'लद्दाख का गोल्ड' कहलाता है यह खास फल, जानें सी बकथार्न की खासियत और इस्तेमाल का तरीका

सी बकथॉर्न लद्दाख का जीआई टैग वाला खास सुपरफूड है, जिसे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लद्दाख का सोना कहा है। इसमें भरपूर विटामिन सी और पोषक तत्व पाए जाते हैं।
Updated:- 2026-10-24, 10:57 IST
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लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों पर उगने वाला एक छोटा सा नारंगी रंग का फल इन दिनों खूब चर्चा में है। हम बात कर रहे हैं सी बकथॉर्न (Sea Buckthorn) की, जिसे लेह बेरी भी कहा जाता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस फ्रूट की फोटो शेयर करते हुए इसे लद्दाख का सोना (गोल्ड) बताया है। इसकी खास बात यह है क‍ि इसे जीआई टैग भी म‍िल चुका है।

यह फल सुपरफूड से कम नहीं है। यह अपने खट्टे स्वाद और जबरदस्त पोषण के लिए जाना जाता है। यह फल बहुत ही ठंडे और सूखे इलाकों में नेचुरली उगता है। यह छोटी सी बेरी हेल्‍थ के लि‍ए क‍िसी वरदान से कम नहीं मानी जाती है। आइए इसके बारे में जानते हैं क‍ि सी बकथॉर्न में ऐसा क्या खास है और यह हमारे लिए क्यों इतना फायदेमंद है?

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सी बकथॉर्न की खासियत और इसमें छिपे गुण

अगर हम सी बकथॉर्न की खासियत और इनके गुणों की बात करें, तो नीचे के प्‍वॉइंटर्स पढ़ें-

  • सी बकथॉर्न में नींबू की तुलना में कई गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। इसके 100 ग्राम में करीब 275 मिलीग्राम तक विटामिन सी हो सकता है।
  • सिर्फ विटामिन सी ही नहीं बल्कि इसमें विटामिन ई, बी-विटामिन और कैरोटीनॉयड (विटामिन ए का रूप) भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • इसके बीज और पल्प से निकलने वाले ऑयल में ओमेगा-3, 6, 7 और 9 जैसे अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स मिलते हैं।
  • इस फल में फेनोलिक कंपाउंड और फ्लेवेनॉएड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं। ये शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

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सी बकथॉर्न को लद्दाख का गोल्ड और सुपरफूड क्यों कहते हैं?

आपको बता दें क‍ि लद्दाख की नुब्रा वैली और रेतीली बंजर जमीन पर करीब 4000 से 14000 फीट की ऊंचाई पर यह फल उगता है। इसकी खास बात यह है क‍ि यह पौधा कम बारिश और कड़कड़ाती ठंड में भी आसानी से टिक जाता है। इसके ढेरों फायदों और शानदार क्वालिटी की वजह से इसे साल 2023 में जीआई टैग दिया गया था, जिसने इसे 'लद्दाख का सोना' बना दिया।

 

सी बकथॉर्न को इस्तेमाल करने और खाने का तरीका

सी बकथॉर्न स्वाद में काफी ज्यादा खट्टा होता है, इसलिए इसे सीधे कच्चा खाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसी वजह से इसके खट्टेपन को बैलेंस करके अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है। जैसे-

  • लद्दाख के लोग और कंपनियां इसका खट्टा-मीठा जूस, सीरप और कंसन्ट्रेट बनाकर पीती हैं।
  • इस बेरी का स्वादिष्ट जैम भी बनाया जाता हे। इसकी पत्तियों से हर्बल टी भी बनती है।
  • सी बकथॉर्न के बीज और गूदे से निकलने वाले तेल का इस्तेमाल स्किन केयर प्रोडक्ट्स, क्रीम और दवाओं में भी खूब होता है।

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FAQ
सी बकथॉर्न को 'लद्दाख का सोना' क्यों कहा जाता है?
इसके ढेरों औषधीय गुणों, भरपूर न्यूट्रिशन और लद्दाख की अर्थव्यवस्था में बड़े योगदान के कारण इसे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 'लद्दाख का सोना' बताया है। 
क्या सी बकथॉर्न में सच में नींबू से ज्यादा विटामिन सी होता है?
हां, माना जाता है कि सी बकथॉर्न में नींबू की तुलना में कई गुना ज्यादा (100 ग्राम में करीब 275 मिलीग्राम) विटामिन सी होता है।  
इस फल को सीधे कच्चा खाना मुश्किल क्यों होता है?
सी बकथॉर्न का स्वाद बहुत ज्यादा खट्टा होता है, इसलिए लोग इसे सीधे खाने के बजाय इसका जूस, जैम, सीरप या चाय बनाकर इस्तेमाल करते हैं।  
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