अवसाद का पहला स्टेज हो सकता है 'बर्नआउट', शुरुआती संकेतों को न करें नजअंदाज

क्या आप आफिस में काम के दौरान अचानक सु्न्न हो जाते हैं, या फिर कुछ करने की इच्छा कम हो जाती है? क्या आपको हमेशा थकान महसूस होती है? ये लक्षण आम तनाव के लगते हैं, लेकिन भविष्य में ये गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ महसूस करती हैं तो एक्सपर्ट से जानें, क्या होता है बर्नआउट और कैसे इसे बढ़ने से रोकें?
अवसाद का पहला स्टेज 'बर्नआउट'
लंबे समय तक मानसिक या शारीरिक तनाव दिमाग और मन में दबाकर रखने से बर्नआउट जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। इसे तुरंत समझा ना गया तो यह आपको गंभीर अवसाद की ओर ले जा सकता है। आप सोच रही होंगे कि डिप्रेशन और बर्नआउट में अंतर क्या है, दोनों में ही तनाव और बेचैनी होती है, लेकिन डिप्रेशन एक मानसिक विकार है और बर्नआउट, अस्थाई मानसिक स्थिति। इस मानसिक स्थिति के बारे में ज्यादातर लोगों को आज भी जानकारी नहीं हैं। दरअसल, बर्नआउट डिप्रेशन का शुरुआती फेज है, जिसे समय रहते अगर मैनेज कर लिया जाए तो मेंटल हेल्थ सही रहती है।
क्या है 'बर्नआउट'?
जब आपको अपने आस-पास की हर चीजें नकारात्मक लगने लगे, रोजाना छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ने लगे, कुछ भी करने की इच्छा खत्म होने लगे और आपको चुपचाप रहने का मन करे, तो यह सही नहीं है। इन सब चीजों को मन में दबा-दबाकर जब आप थक जाएं और फिर एक दिन अचानक से ज्वालामुखी बनकर फट जाएं, उस स्थिति को बर्नआउट कहते हैं। हालांकि, बर्नआउट होना कई बार अच्छा माना जाता है क्योंकि अंदर का गुस्सा निकल जाता है, लेकिन एक बार में नहीं होना चाहिए, बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके अपने तनाव को बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए। भागती-दौड़ती इस जिंदगी में लाखों लोग अपने पुराने तनाव को साथ लेकर चलते रहते हैं। ये तनाव एक दिन में इकट्ठा नहीं होते, बल्कि सालों साल उनके भीतर जमा बातों का नतीजा होते हैं।
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'बर्नआउट' के क्या लक्षण होते हैं?
- बर्नआउट के लक्षण आमतौर पर तीन मुख्य पहलुओं में दिखते हैं, थकावट, निराशा और काम करने इच्छा का खत्म हो जाना। ये लक्षण शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से नजर आ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बर्नआउट को एक व्यावसायिक घटना माना गया है। संगठन के मुताबिक दिनचर्या में बदलाव, वर्क लाइफ बैलेंस करने से बर्नआउट जैसी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
- लंबे समय तक तनाव में रहने से व्यक्ति शारीरिक रूप से अस्वस्थ्य होने लगता है। स्ट्रोक, माइग्रेन, मांसपेशियों में दर्द, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां शरीर में घर करने लगती हैं। इंटरनेशनल जर्नल आफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में छपी एक रिसर्च में देखा गया कि जब भी किसी को तनाव हो तो उसे लंबी और गहरी सांस लेने का अभ्यास करना चाहिए। यही नहीं, तनाव को ट्रिगर करने वाली चीजों से सावधान रहें। इसके अलावा शारीरिक गतिविधियां जैसे व्यायाम या दौड़ लगाना तनाव के स्तर को कम करती हैं।
अपनाएं ये छोटी आदतें
- वर्क-लाइफ बैलेंस करें।
- नकारात्मक सोच और लोगों से दूर रहें।
- जीवन में प्राथमिकताएं तय करें और उसके हिसाब चलें।
- रात को सोने से पहले रोजमर्रा के कामों की एक लिस्ट बना लें।
- भविष्य में करने वाले बड़े कामों का रिमाइंडर लगाएं।
- छोटी-छोटी बातों को लेट गो करना सीखें।
- जर्नल या डायरी लिखकर मन हल्का करें।
- किसी से बात करके तनाव कम कर सकते हैं।
- प्रकृति के साथ समय बिताएं और हेल्दी डाइट लें।
- अच्छी किताबें पढ़ें और संगीत सुनें।
- खुद को रिलैक्स करें। मेडिटेशन इसमें अहम भूमिका निभाता है।
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एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आपको बर्नआउट के संकेत महसूस हो रहे हैं, तो इस पर तुरंत ध्यान दें । हरजिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको यह अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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