Fri Sep 11, 2026 | Updated 10:11 PM IST

तनाव और एंग्जायटी से चाहिए राहत? रोज करें Box Breathing, मिनटों में मिलेगा सुकून

तनाव भले ही खुद में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह कई बीमारियों की जड़ बन सकती है। स्ट्रेस का असर हमारी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर होता है। तनाव और एंग्जायटी को कम करने में Box Breathing मदद कर सकती है।
Updated:- 2026-05-17, 11:47 IST
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स्ट्रेस, डिप्रेशन, नींद न आना, हाई बीपी, मेंटल हेल्थ से जुड़ी इन दिक्कतों को दूर करने में बाक्स ब्रीदिंग मदद कर सकती है। यह एक ऐसी सरल और प्रभावी सांसों की प्रक्रिया है, जिसे आप डेली रूटीन में आसानी से शामिल कर सकती है व्यस्त दिनचर्या में आसानी से शामिल हो सकती है। एक्सपर्ट से इसके फायदे और इसे करने के तरीके के बारे में जानते हैं। इस बारे में योगा एक्सपर्ट सौरभ बोथरा जानकारी दे रहे हैं।

बाक्स ब्रीदिंग क्या है?

breathing for strss

डीप ब्रीदिंग के बारे में तो हम सबने सुना है, इस प्रक्रिया के दौरान धीमी गति से सांसे ली जाती है। कुछ समय के अभ्यास के बाद आपको ऐसे ही सांस लेने की आदत पड़ जाती है। ठीक वैसे ही बाक्स ब्रीदिंग या स्क्वेयर ब्रीदिंग सांसों की एक ऐसी सरल प्रक्रिया है, जो हमें हेल्दी जीवन का वरदान दे सकती है। आप इस तकनीक का उपयोग रोजाना सुबह या शाम कर सकते हैं।

चार-चार-चार का पैटर्न

अगर आप शुरुआत कर रही हैं, तो आपके लिए 4-4-4 का पैटर्न सही है। इस प्रक्रिया में पहले नाक से धीरे-धीरे सांस अंदर ली जाती है और पेट फूलने लगता है। आप चाहें तो अपने हाथों को पेट पर रखकर इसका एहसास कर सकते हैं। चार सेकेंड तक सांसों को अंदर भरकर रखें और फिर चार तक गिनें और सांसे रोककर रखें। फिर धीरे-धीरे मुंह से सांस निकालें और मन में 4 की गिनती करें। इसी तरह इस प्रक्रिया को दोहराते रहें।

चार-सात-आठ प्रक्रिया

यह सांसों की एक और प्रक्रिया है, जहां चार तक गिनकर सांस अंदर भरी जाती है, 7 तक गिनकर सांसों को अंदर रोककर रखा जाता है और फिर 8 तक गिनकर उसे मुंह से बाहर निकाल देते हैं। इस प्रक्रिया को आप 5 मिनट तक करते रहें। इससे शारीरिक लाभ के साथ मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। आपका नर्वस सिस्टम सही रहता है और नींद अच्छी आती है।

बाक्स ब्रीदिंग के फायदे

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  • बाक्स ब्रीदिंग से तंत्रिका तंत्र नियंत्रित होती है।
  • तनाव, चिंता, अवसाद और अनिद्रा की समस्याएं दूर होती हैं।
  • शरीर में दर्द कम होता है, रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है।
  • शरीर के प्रत्येक अंगों तक आक्सीजन पहुंचता है।
  • फेफड़ें मजबूत होते हैं और नर्वस सिस्टम सही से चलता है।
  • रोजाना अभ्यास से शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है।

किन बातों का रखें ध्यान?

  • इस प्रक्रिया को करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखें।
  • क्रिया के दौरान जीभ मुंह की छत पर लगी हो। सामने के दांतों के ठीक पीछे आराम से टिकी होनी चाहिए।
  • शुरुआत में आपको चक्कर आ सकते हैं, लेकिन घबराने की बात नहीं है।
  • शुरू में केवल 4 राउंड का ही अभ्यास करना चाहिए। जैसे-जैसे आदत होने लगेगी, 8 बार तक इसे कर सकते हैं।
  • शांत और एकांत वातावरण चाहिए।
  • पेट भरा ना हो, इसका ध्यान रखें।

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क्या कहता है आयुर्वेद?

आयुर्वेद के मुताबिक सांस लेना और छोड़ना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। यह बहुत गहन और अहम प्रक्रिया है। इसपर ध्यान आकर्षित करने से कई लाभ मिल सकते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि जिसकी सांसों की गति धीमी होगी वह लंबी आयु प्राप्त करेगा। जब भी किसी कारणवश आप तनाव या चिंता में होंगे तब इसका अभ्यास जरूर करें, इससे आपकी हृदय गति सामान्य हो जाएगी।


शुरुआत में अगर किसी को ज्यादा देर सांस रोकने में परेशानी आती है तो 3 सेकेंड का अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन गिनती जरूर करें। जिन्हें अस्थमा या सांस संबंधित कोई भी समस्या है वे पहले डाक्टर से सलाह लें। खुद के साथ जबरदस्ती नहीं करनी है। यह सच है कि धीर गति से सांस लेने से आयु लंबी होती है, लेकिन अगर आप जल्दी-जल्दी सांस लेते हैं तो शरीर के सभी अंगों तक आक्सीजन ठीक से नहीं पहुंचता। नतीजा शरीर दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, हृदय रोग जैसी समस्याएं होने लगती हैं। अगर धीर गति से सांस लेते हैं तो हमारा पैरासिमपेथेटिक मोड काम करने लगता है। शरीर में सूजन कम होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। शरीर के अंदर ही हेल्दी वातावरण तैयार होता है।

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लेखक- सुमन अग्रवाल

 

एक्सपर्ट का कहना है तनाव और एंग्जायटी को कम करने में बॉक्स ब्रीदिंग मदद कर सकती है। हरजिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

 

 

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