालों से भर जाता है। यह सवाल बहुत आम हैं कि क्या मैं तैयार हूं? क्या यह सही समय है? क्या इससे मेरी लाइफस्टाइल पर असर पड़ेगा?
मां बनने का फैसला खास और पूरी तरह से निजी होता है। क्योंकि, इस समय आप सिर्फ परिवार बढ़ाने के बारे में नहीं, बल्कि एक नई दुनिया की तरफ कदम बढ़ा रहे होते हैं। ऐसे में कई बार फिजिकल और मेंटल परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है जिसका असर फर्टिलिटी पर पड़ता है। फर्टिलिटी पर नेगेटिव असर पड़ने की वजह से नेचुरल तरह से प्रेग्नेंट होना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई लोग IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं। आज के समय में माता-पिता बनने के इच्छुक कपल्स के पास कई ऑप्शन्स हैं। हालांकि, इन ऑप्शन्स के बीच क्या उनके लिए सही है और क्या नहीं, यह समझना मुश्किल हो जाता है।
फर्टिलिटी जर्नी शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस बारें में इस आर्टिकल में डॉ. लक्ष्मी चिरुममिल्ला ने बताया है। डॉ. लक्ष्मी चिरुममिल्ला, तेलांगना और आंध्र प्रदेश के ART फर्टिलिटी क्लिनिक्स की मेडिकल डायरेक्टर हैं।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लेने से पहले किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
डॉ. लक्ष्मी चिरुममिल्ला का मानना है कि प्रेग्नेंसी से पहले यानी फर्टिलिटी जर्नी की तरफ सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। साथ ही ऐसी कुछ बुनियादी बाते हैं, जिन्हें समझना आपके सफर को आसान बना सकता है।
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अपनी रिप्रोडक्टिव हेल्थ को समझें
ट्रीटमेंट के ऑप्शन्स खोजने से पहले अपने फर्टिलिटी प्रोफाइल को अच्छी तरह से समझना जरूरी है। इसके लिए हॉर्मोन प्रोफाइल, सीमेन टेस्ट, ओवेरियन रिजर्व की जांच और अन्य से आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि कहां से शुरुआत कर रहे हैं। टेस्ट से PCO, स्पर्म काउंट और हार्मोनल इम्बैलेंस जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
भारत के एक नामी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट का ऐसा मानना है कि बहुत से जोड़े देर होने के बाद जांच करवाते हैं, लेकिन अगर समय पर समस्या सामने आ जाए तो सही इलाज और बेहतर इलाज हो सकता है। वह आगे कहते हैं कि पूरी सिचुएशन पर फोकस करना जरूरी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर आप शुरुआत में ही अपनी समस्या पहचान जाते हैं तो ज्यादा समझदारी के साथ फैसला ले सकते हैं।
भावनात्मक रूप से भी तैयार रहना जरूरी
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट एक मेडिकल प्रोसेस नहीं है, यह एक इमोशनल जर्नी भी है। इस जर्नी में उतार-चढ़ाव, अनिश्चितता और इंतजार भी शामिल है। ऐसे में अपने पार्टनर से खुलकर बात करें, मदद मांगने में किसी तरह की शर्म न करें और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग भी लें। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब दिल और दिमाग तैयार होगा तब ही शरीर भी बेहतर तरह से काम करता है।
लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव डालते हैं बड़ा असर
आपकी रिप्रोडक्टिव हेल्थ पूरी तरह से लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है। महिला ही नहीं, पुरुष की बुरी आदतें भी फर्टिलिटी पर असर डालती हैं। अगर आप धूम्रपान करते हैं, कम सोते हैं, गलत खाते हैं, बहुत ज्यादा कॉफी पीते हैं या बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं तो इसका फर्टिलिटी पर नेगेटिव असर देखने को मिल सकता है। अगर आप प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई करने से 3 से लेकर 6 महीने पहले से लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करते हैं तो सक्सेस के चांस बढ़ सकते हैं।
लाइफस्टाइल में बदलाव के लिए आपको बस बैलेंस्ड और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर भोजन करना है। रेगुलर एक्सरसाइज करना है, शराब और कैफीन को लिमिट में लेना है और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन करना है। ये साधारण से दिखने वाले बदलाव आपकी फर्टिलिटी में बड़ा अंतर ला सकते हैं।
सही क्लिनिक और टीम का चुनाव
हर फर्टिलिटी क्लीनिक एक जैसी गाइडलाइंस फॉलो नहीं करता है। कई बार बिना पूरी जांच के कई क्लिनिक्स डोनर साइकिल और स्टैंडर्ड टैक्निक्स को बढ़ा देते हैं। लेकिन, सही क्लिनिक वह होता है व्यक्तिगत थेरेपी दे और आपकी जरुरत को समझने वाली टीम दे।
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मानसिक और आर्थिक तौर पर रहें तैयार
इनफर्टिलिटी का ट्रीटमेंट कोई एक बार की चीज नहीं है। इसमें आपकी मेडिकल हिस्ट्री और आपने कौन-सा ट्रीटमेंट चुना है उस पर बेस्ड कई साइकिल लगते हैं। ऐसे में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले आर्थिक और मानसिक रूप से तैयार होना जरूरी होता है। ऐसे में अपने ट्रीटमेंट को प्लान करें और समझें कि आप कैसे खर्च उठा सकते हैं।
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- फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए?
- फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव लाना सबसे जरूरी है। इसके लिए बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और स्ट्रेस कम करना जरूरी माना जाता है।
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