घर को बच्चे की पहली पाठशाला और माँ को पहली टीचर कहा जाता है। मां  ही बच्चे को घर से बाहर की दुनिया दिखाती और समझाती है।  हर मां  की ख्वाहिश होती है की उसके बच्चे को दुनिया का हर सुख मिले।  इसके लिए हार्डवर्क और छोटी छोटी बचत करके वह अपने बच्चे के अच्छे भविष्य की कल्पना करती है।  मगर महंगाई के इस जमाने में बच्चे की ख्वाहिशों का ध्यान और अच्छे भविष्य की कल्पना, दोनों एक साथ होना आसान काम नहीं है।  जाहिर है अच्छे भविष्य की कल्पना करना तो बंद नहीं किया जा सकता मगर बच्चे की ख्वाहिशों पर लगाम जरूर कसी जा सकती है।  फाइनेंस एक्सपर्ट अरविन्द सेन कहते हैं, ' ख्वाहिसों पर लगाम कसने से मतलब यह नहीं कि आप अपने बच्चे की हर बात को मन कर दें।  बल्कि , आप बच्चे को सिखाएं की अपनी ख्वाहिसों को पूरा करने के लिए पैसों की बचत कितनी जरूरी है।' 

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टॉय के रूप में दें गुल्लक 

आप अपने बच्चे को बेशक खूब मेहेंगे मेहेंगे टॉयज दिलाएं मगर इन टॉयज के साथ उसे एक गुल्लक भी जरूर दिलाएं। बच्चे को गुल्लक की एहमियत समझाएं और उसमें हर दिन कुछ पैसे भी पड़वाएं ।  यह शुरुआत आप खुद कर सकती हैं।  बच्चा आपको रोज गुल्लक में पैसे डालते देखेगा तो खुद ही इनकरेज होगा। गुल्लक में पैसे डालने के लिए आप बच्चे को तब ही पैसे दें जब वह आपका कहा कोई काम करे. इससे बच्चे को यह पता चलेगा की पैसे किसी काम के बदले में ही मिलते हैं. इस तरह उसे पैसे की कीमत समझ में आएगी। अपने बच्चे को कुछ ख़ास दिनों जैसे फादर्स डे , मदर्स डे और ख़ास बर्थ डे के महत्त्व को समझाएं और जमा किये पैसों से दूसरों को गिफ्ट देने या अपने लिए कोई सामन खरीदने की आदत डालें। इस तरह बच्चा यह बात समझ पाएगा कि उसे कोई भी सामान किसी ख़ास अवसर पर ही मिलेगा। 

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न बने बच्चे का एटीएम 

बच्चे के साथ ट्रैवल करते वक्त ऐसे मौके कई बार आते होंगे जब उसे कुछ चाहिए हो और वह आपको उस चीज़ को खरीदने के लिए बोले। मगर यह सही बात नहीं है. ऐसे में बच्चे को लगेगा की जब भी आप उनके साथ होंगी तब जो उन्हें चाहिए होगा उन्हें मिल जाएगा। मगर आप अगर बच्चे के साथ बाहर निकलने से पहले ही उसे बता देंगी उनके पास कितना एमाउंट खर्च करने के लिए है, तो शायद हर सामन को देख कर वो आपसे खरीदने को नहीं कहेंगे।  यदि फिर भी बच्चा किसी सामान के लिए जिद करे तो उसे समझाएं की जो सामान वो खरीदना चाहता है उसकी कीमत उसके पर्स में मौजूद पैसों से कम  है।  इससे बच्चे मेहेंगी और सस्ती चीज़ों में अंतर समझ आएगा। 

बच्चे की हर जिद न करें पूरी 

बच्चों का तो काम ही जिद करना, मगर आप उनकी हर जिद पूरी करेगी तो उन्हें पैसों की कीमत कभी समझ नहीं आएगी साथ ही उन्हें लग्जरी की आदत हो जाएगी। बच्चे जिद करें तो उन्हें समझाएं की जिन पैसों को वो वेस्ट कर रहे हैं वही पैसे उनके किसी जरूरी सामान को खरीदने के काम आएंगे। उन्हें इस बात का भी दर दे सकते हैं कि यदि उनका जरूरी सामान नहीं खरीदा गया तो उन्हें भविष्य में क्या मुसीबतें झेलनी पद सकती हैं।  

बैंकिंग की दें बेसिक जानकारी 

अपने बच्चे को बैंकिंग की बेसिक नॉलेज जरूर दें।  जब भी बैंक जाएं तो बच्चे को साथ ले जाएं। बच्चे को बैंक का महत्त्व समझाएं। उसे बताएं की बैंक में किस तरह उसके पैसे सुरक्षित हैं और जरूरत पड़ने में उसे किस तरह से इन पैसों से मदद मिल सकती है. हो सके तो बच्चे का भी एक एकाउंट खुलवाएं।  

एक फिक्स्ड पॉकेट मनी जरूर दें 

हर माता पिता अपनी संतान को उसके बड़े होने पर ही पॉकेट मनी देते हैं , मगर बच्चा जब से  स्कूल जाने लगे तब से उसे फिक्स्ड पॉकेट मनी जरूर दें।  हां , यह पैसे आप उसकी गुल्लक में डालें और समय समय पर उन पैसों से बच्चे के लिए जरूरत का सामन खरीदते रहें। गुल्लक में पैसे निकलने और डलवाने का काम भी बच्चे से करवाएं इससे बच्चा समझदार बनेगा। उसे पैसों की गिनती समझ आएगी और यह भी समझ आएगा कि  किस तरह की जरूरत पड़ने पर पैसा खर्च करना चाहिए।