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जिम में इस्तेमाल होने वाली Treadmill का इतिहास है कैदियों से जुड़ा, जानें कैसे हुआ इसका आविष्कार?

हम जब भी जिम जाते हैं, तो वहां पर अलग-अलग मशीन, टूल्स और ट्रेडमिल दिखाई देते हैं, लेकिन अगर मैं आपसे कहूं कि जिस Treadmill पर चलकर आप अपनी बॉडी को फिट रखते हैं वह कैदियों को टॉर्चर करने के लिए बनाई गई थी। नीचे लेख में जानें इसके आविष्कार की कहानी-
Updated:- 2026-06-26, 19:53 IST
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जिम में वजन कम करने और खुद को फिट रखने के लिए आज जिस ट्रेडमिल का इस्तेमाल किया जा रहा है उसका इतिहास हैरान कर देने वाला है। जिस मशीन पर आज लोग अपनी मर्जी से दौड़ते हैं, वह कभी कैदियों को तड़पाने और सजा देने का जरिया हुआ करती थी। इसका आविष्कार 19वीं सदी के एक ब्रिटिश इंजीनियर ने जेल के कैदियों से कड़ी मेहनत कराने के लिए किया था। चलिए नीचे लेख में जानते हैं सजा देने वाला यह मशीन आज पसंदीदा फिटनेस उपकरण कैसे बन गया?

ट्रेडमिल मशीन किसने बनाई थी?

ट्रेडमिल का साल 1818 में इंग्लैंड के सिविल इंजीनियर विलियम क्यूबिट ने आविष्कार किया था। उस समय इंग्लैंड की जेल की हालत बहुत खराब थी और कैदी पूरा दिन खाली बैठे रहते थे। क्यूटिब का मनाना था कि कैदियों को बंद रखने के बजाय उनसे काम कराया जाता चाहिए, जिससे उनका आलस दूर रहे। इसके लिए उन्होंने ट्रेडव्हील नाम की एक मशीन बनाई, जिसे बाद में ट्रेडमिल (Treadmill) कहा गया।

history of treadmill

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पुरानी ट्रेडव्हील कैसे थी और कैदी से कैसे कराया था काम?

शुरुआती ट्रेडव्हील (ट्रेडमिल) आज की मशीन से बहुत अलग थी। यह बहुत बड़े घूमते हुए लकड़ी के बेलन जैसी होती थी, जिसके चारों तरफ सीढ़ियां बनी हुई थीं। कैदियों को इस मशीन पर सीधे खड़े होकर लगातार ऊपर की तरफ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं। कैदी जैसे ही कदम बढ़ाता, वह बेलन नीचे घूम जाता और गिरने से बचने के लिए लगातार चलते रहना पड़ता था। इस पर कई कैदियों को एक साथ इस पर खड़ा कर दिया जाता था और वे आपस में बात न कर सकें। इसके लिए उनके बीच में लकड़ी के विभाजन बना दिए जाते थे।

लगातार चलने के साथ-साथ होता था अनाज पीसने का काम

विलियम क्यूबिट ने इस मशीन को इस तरह बनाया था कि कैदियों की इस मेहनत का इस्तेमाल किया जा सके। जब कैदी इस बड़े पहिये पर चलते थे, तो उससे पैदा होने वाली ताकत से चक्कियां चलाई जाती थीं। इस चक्की से अनाज पीसा जाता था और कुओं से पानी निकाला जाता था।

treadmill

 

ट्रेडमिल कैसे पड़ा नाम?

अब सवाल आता है कि फिर इसका नाम ट्रेडव्हील से ट्रेडमिल कैसे पड़ा? इसके नाम के पीछे का मतलब ट्रेड जिसका पुराना मतलब चलना या कुचलना होता था और मिल यानी चक्की को मिलाकर ट्रेडमिल पड़ा।

ट्रेडमिल को क्यों कहा जाता है सजा देने वाला मशीन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैदियों को दिन में 6 से 8 घंटे तक इस मशीन पर लगातार चलना पड़ता था। वे औसतन हर दिन 5,000 से 14,000 फीट तक की ऊंचाई चढ़ जाते थे, जो कि लगभग दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को हर दिन चढ़ने के बराबर था। इस शारीरिक थकान और कम खाने के कारण कई कैदी गंभीर रूप से बीमार हो जाते थे और कई की मौत भी हो जाती थी। इसे देखते हुए साल 1902 में ब्रिटिश सरकार ने जेलों में इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया।

treadmill history

सजा वाली मशीन कैसे बना फिटनेस टूल?

जेलों में बैन होने के कई दशकों बाद, 1950 और 60 के दशक में डॉक्टरों ने महसूस किया कि दिल की बीमारियों से बचने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दौड़ना और चलना बेहद जरूरी है। इसके बाद अमेरिकी डॉक्टर रॉबर्ट ब्रूस और वेन क्विंट ने मेडिकल टेस्ट के लिए पहली आधुनिक इलेक्ट्रिक ट्रेडमिल बनाई। धीरे-धीरे यह मशीन घरों से लेकर जिमों तक पहुंच गई।

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